{"_id":"57c5db1b4f1c1b0d582cbf8c","slug":"sterilization-surgeon-to-come-late","type":"story","status":"publish","title_hn":"नसबंदी करने देर से आते हैं सर्जन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नसबंदी करने देर से आते हैं सर्जन
jaunpur
Updated Wed, 31 Aug 2016 12:44 AM IST
विज्ञापन
आॅपरेशन के बाद फर्श पर लेटी महिलाएं
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महराजगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी का आपरेशन कराने आई महिलाओं को डाक्टर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। करीब दस घंटे के इंतजार के बाद डॉक्टर आए भी तो मशीन खराब हो गई और वे आपरेशन के लिए कट लगी महिला को वैसे ही छोड़ कर चले गए। डॉक्टर के इस रवैये को लेकर लोगों में गुस्सा भर गया था।
अपनी पत्नी के साथ आए सवंसा गांव निवासी अंबरीश सिंह ने कहा कि आपरेशन के लिए महिलाएं मंगलवार की सुबह 9 बजे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गई थीं। उनके साथ उनके परिवारवाले और कुछ छोटे बच्चे भी थे। हम सब लोग डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। अस्पताल के लोगों से पूछा जाता था कि डॉक्टर साहब कब तक आएंगे तो वे गोलमोल जवाब देते थे।
आशाएं भी परेशान थीं। जिनके पास छोटे बच्चे थे वे ज्यादा परेशान थीं। अस्पताल में दूध आदि की कोई व्यवस्था नहीं थी। इंतजार करते-करते शाम हो गई तो कंपाउंडर ने एक साथ कई महिलाओं को बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। थोड़ी देर बाद डॉक्टर आए। फत्तूपुर निवासी सरनाम और नन्हें लाल ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब है। कोई पूरी बात भी नहीं बताता है। सुबह से शाम तक इंतजार के बाद डॉक्टर आए और एक महिला का आपरेशन करने गए तो मशीन खराब हो गई। पूछने पर कहा कि लेप्रोस्कोपिक मशीन का लाइट सोर्स खराब हो गया है। इसके बाद वे वहां से चले गए।
विज्ञापन
काफी लोग अपने घर की महिलाओं को अर्द्धबेहोशी की हालत में ही लेकर चले गए। हम लोग इंतजार करते रहे रात 9.30 बजे के करीब मछलीशहर से दूसरी मशीन आई तो आपरेशन हुआ। इस दौरान खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं था। पहले बताया गया था कि यहां सब व्यवस्था रहेगी। लेकिन शिविर में इंतजार के बाद भी कोई इंतजाम नहीं रहा। आशा कार्यकर्ता छाया सिंह, फूलकुमारी और मीना देवी ने कहा कि ज्यादातर नसबंदी शिविरों में डॉक्टर काफी देर से आते हैं। जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है।
मशीन ठीक होने के बाद तब सुशीला देवी, सुनीता देवी, सरोजा, रिशू उपाध्याय, शहीदुन्निशां, खुशबू, उजाला, विद्यादेवी अंजना, सहित 13 महिलाओं का आपरेशन किया गया
विज्ञापन
अपनी पत्नी के साथ आए सवंसा गांव निवासी अंबरीश सिंह ने कहा कि आपरेशन के लिए महिलाएं मंगलवार की सुबह 9 बजे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंच गई थीं। उनके साथ उनके परिवारवाले और कुछ छोटे बच्चे भी थे। हम सब लोग डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। अस्पताल के लोगों से पूछा जाता था कि डॉक्टर साहब कब तक आएंगे तो वे गोलमोल जवाब देते थे।
विज्ञापन
आशाएं भी परेशान थीं। जिनके पास छोटे बच्चे थे वे ज्यादा परेशान थीं। अस्पताल में दूध आदि की कोई व्यवस्था नहीं थी। इंतजार करते-करते शाम हो गई तो कंपाउंडर ने एक साथ कई महिलाओं को बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया। थोड़ी देर बाद डॉक्टर आए। फत्तूपुर निवासी सरनाम और नन्हें लाल ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था बहुत खराब है। कोई पूरी बात भी नहीं बताता है। सुबह से शाम तक इंतजार के बाद डॉक्टर आए और एक महिला का आपरेशन करने गए तो मशीन खराब हो गई। पूछने पर कहा कि लेप्रोस्कोपिक मशीन का लाइट सोर्स खराब हो गया है। इसके बाद वे वहां से चले गए।
विज्ञापन
काफी लोग अपने घर की महिलाओं को अर्द्धबेहोशी की हालत में ही लेकर चले गए। हम लोग इंतजार करते रहे रात 9.30 बजे के करीब मछलीशहर से दूसरी मशीन आई तो आपरेशन हुआ। इस दौरान खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं था। पहले बताया गया था कि यहां सब व्यवस्था रहेगी। लेकिन शिविर में इंतजार के बाद भी कोई इंतजाम नहीं रहा। आशा कार्यकर्ता छाया सिंह, फूलकुमारी और मीना देवी ने कहा कि ज्यादातर नसबंदी शिविरों में डॉक्टर काफी देर से आते हैं। जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है।
मशीन ठीक होने के बाद तब सुशीला देवी, सुनीता देवी, सरोजा, रिशू उपाध्याय, शहीदुन्निशां, खुशबू, उजाला, विद्यादेवी अंजना, सहित 13 महिलाओं का आपरेशन किया गया