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सास, देवर को सात साल की कैद
jaunpur
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:57 AM IST
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शाहगंज थाना क्षेत्र के सुरिश गांव में 19 वर्ष पूर्व दहेज में मोटर साइकल व टीवी की मांग को लेकर नव विवाहिता की गई हत्या के मामले में शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज एमपी सिंह ने सास व देवर को दोषी करार देते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास एवं ढाई-ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार, आजमगढ़ जनपद के फूलपुर थाना क्षेत्र के वनबीरपुर निवासी हनुमान सिंह ने शाहगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी पुत्री अनामिका की शादी 24 मई 1996 को राम मूरत पुत्र शारदा सिंह निवासी सुरशि के साथ किया था। सुसराल ससुर शारदा सिंह, सास राधिका देबी, पति राममूरत सिंह, जेठ पीतांबर, हरि प्रसाद व राधेश्याम, देवर जज्जन सिंह उर्फ राम सूरत दहेज में मोटरसाइकल व टीवी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। जब मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने अनामिका की हत्या कर दी। छह जून 1997 की सुबह अपने गांव के रामप्रसाद व विनोद आदि के साथ पुत्री की ससुराल गया तो वहां के लोगों ने बताया कि अनामिका की हत्या कर रात में ही शव पिलकिछा घाट पर जला दिया गया।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव व राजनाथ चौहान ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात इस आधार पर की मृतका के मायके वालों को बिना सूचना दिए चोरी छिपे शव को जला दिए। घटना में संलिप्त पाते हुए आरोपी सास राधिका देवी व देवर रामसूरत सिंह को दोषी करार देते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास एवं ढ़ाई-ढ़ाई हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि आरोपी पति राममूरत, ससुर शारदा सिंह व जेठ पीतांबर की दौरान विचारण मुकदमा मौत हो गई। इस लिए उनके विरुद्ध मुकदमा अबेट कर दिया गया। साथ ही आरोपी हरि प्रसाद व राधेश्याम सिंह संदेह का लाभ पाते हुए बरी हो गए।
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अभियोजन के अनुसार, आजमगढ़ जनपद के फूलपुर थाना क्षेत्र के वनबीरपुर निवासी हनुमान सिंह ने शाहगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी पुत्री अनामिका की शादी 24 मई 1996 को राम मूरत पुत्र शारदा सिंह निवासी सुरशि के साथ किया था। सुसराल ससुर शारदा सिंह, सास राधिका देबी, पति राममूरत सिंह, जेठ पीतांबर, हरि प्रसाद व राधेश्याम, देवर जज्जन सिंह उर्फ राम सूरत दहेज में मोटरसाइकल व टीवी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने लगे। जब मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने अनामिका की हत्या कर दी। छह जून 1997 की सुबह अपने गांव के रामप्रसाद व विनोद आदि के साथ पुत्री की ससुराल गया तो वहां के लोगों ने बताया कि अनामिका की हत्या कर रात में ही शव पिलकिछा घाट पर जला दिया गया।
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पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव व राजनाथ चौहान ने कुल सात गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात इस आधार पर की मृतका के मायके वालों को बिना सूचना दिए चोरी छिपे शव को जला दिए। घटना में संलिप्त पाते हुए आरोपी सास राधिका देवी व देवर रामसूरत सिंह को दोषी करार देते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास एवं ढ़ाई-ढ़ाई हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि आरोपी पति राममूरत, ससुर शारदा सिंह व जेठ पीतांबर की दौरान विचारण मुकदमा मौत हो गई। इस लिए उनके विरुद्ध मुकदमा अबेट कर दिया गया। साथ ही आरोपी हरि प्रसाद व राधेश्याम सिंह संदेह का लाभ पाते हुए बरी हो गए।
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