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हत्या में दो सगे भाइयों को उम्रकैद
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:50 AM IST
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supreme court
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जफराबाद थाना क्षेत्र में लगभग नौ वर्ष पूर्व मुकदमेबाजी की रंजिश में हत्या के मामले में सोमवार को स्पेशल जज(ईसी एक्ट) बंशबहादुर यादव ने दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
अर्थ दंड की धनराशि अदा नहीं करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन कथानक के अनुसार-जफराबाद क्षेत्र के नेवादा निवासी सुरेंद्र कुमार सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सात अक्तूबर 2007 को बबलू सिंह के यहां बरही था।
इसमें परिवार के सभी लोग निमंत्रित थे। जिसमें मै और मेरा पुत्र अजय प्रकाश व विजय प्रकाश गए हुए थे। अजय प्रकाश मछलीशहर पड़ाव स्थित संजीवनी पैथालाजी से अपनी रिपोर्ट लेने चले गए थे। रिपोर्ट लेकर अजय प्रकाश पुन: दावत में आ रहे थे।
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तभी रात आठ बजे महरुपुर में साधू सिंह के मकान के पास पहुंचे तो वहां पर दो मोटर साइकल पर सवार मेरे पट्टीदार रामाज्ञा सिंह और उनके पुत्र शनि उर्फ हेमंत सिंह व आशीष उर्फ दीपक सिंह और मिर्जापुर जिले के जीगना थाना क्षेत्र के गोगांव निवासी रमेश चौबे मिले।
मेरे बेटे को रोक कर रामाज्ञा के ललकारने पर उस पर ताबड़तोड़ फायर कर दिए। इससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। विवेचना के दौरान जलालपुर थाना क्षेत्र के लोह गाजर निवासी धनंजय सिंह उर्फ पुच्चू व जरीहला निवासी गोपाल उर्फ अमित का नाम भी प्रकाश में आया।
अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव व राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कुल 10 गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात आरोपी जफराबाद थाना क्षेत्र के नेवादा निवासी शनि उर्फ हेमंत सिंह व
आशीष उर्फ दीपक सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी रामाज्ञा सिंह, धनंजय सिंह उर्फ पच्चू और गोपाल उर्फ अमित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, जबकि आरोपी रमेश चौबे फरार घोषित है।
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अर्थ दंड की धनराशि अदा नहीं करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन कथानक के अनुसार-जफराबाद क्षेत्र के नेवादा निवासी सुरेंद्र कुमार सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सात अक्तूबर 2007 को बबलू सिंह के यहां बरही था।
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इसमें परिवार के सभी लोग निमंत्रित थे। जिसमें मै और मेरा पुत्र अजय प्रकाश व विजय प्रकाश गए हुए थे। अजय प्रकाश मछलीशहर पड़ाव स्थित संजीवनी पैथालाजी से अपनी रिपोर्ट लेने चले गए थे। रिपोर्ट लेकर अजय प्रकाश पुन: दावत में आ रहे थे।
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तभी रात आठ बजे महरुपुर में साधू सिंह के मकान के पास पहुंचे तो वहां पर दो मोटर साइकल पर सवार मेरे पट्टीदार रामाज्ञा सिंह और उनके पुत्र शनि उर्फ हेमंत सिंह व आशीष उर्फ दीपक सिंह और मिर्जापुर जिले के जीगना थाना क्षेत्र के गोगांव निवासी रमेश चौबे मिले।
मेरे बेटे को रोक कर रामाज्ञा के ललकारने पर उस पर ताबड़तोड़ फायर कर दिए। इससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। विवेचना के दौरान जलालपुर थाना क्षेत्र के लोह गाजर निवासी धनंजय सिंह उर्फ पुच्चू व जरीहला निवासी गोपाल उर्फ अमित का नाम भी प्रकाश में आया।
अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता संजय श्रीवास्तव व राजेश कुमार श्रीवास्तव ने कुल 10 गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के पश्चात आरोपी जफराबाद थाना क्षेत्र के नेवादा निवासी शनि उर्फ हेमंत सिंह व
आशीष उर्फ दीपक सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी रामाज्ञा सिंह, धनंजय सिंह उर्फ पच्चू और गोपाल उर्फ अमित को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, जबकि आरोपी रमेश चौबे फरार घोषित है।