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पति, सास और ससुर को उम्रकैद की सजा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 05 Jun 2016 01:04 AM IST
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11 साल से न्याय के लिए भटक रही है पीड़िता
- फोटो : Demo
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सिंगरामऊ के जगदीशपुर गांव में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को प्रताड़ित करने और मांग पूरी नहीं होने पर गला दबा कर हत्या करने के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम (एफटीसी) के न्यायाधीश एमपी सिंह ने शनिवार को आरोपी पति, सास व ससुर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही 10-10 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन कथानक के अनुसार- सिंगरामऊ थाना क्षेत्र के किशुनपुर(मझवारा) गांव निवासी प्यारेलाल निषाद ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री सीमा की शादी 30 जुलाई 2009 को जगदीशपुर निवासी दिनेश पुत्र कोलई राम के साथ किया था।
लड़की विदा होकर ससुराल गई तो पति दिनेश, सास फिरता देवी व ससुर कोलई राम दहेज में सोने की अंगूठी व सिकड़ी की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 21 अक्तूबर 2012 की अपराह्न तीन बजे हत्या कर दिये।
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पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने कुल छह गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। मामले के सभी गवाह पक्ष द्रोही हो गए। न्यायाधीश ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्योें के आधार तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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साथ ही 10-10 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन कथानक के अनुसार- सिंगरामऊ थाना क्षेत्र के किशुनपुर(मझवारा) गांव निवासी प्यारेलाल निषाद ने थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी पुत्री सीमा की शादी 30 जुलाई 2009 को जगदीशपुर निवासी दिनेश पुत्र कोलई राम के साथ किया था।
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लड़की विदा होकर ससुराल गई तो पति दिनेश, सास फिरता देवी व ससुर कोलई राम दहेज में सोने की अंगूठी व सिकड़ी की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। मांग पूरी नहीं होने पर 21 अक्तूबर 2012 की अपराह्न तीन बजे हत्या कर दिये।
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पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने कुल छह गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया। मामले के सभी गवाह पक्ष द्रोही हो गए। न्यायाधीश ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्योें के आधार तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।