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पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंजे
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:20 AM IST
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फैसला आने के बाद आतंकवाद के विरोध में नारेबाजी करते अधिवक्ता।
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कड़ी सुरक्षा के बीच श्रमजीवी बम विस्फोट के आतंकी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी जब वज्र वाहन से उतर कर न्यायालय की तरफ बढ़ा तो उसके चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं थी। हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) के आतंकवादी से दंड के प्रश्न पर जब जज ने उससे सवाल किया तो उसने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि वह शुरू से नार्को टेस्ट कराने की
मांग कर रहा है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। फैसला आते ही वहां मौजूद लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए।न्यायाधीश ने उसके गुनाहों का जिक्र करते हुए जैसे ही उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। थोड़ी देर के लिए उसने ऊपर देखा और मन में कुछ बुदबुदाते हुए हाथ फैलाकर दुआ पढ़ी, फिर उसके चेहरे का रंग बदल
गया और वह सामान्य हालत में कटघरे में खड़ा रहा। इस दौरान उसने अपने अधिवक्ता से आगे की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली। उसने बैगनी रंग की टी शर्ट, ग्रे कलर का जींस पैंट और हवाई चप्पल पहन रखी थी। उसके परिवार से यहां कोई आया है या नहीं? इस सवाल पर वह खामोश रहा। कई बार कुरेदने के बाद भी उसकी जुबान नहीं खुली।
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न्यायाधीश ने अपने 94 पेज के फैसले में कहा है कि उसने ऐसा जघन्यतम अपराध किया है कि उसे मृत्युदंड के अलावा अन्य दंड दिया जाना अपराध के समतुल्य नहीं होगा। अभियुक्त किसी भी तरह की सहानुभूति का पात्र नहीं है और उसे दंड देते समय कोई नरमी बरतने का औचित्य नहीं है।
मो. आलमगीर उर्फ रोनी को न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाते ही बाहर जमा अधिवक्ताओं व वादकारियों की भीड़ ने खुशी जाहिर करते हुए पाकिस्तान और आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए। सभी ने अदालत के इस फैसले की प्रशंसा की। कहा कि यह फैसला आतंकवाद को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे आतंकी भयभीत होंगे। यह संदेश जाएगा कि अपराध करोगे तो दंड जरूर मिलेगा।
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मांग कर रहा है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। फैसला आते ही वहां मौजूद लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए।न्यायाधीश ने उसके गुनाहों का जिक्र करते हुए जैसे ही उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। थोड़ी देर के लिए उसने ऊपर देखा और मन में कुछ बुदबुदाते हुए हाथ फैलाकर दुआ पढ़ी, फिर उसके चेहरे का रंग बदल
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गया और वह सामान्य हालत में कटघरे में खड़ा रहा। इस दौरान उसने अपने अधिवक्ता से आगे की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली। उसने बैगनी रंग की टी शर्ट, ग्रे कलर का जींस पैंट और हवाई चप्पल पहन रखी थी। उसके परिवार से यहां कोई आया है या नहीं? इस सवाल पर वह खामोश रहा। कई बार कुरेदने के बाद भी उसकी जुबान नहीं खुली।
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न्यायाधीश ने अपने 94 पेज के फैसले में कहा है कि उसने ऐसा जघन्यतम अपराध किया है कि उसे मृत्युदंड के अलावा अन्य दंड दिया जाना अपराध के समतुल्य नहीं होगा। अभियुक्त किसी भी तरह की सहानुभूति का पात्र नहीं है और उसे दंड देते समय कोई नरमी बरतने का औचित्य नहीं है।
मो. आलमगीर उर्फ रोनी को न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाते ही बाहर जमा अधिवक्ताओं व वादकारियों की भीड़ ने खुशी जाहिर करते हुए पाकिस्तान और आतंकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए। सभी ने अदालत के इस फैसले की प्रशंसा की। कहा कि यह फैसला आतंकवाद को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे आतंकी भयभीत होंगे। यह संदेश जाएगा कि अपराध करोगे तो दंड जरूर मिलेगा।