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आपात ड्यूटी के दौरान डयूटीरूम में नही रहते चिकित्सक
Updated Tue, 06 Nov 2018 12:53 AM IST
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इलाज में देरी से मासूम की हुई मौत
मछलीशहर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी में इलाज में देरी के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सक पर समय से नहीं पहुंचने और लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई के लिए अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया है। अधीक्षक ने मामले की जांच कर दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सिकरारा थाना क्षेत्र नेवढ़िया गांव निवासी मीना कुमारी ने रविवार की भोर में सामान्य प्रसव से बेटी को जन्म दिया। मरीज को महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। देर रात नवजात की हालत अचानक खराब हो गई। जेठानी सरस्वती ने बताया कि वह अस्पताल के वार्ड ब्वाय तथा नर्स के पास गई। वह सो रहे थे और उसे डांटकर भगाते हुए इमरजेंसी में जाने को कहा। इमरजेंसी में तैनात सिस्टर भी उसको दूसरे कमरे में जाने की बात कहकर सो गई। जब वह बगल के कमरे में गई तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसको डांटा और अभद्रता करते हुए उनपर ही लापरवाही का आरोप लगाने लगी। इसके बाद वह इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक को बुलाने गई। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक अस्पताल में बने अस्पताल की बजाय अपने आवास पर सो रहे थे। चिकित्सक काफी देर बाद मौके पर पहुंचे। उनके आने तक नवजात ने दम तोड़ दिया था।
मीना को जैसे ही पता चला कि बच्ची की मौत हो गई है तो वह भी बेहोश हो गई। मीना के जेठ महेंद्र कुमार ने अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी के समय चिकित्सक के नहीं रहने से शिशु की मौत हुई है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रफीक फारूखी का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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मछलीशहर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इमरजेंसी में इलाज में देरी के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सक पर समय से नहीं पहुंचने और लापरवाही का आरोप लगाकर कार्रवाई के लिए अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया है। अधीक्षक ने मामले की जांच कर दोषी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सिकरारा थाना क्षेत्र नेवढ़िया गांव निवासी मीना कुमारी ने रविवार की भोर में सामान्य प्रसव से बेटी को जन्म दिया। मरीज को महिला वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। देर रात नवजात की हालत अचानक खराब हो गई। जेठानी सरस्वती ने बताया कि वह अस्पताल के वार्ड ब्वाय तथा नर्स के पास गई। वह सो रहे थे और उसे डांटकर भगाते हुए इमरजेंसी में जाने को कहा। इमरजेंसी में तैनात सिस्टर भी उसको दूसरे कमरे में जाने की बात कहकर सो गई। जब वह बगल के कमरे में गई तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसको डांटा और अभद्रता करते हुए उनपर ही लापरवाही का आरोप लगाने लगी। इसके बाद वह इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक को बुलाने गई। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक अस्पताल में बने अस्पताल की बजाय अपने आवास पर सो रहे थे। चिकित्सक काफी देर बाद मौके पर पहुंचे। उनके आने तक नवजात ने दम तोड़ दिया था।
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मीना को जैसे ही पता चला कि बच्ची की मौत हो गई है तो वह भी बेहोश हो गई। मीना के जेठ महेंद्र कुमार ने अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी के समय चिकित्सक के नहीं रहने से शिशु की मौत हुई है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रफीक फारूखी का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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