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साढ़े 9 लाख की ठगी से बचा ब्यापारी
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:07 AM IST
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मुंगराबादशाहपुर। स्थानीय कस्बे का एक हार्डवेयर व्यापारी साढे़ 9 लाख ठगी का शिकार होने से बच गया । ठग ने अखबार की स्कीम का लाभ देने के नाम पर 400 रुपये का चेक लिया। चेक पर रकम और तारीख मैजिक पेन से भर दिया था। बाद में तारीख बदलकर साढ़े नौ लाख रुपये लिख लिए और चेक दूसरे के खाते में आरटीजीएस करने के लिए लगा दिया। व्यापारी के मोबाइल पर धन निकासी के समय मैसेज न आए, इस गर्ज से उसका मोबाइल नंबर भी लाक करा दिया था। मगर बैंक अधिकारी और व्यापारी सतर्कता से जालसाजी का खुलासा हो गया।
साहबगंज निवासी सुभाष चंद्र केशरवानी की हार्डवेयर की दुकान पर 14 सितंबर को एक युवक पहुंचा और खुद को अखबार का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि 400 रुपये जमा करने पर अखबार में चार दिन विज्ञापन छपेगा और एक साल अखबार भी मिलेगा। सुभाष स्कीम लेने को राजी हो गए और उन्होंने एक चेक पर हस्ताक्षर करके दे दिया। उस पर युवक ने उनके सामने ही एक मैजिक पेन से 400 रुपये की रकम भर दी और तारीख 11 नवंबर डाल दी। रसीद देकर चला गया। उनसे 17 सितंबर को उसी चेक में 9 लाख 50 हजार रुपेय भरकर बैंक आफ इंडिया की लखनऊ शाखा के एक खाते में आरटीजीएस करने के लिए चेक बैंक आफ बड़ौदा की मुंगराबादशाहपुर शाखा में जमा किया। उसने व्यापारी का बैंक से लिंक मोबाइल नंबर भी लाक करा दिया था। बैंक मैनेजर आरबी सिंह ने पैसा ट्रांसफर करने से पहले व्यापारी को फोन लगाया तो फोन लाक मिला। इस बीच व्यापारी ने कुछ अखबार विक्रेताओं से योजना की बाबत बात की तो पता चला कि कोई ऐसी स्किम चल ही नहीं रही है। सुभाष अपने भाई देवी प्रसाद केशरवानी के साथ बैंक पहुंचे। बैंक मैनेजर ने व्यापारी से साढे 9 लाख का चेक किसी रणवीर गुप्ता नाम से जारी करने की बात पूछी। उन्होंने चेक नंबर वही था जो उन्होंने युवक को दिया था। उस पर हस्ताक्षर भी उन्हीं के थे लेकिन धन और तारीख बदली हुई थी। तारीख 17 सितंबर कर दी गई थी। हकीकत जानने के बाद बैंक प्रबंधन भुगतान पर रोक लगा दी।
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साहबगंज निवासी सुभाष चंद्र केशरवानी की हार्डवेयर की दुकान पर 14 सितंबर को एक युवक पहुंचा और खुद को अखबार का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि 400 रुपये जमा करने पर अखबार में चार दिन विज्ञापन छपेगा और एक साल अखबार भी मिलेगा। सुभाष स्कीम लेने को राजी हो गए और उन्होंने एक चेक पर हस्ताक्षर करके दे दिया। उस पर युवक ने उनके सामने ही एक मैजिक पेन से 400 रुपये की रकम भर दी और तारीख 11 नवंबर डाल दी। रसीद देकर चला गया। उनसे 17 सितंबर को उसी चेक में 9 लाख 50 हजार रुपेय भरकर बैंक आफ इंडिया की लखनऊ शाखा के एक खाते में आरटीजीएस करने के लिए चेक बैंक आफ बड़ौदा की मुंगराबादशाहपुर शाखा में जमा किया। उसने व्यापारी का बैंक से लिंक मोबाइल नंबर भी लाक करा दिया था। बैंक मैनेजर आरबी सिंह ने पैसा ट्रांसफर करने से पहले व्यापारी को फोन लगाया तो फोन लाक मिला। इस बीच व्यापारी ने कुछ अखबार विक्रेताओं से योजना की बाबत बात की तो पता चला कि कोई ऐसी स्किम चल ही नहीं रही है। सुभाष अपने भाई देवी प्रसाद केशरवानी के साथ बैंक पहुंचे। बैंक मैनेजर ने व्यापारी से साढे 9 लाख का चेक किसी रणवीर गुप्ता नाम से जारी करने की बात पूछी। उन्होंने चेक नंबर वही था जो उन्होंने युवक को दिया था। उस पर हस्ताक्षर भी उन्हीं के थे लेकिन धन और तारीख बदली हुई थी। तारीख 17 सितंबर कर दी गई थी। हकीकत जानने के बाद बैंक प्रबंधन भुगतान पर रोक लगा दी।
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