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मौत के एक सप्ताह बाद पुलिस ने कब्र से निकलवाई वृद्ध की लाश
Updated Sun, 29 Apr 2018 12:28 AM IST
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कब्र खोदते
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करंजाकला। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के मनवल गांव में बेटे की गोली से घायल पिता की मौत हो गई थी। परिजनों ने गुपचुप तरीके से शव को दफन कर दिया। इसकी जानकारी होने पर पुलिस ने जिलाधिकारी के आदेश पर शनिवार को कब्र खोदवाकर शव निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बेटा गोली मारने के बाद से ही जेल में है। उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है।
मनवुल गांव निवासी साहबजान शाह (75) का बड़ा बेटा सज्जाद उनसे अलग रहता है। ट्रांसपोर्ट संचालक सज्जाद का बड़ा बेटा अकरम (16) दादा की बात अधिक मानता था। यह बात सज्जाद को नागवार लगती थी। सात अप्रैल की रात में करीब दस बजे सज्जाद कहीं से घर पहुंचा तो पता चला अकरम दादा के साथ कमरे में सोया था। वह बेटे को उठाकर उसे घसीटते हुए अपने कमरे में ले जाने लगा। शाहबजान ने विरोध किया तो सज्जाद ने उस पर लाइसेंसी पिस्टल से गोली चला दी। गोली उनके सीने में लगी और वह जमीन पर गिरकर तड़पने लगे। घायल शाहबजान शाह को छोटा बेटा फरियाद जिला अस्पताल ले गया। डाक्टर ने उसे वाराणसी रेफर कर दिया। पुलिस ने घटना के अगले दिन फरियाद की तहरीर पर उसके बड़े भाई सज्जाद के खिलाफ प्राण घातक हमले का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने उसके पास से उसकी लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली थी। उधर, वाराणसी के ट्रामा सेंटर से 19 अप्रैल को घर वालों ने साहबजान को लखनऊ के लिए रेफर कराया लेकिन लखनऊ न ले जाकर घर लेते आए। इलाज के अभाव में 22 अप्रैल की रात उनकी मौत हो गई। परिजन और रिश्तेदारों ने मिलकर 23 अप्रैल को गुपचुप तरीके से शव को गांव के कब्रिस्तान में दफन कर दिया। गुरुवार को गांव के किसी ने इसकी सूचना थानाध्यक्ष सरायख्वाजा को दे दी। पुलिस ने फरियाद को थाने बुलवाकर पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। उसके बाद पुलिस ने जिलाधिकारी को सूचना दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सरायख्वाजा थाने की पुलिस ने शनिवार को तहसीलदार सदर आशाराम वर्मा की मौजूदगी में कब्र की खुदाई करवाकर शव को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ सदर विनय द्विवेदी ने बताया कि आरोपी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
मनवुल गांव निवासी साहबजान शाह (75) का बड़ा बेटा सज्जाद उनसे अलग रहता है। ट्रांसपोर्ट संचालक सज्जाद का बड़ा बेटा अकरम (16) दादा की बात अधिक मानता था। यह बात सज्जाद को नागवार लगती थी। सात अप्रैल की रात में करीब दस बजे सज्जाद कहीं से घर पहुंचा तो पता चला अकरम दादा के साथ कमरे में सोया था। वह बेटे को उठाकर उसे घसीटते हुए अपने कमरे में ले जाने लगा। शाहबजान ने विरोध किया तो सज्जाद ने उस पर लाइसेंसी पिस्टल से गोली चला दी। गोली उनके सीने में लगी और वह जमीन पर गिरकर तड़पने लगे। घायल शाहबजान शाह को छोटा बेटा फरियाद जिला अस्पताल ले गया। डाक्टर ने उसे वाराणसी रेफर कर दिया। पुलिस ने घटना के अगले दिन फरियाद की तहरीर पर उसके बड़े भाई सज्जाद के खिलाफ प्राण घातक हमले का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने उसके पास से उसकी लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली थी। उधर, वाराणसी के ट्रामा सेंटर से 19 अप्रैल को घर वालों ने साहबजान को लखनऊ के लिए रेफर कराया लेकिन लखनऊ न ले जाकर घर लेते आए। इलाज के अभाव में 22 अप्रैल की रात उनकी मौत हो गई। परिजन और रिश्तेदारों ने मिलकर 23 अप्रैल को गुपचुप तरीके से शव को गांव के कब्रिस्तान में दफन कर दिया। गुरुवार को गांव के किसी ने इसकी सूचना थानाध्यक्ष सरायख्वाजा को दे दी। पुलिस ने फरियाद को थाने बुलवाकर पूछताछ की तो हकीकत सामने आ गई। उसके बाद पुलिस ने जिलाधिकारी को सूचना दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सरायख्वाजा थाने की पुलिस ने शनिवार को तहसीलदार सदर आशाराम वर्मा की मौजूदगी में कब्र की खुदाई करवाकर शव को बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ सदर विनय द्विवेदी ने बताया कि आरोपी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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