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विधायक की बस से चार की हुई थी मौत
Updated Sat, 10 Feb 2018 12:40 AM IST
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मड़ियाहूं थाना क्षेत्र के नंदगंज चौराहे पर स्थानीय विधायक डा. लीना तिवारी की सफारी गाड़ी से दबकर हुई छात्र की मौत के मामले में राजनीति शुरू हो गई है। जहां विधायक पुत्र का कहना है कि वह गाड़ी में नहीं थे। वहीं मृतक के परिवार के धर्मराज यादव ने उन्हीं के द्वारा गाड़ी चलाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है। इसी चौराहे पर तकरीबन 3 साल पहले तत्कालीन विधायिक श्रद्घा यादव के परिवार के बस की चपेट में आने से 4 लोगों की मौत हुई थी। तब लोगों ने उस समय कई गाड़ियों में आग लगा दी थी। उस समय भी जमकर बवाल हुआ था।
शुक्रवार की घटना में मृतक के चाचा धर्मराज यादव ने दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि 12 बजे दिन में उनका भतीजा शुभम यादव 16 वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा देकर आ रहा था। ग्राम उंचनीकला के चौराहे पर पहुंचा था कि मड़ियाहूं की तरफ से आ रही सफारी गाड़ी से उसके भतीजे की मौके पर ही मौत हो गई।
धर्मराज की तहरीर पर पुलिस ने सात्विक तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उधर डाक्टर लीना तिवारी के पुत्र सात्विक तिवारी का कहना है कि छात्र की मौत से उनका पूरा परिवार दुखी है और उसको आर्थिक सहायता दिलाने के लिए उनकी मां विधायक लीना तिवारी ने मुख्यमंत्री से बात की है। उन्होंने कहा कि सफारी गाड़ी लेकर चालक जौनपुर जा रहा था। चुनाव में पराजित सपा के लोगों के बहकावे में आकर लोगों ने जाम लगाया है। उधर पूर्व विधायक श्रद्धा यादव का कहना है कि उन्होंने कोई आंदोलन नहीं कराया। जहां तक उनकी बस से मरने की बात है तो बस उनकी नहीं थी। बस उनके परिवार की थी। उस समय जो बवाल हुआ उसके पीछे कौन लोग थे। उन्होंने मृतक परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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इनसेट--
पांच घंटे तक जाम में फंसे रहे लोग
जौनपुर। मड़ियाहूं मार्ग स्थित नंदगंज चौराहे पर हादसे के बाद लोगों ने करीब साढ़े 12 बजे जाम लगा दिया। जो शाम साढ़े 5 बजे तक चला। इतनी देर तक भदोही से जौनपुर आने वाले और जौनपुर से भदोही, मिर्जापुर की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी लाइनें लग गई। बावजूद जिले का कोई आला अफसर मौके पर मामला विधायक से जुड़ा होने के नाते नहीं पहुंचा। अधिकारियों के नहीं पहुंचने से लोगों का आक्रोश और बढ़ा और राहगीर परेशान हुए। आजमगढ़ से विंध्याचल दर्शन करने जा रहे लोगों ने बताया कि दोनों तरफ से गाड़ियों का जमावड़ा होने से वे 5 घंटे तक मौके पर परेशान रहे और जब रास्ता खुला तो वापस लौट आए। ऐसे ही सैकड़ों की संख्या में लोग जाम से जुझते रहे। जाम करने वालों के आगे पुलिस बेवश बनी हुई थी। जो मांग ग्रामीणों की थी उसे तत्काल पूरा कर घंटे भर में रास्ता साफ कराया जा सकता था लेकिन प्रशासनिक अफसर सत्ताधारी दल के सहयोगी विधायक होने के नाते हस्तक्षेप नहीं करना चाहते थे।
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शुक्रवार की घटना में मृतक के चाचा धर्मराज यादव ने दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि 12 बजे दिन में उनका भतीजा शुभम यादव 16 वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा देकर आ रहा था। ग्राम उंचनीकला के चौराहे पर पहुंचा था कि मड़ियाहूं की तरफ से आ रही सफारी गाड़ी से उसके भतीजे की मौके पर ही मौत हो गई।
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धर्मराज की तहरीर पर पुलिस ने सात्विक तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उधर डाक्टर लीना तिवारी के पुत्र सात्विक तिवारी का कहना है कि छात्र की मौत से उनका पूरा परिवार दुखी है और उसको आर्थिक सहायता दिलाने के लिए उनकी मां विधायक लीना तिवारी ने मुख्यमंत्री से बात की है। उन्होंने कहा कि सफारी गाड़ी लेकर चालक जौनपुर जा रहा था। चुनाव में पराजित सपा के लोगों के बहकावे में आकर लोगों ने जाम लगाया है। उधर पूर्व विधायक श्रद्धा यादव का कहना है कि उन्होंने कोई आंदोलन नहीं कराया। जहां तक उनकी बस से मरने की बात है तो बस उनकी नहीं थी। बस उनके परिवार की थी। उस समय जो बवाल हुआ उसके पीछे कौन लोग थे। उन्होंने मृतक परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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पांच घंटे तक जाम में फंसे रहे लोग
जौनपुर। मड़ियाहूं मार्ग स्थित नंदगंज चौराहे पर हादसे के बाद लोगों ने करीब साढ़े 12 बजे जाम लगा दिया। जो शाम साढ़े 5 बजे तक चला। इतनी देर तक भदोही से जौनपुर आने वाले और जौनपुर से भदोही, मिर्जापुर की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी लाइनें लग गई। बावजूद जिले का कोई आला अफसर मौके पर मामला विधायक से जुड़ा होने के नाते नहीं पहुंचा। अधिकारियों के नहीं पहुंचने से लोगों का आक्रोश और बढ़ा और राहगीर परेशान हुए। आजमगढ़ से विंध्याचल दर्शन करने जा रहे लोगों ने बताया कि दोनों तरफ से गाड़ियों का जमावड़ा होने से वे 5 घंटे तक मौके पर परेशान रहे और जब रास्ता खुला तो वापस लौट आए। ऐसे ही सैकड़ों की संख्या में लोग जाम से जुझते रहे। जाम करने वालों के आगे पुलिस बेवश बनी हुई थी। जो मांग ग्रामीणों की थी उसे तत्काल पूरा कर घंटे भर में रास्ता साफ कराया जा सकता था लेकिन प्रशासनिक अफसर सत्ताधारी दल के सहयोगी विधायक होने के नाते हस्तक्षेप नहीं करना चाहते थे।