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चेक पर फर्जी सा इन होने के शक में किया पुलिस के हवाले
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:01 AM IST
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मुंगराबादशाहपुर। मुठभेड़ के दौरान मारे गए विनय तिवारी के बैंक खाते से चेक से रुपये निकलने पहुंचे युवक को बैंक कर्मियों ने पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने छानबीन के बाद युवक को छोड़ दिया।
मुगरडीह गांव निवासी राम कृपाल पटेल बुधवार को मृतक विनय तिवारी के खाते से चेक से 10 हजार रुपये नकद निकालने भारतीय स्टेट बैंक की मुंगराबादशाहपुर शाखा में गया था। हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने पर कैशियर को शक हुआ तो उसने शाखा प्रबंधक के पास सत्यापन के लिए भेज दिया । शाखा प्रबंधक बीके दीक्षित के पास पहले से विनय तिवारी के पिता-पत्नी बैठे थे। प्रबंधक के पूछताछ करने पर विनय के पिता ने कहा इसकी चेकबुक गायब हो गई थी और उसी की शिकायत दर्ज कराने वाले आए हैं। इसके बाद शाखा प्रबंधक ने पुलिस को बुलाकर राम कृपाल को सौंप दिया । राम कृपाल ने पुलिस को बताया कि विनय तिवारी ने उससे 16 हजार रुपये लिए थे, जिसमे 10 हजार रुपये की पोस्ट डेटेड चेक उनको दी थी। उसके 10 दिन बाद ही विनय की मौत हो गई। इसकी जानकारी विनय की पत्नी को भी दी गई थी। इस संबंध में थानाध्यक्ष केके मिश्रा का कहना है कि जांच में पता चला है कि राम कृपाल का दावा सही है। उसने जालसाजी नहीं की है। विनय ने ही उसे चेक दी थी। हस्ताक्षर न मिलने के कारण बैंक कर्मचारियो को शक हुआ था लेकिन छानबीन के बाद उसे छोड़ दिया गया।
मुगरडीह गांव निवासी राम कृपाल पटेल बुधवार को मृतक विनय तिवारी के खाते से चेक से 10 हजार रुपये नकद निकालने भारतीय स्टेट बैंक की मुंगराबादशाहपुर शाखा में गया था। हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने पर कैशियर को शक हुआ तो उसने शाखा प्रबंधक के पास सत्यापन के लिए भेज दिया । शाखा प्रबंधक बीके दीक्षित के पास पहले से विनय तिवारी के पिता-पत्नी बैठे थे। प्रबंधक के पूछताछ करने पर विनय के पिता ने कहा इसकी चेकबुक गायब हो गई थी और उसी की शिकायत दर्ज कराने वाले आए हैं। इसके बाद शाखा प्रबंधक ने पुलिस को बुलाकर राम कृपाल को सौंप दिया । राम कृपाल ने पुलिस को बताया कि विनय तिवारी ने उससे 16 हजार रुपये लिए थे, जिसमे 10 हजार रुपये की पोस्ट डेटेड चेक उनको दी थी। उसके 10 दिन बाद ही विनय की मौत हो गई। इसकी जानकारी विनय की पत्नी को भी दी गई थी। इस संबंध में थानाध्यक्ष केके मिश्रा का कहना है कि जांच में पता चला है कि राम कृपाल का दावा सही है। उसने जालसाजी नहीं की है। विनय ने ही उसे चेक दी थी। हस्ताक्षर न मिलने के कारण बैंक कर्मचारियो को शक हुआ था लेकिन छानबीन के बाद उसे छोड़ दिया गया।
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