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घायल बंदी की जेल से बाहर कराए इलाज 19-36-12
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:46 AM IST
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जौनपुर। दहेज हत्या के आरोप में जेल में बंद कैदी संदीप कुमार गुप्ता की जेल से बाहर इलाज कराने का निर्देश अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय महेंद्र सिंह ने जेलर को दिया है। साथ ही स्पष्टीकरण मांगा है कि किन परिस्थितियों में संदीप घायल हुआ स्पष्ट करें।
जिला कारागार में दस हजार रुपये की मांग को लेकर दहेज हत्या के आरोप में सजायाफ्ता कैदी संदीप कुमार गुप्ता की 17 जून को पिटाई की गई थी। घायल संदीप के पिता पन्नालाल निवासी ऊदपुर थाना जलालपुर ने 17 जुलाई को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय महेंद्र सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके पुत्र संदीप को जेलर सुरेश चंद कन्नौजिया, सिपाही विशाल सिंह एवं बंदी शनी सिंह ने डंडे से मार कर बुरी तरह घायल कर दिया है तथा जेलर ने फोन करके दस हजार रुपये हर महीने देने के लिए कहा और धमकी दी कि पैसा न देने पर तुम्हारे पुत्र की ऐसी ही पिटाई की जाएगी। इस मामले में न्यायालय ने 19 जुलाई को जेल अधीक्षक को आदेशित किया था कि अभियुक्त के चोटों के संदर्भ में आख्या प्रस्तुत करें, लेकिन जेल प्रशासन ने कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने गुरुवार को चिकित्सा अधीक्षक को आदेशित किया कि मेडिकल बोर्ड का गठन करके घायल अभियुक्त का मेडिकल परीक्षण करके रिपोर्ट सीधे न्यायालय में प्रस्तुत करें। शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक ने मेडिकल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत किया, जिसमें अभियुक्त के शरीर व कान में गंभीर चोट लगने की रिपोर्ट आई है। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए जेल अधीक्षक को आदेशित किया है कि वे 15 दिन के अंदर इसके बाबत आख्या प्रस्तुत करें अन्यथा जेल प्रशासन के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए जिलाधिकारी को मामला संदर्भित कर दिया जाएगा। (ब्यूरो)
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जिला कारागार में दस हजार रुपये की मांग को लेकर दहेज हत्या के आरोप में सजायाफ्ता कैदी संदीप कुमार गुप्ता की 17 जून को पिटाई की गई थी। घायल संदीप के पिता पन्नालाल निवासी ऊदपुर थाना जलालपुर ने 17 जुलाई को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय महेंद्र सिंह की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसके पुत्र संदीप को जेलर सुरेश चंद कन्नौजिया, सिपाही विशाल सिंह एवं बंदी शनी सिंह ने डंडे से मार कर बुरी तरह घायल कर दिया है तथा जेलर ने फोन करके दस हजार रुपये हर महीने देने के लिए कहा और धमकी दी कि पैसा न देने पर तुम्हारे पुत्र की ऐसी ही पिटाई की जाएगी। इस मामले में न्यायालय ने 19 जुलाई को जेल अधीक्षक को आदेशित किया था कि अभियुक्त के चोटों के संदर्भ में आख्या प्रस्तुत करें, लेकिन जेल प्रशासन ने कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने गुरुवार को चिकित्सा अधीक्षक को आदेशित किया कि मेडिकल बोर्ड का गठन करके घायल अभियुक्त का मेडिकल परीक्षण करके रिपोर्ट सीधे न्यायालय में प्रस्तुत करें। शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक ने मेडिकल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत किया, जिसमें अभियुक्त के शरीर व कान में गंभीर चोट लगने की रिपोर्ट आई है। इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए जेल अधीक्षक को आदेशित किया है कि वे 15 दिन के अंदर इसके बाबत आख्या प्रस्तुत करें अन्यथा जेल प्रशासन के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए जिलाधिकारी को मामला संदर्भित कर दिया जाएगा। (ब्यूरो)
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