जौनपुर : कोरोना कर्फ्यू का दिखा असर, सुधरी वायु गुणवत्ता, सुबह से ज्यादा साफ और शुद्ध हवा दोपहर में थी
कुछ माह पहले तक प्रदूषण के मामले में देश के शीर्ष शहरों में शुमार था जौनपुर
सामान्य दिनों में 150 से 200 के बीच रहने वाला एक्यूआई शनिवार को सौ के नीचे रिकार्ड किया गया
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कुछ माह पहले तक प्रदूषण के मामले में देश के शीर्ष शहरों में शुमार जौनपुर में कोरोना कर्फ्यू के कारण प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बेहतर स्तर पर पहुंच गया है। सामान्य दिनों में 150 से 200 के बीच रहने वाला एक्यूआई शनिवार को सौ के नीचे रिकार्ड किया गया है। सुबह से ज्यादा साफ और शुद्ध हवा दोपहर में थी।
बेतहाशा ट्रैफिक के दबाव से जूझते शहर में निर्माण कार्यों की धूल, मिट्टी और धुएं से प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। पूर्वांचल के अन्य शहरों की अपेक्षा सर्वाधिक प्रदूषित जौनपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक साढ़े चार सौ तक पहुंच चुका है। प्रदूषण के कारण ही शहर में सांस के रोग से जुड़े मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि होती रही है। कोरोना की चेन तोड़ने के लिए सरकार की ओर से 59 घंटे का कर्फ्यू लगाया गया तो सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। लोगों ने घरों से बाहर निकलने से परहेज किया। सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी ठप रही।
इसका असर प्रदूषण के स्तर पर पड़ा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक सौ से नीचे आ गया। इसे सेहत के लिहाज से हर तरह से अच्छा माना जा रहा है। हवा की ऐसी गुणवत्ता पिछले वर्ष भी लॉक डाउन के दिनों में ही देखी गई थी। हालांकि पिछले रविवार को यह सूचकांक और भी कम था। इस बार लगन के कारण थोड़ी चहल-पहल को भी इस बदलाव का असर माना जा रहा है।
शनिवार को दिन में वायु गुणवत्ता की स्थिति
सुबह साढ़े 5 बजे: 159
सुबह साढ़े 7 बजे: 176
सुबह साढ़े 9 बजे: 163
सुबह साढ़े 11 बजे: 153
दोपहर डेढ़ बजे: 124
अपराह्न साढ़े तीन बजे: 93
कोरोना के कारण जब शुद्ध वायु के लिए लोग परेशान हैं तो यह स्थिति सुकून देने वाली है। वायु गुणवत्ता सूचकांक सौ से कम होना सेहत के लिए काफी अच्छा है। इस हवा में प्रदूषण का स्तर बेहद कम रहता है। पिछले वर्ष लॉक डाउन में भी एक्यूआई इसी लेबल पर था। -पंकज जायसवाल, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा।