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जफराबाद में रोंचक होगा मुकाबला, 3.92 लाख मतदाता बनेंगे भाग्य विधाता
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जौनपुर। जफराबाद विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक होने की संभावना है। इस सीट पर भाजपा जहां दूसरी बार जीत सुनिश्चित करने में लगी है। वहीं, सपा फिर से विजय श्री हासिल करने की कोशिश में लगी है। दूसरी ओर बसपा, कांग्रेस, आप समेत अन्य सभी दल इस सीट पर जीत दर्ज करने की रणनीति तैयार करने में जुटी है।
निर्वाचन सूची पर नजर करें तो इस विधानसभा सीट पर 3 लाख 92 हजार 888 मतदाता हैं, जो अपने विधायक का चुनाव करेंगे। इसमें 2 लाख 5 हजार 992 पुरुष और एक लाख 86 हजार 881 महिला तथा 15 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनावी इतिहास पर नजर करें तो साल 2012 के पहले यह विधानसभा क्षेत्र बयालसी के नाम से जाना जाता था। उस समय साल 1952 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था। इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरगोविंद सिंह कांग्रेस से चुनाव जीते थे, जो लगातार चार बार 1952, 1957, 1962, 1967 में विधायक बने थे। हालांकि उमानाथ सिंह ने 1969 में उन्हें हराकर पहली इस सीट पर जनसंघ को जीत दिलाई थी, उमानाथ सिंह इस सीट से चार बार विधायक बने थे। जबकि बसपा से जगदीश नारायण राय भी इस सीट से लगातार तीन बार 1996, 2002 और 2007 में जीतक हैट्रिक लगाए थे। लेकिन, इसके बाद साल 2012 के परिसीमन के बाद दो बार चुनाव हुए हैं, जिसमें पहली बार समाजवादी पार्टी से शचींद्र नाथ त्रिपाठी को मैदान में उतारा था,जिन्होंने जीत दर्ज की थी। इसके बाद साल 2017 में सपा टिकट को लेकर शुरू से ही ऊहापोह की स्थिति में थी। अंतिम समय में सपा प्रत्याशी घोषित किए गए सीटिंग विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी को मैदान में उतारा था। सपा-भाजपा की इस सीट पर सीधी टक्कर हुई थी, जिसमें भाजपा के डॉ. हरेंद्र प्रसाद सिंह ने 85989 वोट पाकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई थी, जबकि सपा के शचिंद्र नाथ त्रिपाठी 61124 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
आजादी के बाद यह रहे विधायक बयालसी सीट
1952 - लाल बहादुर सिंह - कांग्रेस।
1957-लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1962-लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1967- लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1969-उमानाथ सिंह-(जनसंघ)
1974-उमानाथ सिंह- (जनसंघ)
1977-चंद्रसेन सिंह -(कांग्रेस)
1980-प्रभुनारायण सिंह- (कांग्रेस)
1985-राज बहादुर सिंह (जपा)
1989-उमानाथ सिंह (भाजपा)
1991-उमानाथ सिंह- (भाजपा)
1993-श्रीराम यादव (बसपा)
1996-जगदीश नारायण राय (बसपा)
2002-जगदीश नारायण राज (बसपा)
2007-जगदीश नारायण राय (बसपा)
जफराबाद
2012-शचींद्र नाथ त्रिपाठी (सपा)
2017-डा. हरेंद्र प्रसाद सिंह (भाजपा)
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निर्वाचन सूची पर नजर करें तो इस विधानसभा सीट पर 3 लाख 92 हजार 888 मतदाता हैं, जो अपने विधायक का चुनाव करेंगे। इसमें 2 लाख 5 हजार 992 पुरुष और एक लाख 86 हजार 881 महिला तथा 15 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनावी इतिहास पर नजर करें तो साल 2012 के पहले यह विधानसभा क्षेत्र बयालसी के नाम से जाना जाता था। उस समय साल 1952 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था। इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरगोविंद सिंह कांग्रेस से चुनाव जीते थे, जो लगातार चार बार 1952, 1957, 1962, 1967 में विधायक बने थे। हालांकि उमानाथ सिंह ने 1969 में उन्हें हराकर पहली इस सीट पर जनसंघ को जीत दिलाई थी, उमानाथ सिंह इस सीट से चार बार विधायक बने थे। जबकि बसपा से जगदीश नारायण राय भी इस सीट से लगातार तीन बार 1996, 2002 और 2007 में जीतक हैट्रिक लगाए थे। लेकिन, इसके बाद साल 2012 के परिसीमन के बाद दो बार चुनाव हुए हैं, जिसमें पहली बार समाजवादी पार्टी से शचींद्र नाथ त्रिपाठी को मैदान में उतारा था,जिन्होंने जीत दर्ज की थी। इसके बाद साल 2017 में सपा टिकट को लेकर शुरू से ही ऊहापोह की स्थिति में थी। अंतिम समय में सपा प्रत्याशी घोषित किए गए सीटिंग विधायक शचींद्रनाथ त्रिपाठी को मैदान में उतारा था। सपा-भाजपा की इस सीट पर सीधी टक्कर हुई थी, जिसमें भाजपा के डॉ. हरेंद्र प्रसाद सिंह ने 85989 वोट पाकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई थी, जबकि सपा के शचिंद्र नाथ त्रिपाठी 61124 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
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आजादी के बाद यह रहे विधायक बयालसी सीट
1952 - लाल बहादुर सिंह - कांग्रेस।
1957-लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1962-लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1967- लाल बहादुर सिंह-कांग्रेस।
1969-उमानाथ सिंह-(जनसंघ)
1974-उमानाथ सिंह- (जनसंघ)
1977-चंद्रसेन सिंह -(कांग्रेस)
1980-प्रभुनारायण सिंह- (कांग्रेस)
1985-राज बहादुर सिंह (जपा)
1989-उमानाथ सिंह (भाजपा)
1991-उमानाथ सिंह- (भाजपा)
1993-श्रीराम यादव (बसपा)
1996-जगदीश नारायण राय (बसपा)
2002-जगदीश नारायण राज (बसपा)
2007-जगदीश नारायण राय (बसपा)
जफराबाद
2012-शचींद्र नाथ त्रिपाठी (सपा)
2017-डा. हरेंद्र प्रसाद सिंह (भाजपा)