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बालिका शिक्षा का दावा, रह गया सिर्फ छलावा

Thu, 23 Jan 2020 12:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 12:18 AM IST
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Claim of girl child education, left only cheating
18- मछलीशहर में जीजीआईसी के सामने निर्माणाधीन सड़क। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। सरकारी अमला भले ही पढ़े बेटियां-बढ़े बेटियां का राग अलापने में जुटा हुआ है, मगर जिले में बेटियों की पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल अब तक मयस्सर नहीं हो पाया है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक बालिका शिक्षा की तस्वीर बेहद स्याह है। संसाधनों से जूझते विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। कई जरुरी विषयों के शिक्षक नदारद हैं। भवन जर्जर हैं तो रास्ते बदहाल। कहीं एक कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन हो रहा है तो कहीं बेटियों को स्कूल तक पहुंचने में कच्चे मार्ग पर कीचड़ की बाधा पार करनी पड़ रही है। पेयजल, शौचालय की व्यवस्था बदहाल है। ऐसे माहौल में बेटियां कैसे पढ़ें, इस पर जिम्मेदार पूरी तरह मौन हैं।
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बालिका शिक्षा के लिए जिले में चार राजकीय बालिका इंटर कॉलेज संचालित हैं। जौनपुर और मछलीशहर में छह से 12 तो मड़ियाहूं में कक्षा-9 से 12 तक की पढ़ाई होती है। जफराबाद में 1 से 12 तक की कक्षाएं चलती हैं। राजकीय इंटर कॉलेजों में छात्राओं की संख्या पर नजर डालें तो कुल 862 छात्राएं ही इसमें शिक्षा ले रही हैं। इसमें भी मड़ियाहूं में सिर्फ 76 छात्राएं हैं। जौनपुर में 306, मछलीशहर में 242 और जफराबाद में 238 छात्राएं हैं। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति इससे भी खराब है। जिले के कुल 21 ब्लाकों के सापेक्ष 19 में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इन आवासीय विद्यालयों में गरीब परिवार की छात्राओें को रहने, खाने-पीने सहित पढ़ाई की सारी व्यवस्था निशुल्क है, मगर अंदर का हाल काफी बुरा है। अधिकांश विद्यालयों के भवन क्षतिग्रस्त हैं। फर्नीचर, बेड, शौचालय, पेयजल सहित अन्य जरुरी सुविधाएं नाकाफी हैं। भोजन की खराब गुणवत्ता और साफ-सफाई के अभाव के चलते अक्सर छात्राएं आवासीय परिसर में रहना नहीं चाहती। विद्यालय स्टाफ खुद बाहर रहता है। परिषदीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में मॉडल स्कूलों को छोड़ दें तो कहीं भी शौचालय की व्यवस्था ठीक नहीं है।
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निष्प्रयोज्य घोषित कमरों में हो रही पढ़ाई
जफराबाद राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कक्षा-1 से पढ़ाई होती है। प्राथमिक वर्ग मेें सौ छात्राएं हैं, मगर यहां किसी भी शिक्षक की तैनाती नहीं है। जूनियर हाईस्कूल व इंटर के शिक्षकों के भरोसे ही प्राथमिक की कक्षाएं चलाई जा रही है। पुराने जर्जर भवन को निष्प्रयोज्य घोषित किए जाने के बाद सिर्फ पांच कमरे ही पढ़ाई के उपयोग में लाए जा रहे हैं। इन्हीं पांच कमरों में 1 से 12 तक की कक्षाएं चलाई जा रही है। कई कमरों में एक साथ दो-दो कक्षाएं चल रही हैं तो कुछ कक्षाओं का संचालन बरामदा या खुले आसमान के नीचे होता है। इससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है। लड़कियों के इस कॉलेज में कोई दाई नहीं है। विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार लगा है। शौचालय बने एक वर्ष हो गए, लेकिन अब तक हैंडओवर ही नहीं हुआ है। ऐसे में छात्राओं को खुले में जाना मजबूरी है। वैसे तो विद्यालय को बस की सुविधा भी उपलब्ध कराई, मगर ड्राइवर नहीं दिया। नतीजा वर्षों से यह बस खड़ी-खड़ी ही खराब हो गई। प्रभारी प्रधानाचार्य प्रतिभा यादव का कहना है कि समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को लगातार अवगत कराया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों में बेहतर पढाई की पूरी कोशिश रहती है।
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गिरते-पड़ते स्कूल पहुंचती हैं बेटियां
वर्षों से किराए के भवन में संचालित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मछलीशहर को दो वर्ष पूर्व ही खुद का भवन मिला है। नया भवन तो बना, लेकिन रास्ता नहीं बन सका। उबड़-खाबड़ पगडंडीनुमा कच्चे मार्ग पर गिरती-पड़ती छात्राएं स्कूल पहुंचती हैं। कक्षा-6 से 12 तक के इस विद्यालय में शिक्षक-कर्मचारियों के कुल 29 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 15की ही तैनाती है। विज्ञान वर्ग की पढ़ाई के लिए कोई अध्यापक ही नहीं है। गृह विज्ञान, उर्दू, अंग्रेजी, नागरिक शास्त्र विषय के प्रवक्ता का पद खाली है। यहां प्रधानाचार्य का भी पद रिक्त है। विद्यालय में 242 छात्राएं अध्ययन करतीस्त्रत्त् हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य रेखा मौर्य का कहना है कि अगर विज्ञान की अध्यापिकाओ की तैनाती हो जाती तो विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाती। नए भवन में स्थानांतरण के दो वर्ष बाद भी आवागमन के लिए कच्चा रास्ता है।

बालिका शिक्षा के लिए बेहतर माहौल बनाने का प्रयास निरंतर जारीऊहै। कस्तूरबा विदष्वालयों में स्थिति अच्छी है। अन्य स्कूलों में जहां जो भी कमियां है, उसे शीघ्र पूरा करा दिया जाएगा। अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो जांच कर कार्रवाई होगी। -डॉ.राजेंद्र सिंह, बीएसए और प्रभारी डीआईओएस।
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