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चित्रगुप्त के बताए रास्ते पर चलने का लिया संकल्प
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 21 Apr 2016 07:08 PM IST
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मियांपुर में आयोजित भगवान चित्रगुप्त की जयंती समारोह में उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करते कायस्थ समाज के लोग।
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अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से कुलदेवता भगवान चित्रगुप्त की जयंती मनाई गई। जिलाध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव के आवास पर आयोजित कार्यक्त्रस्म उपस्थित लोगों ने उके चित्र पर माल्यार्पण किया। केक काटकर जयघोष किए। राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त से उत्पन्न हम कायस्थ कुल की आजीविका का साधन नौकरी व कलम-दवात है।
जिसका अभीष्ट शिक्षा व लक्ष्य केवल पठन-पाठन है। परन्तु अब हमें हर क्षेत्र में आगे आना होगा। तभी समाज का सर्वांगीण विकास संभव है। महिला शाखा की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती किरन श्रीवास्तव ने चित्रगुप्त जयंती की सभी को बधाई दी। कहा कि चित्रगुप्त के नाम पर ही हिन्दी नव वर्ष में प्रथम माह का नाम चैत्र पड़ा है।
क्योंकि चित्रगुप्त का उदय इसी माह में ब्रह्म की काया से हुआ था। युवा जिलाध्यक्ष संजय अस्थाना ने कहा कि चित्रगुप्त यमराज के परस्पर सहयोगी व निकटतम हैं। उनके वंशजों को सर्वथा अभयदान मिलना चाहिए था। किन्तु आज इस धरा पर सर्वाधिक कुण्ठित व अनागत के भय से ग्रस्त हैं। निरपेक्ष एवं निष्पक्ष होकर कार्य संपादन करने वाली जाति आज हासिये पर खड़ी है।
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ऐसे में युवाओं की विशेष जिम्मेदारी है कि कायस्थ समाज की अस्मिता के लिए आगे आए। इस अवसर पर विजय अस्थाना, रवि श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, श्याम रतन श्रीवास्तव, जय आनन्द, अजय आनन्द, सरोज श्रीवास्तव, सुधीर अस्थाना, अमित निगम, विजय श्रीवास्तव, डा. रंजीत श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव, मिलन श्रीवास्तव, सीमा श्रीवास्तव, दयाशंकर निगम उपस्थित रहे। संचालन महासचिव सुरेश अस्थाना ने किया।
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जिसका अभीष्ट शिक्षा व लक्ष्य केवल पठन-पाठन है। परन्तु अब हमें हर क्षेत्र में आगे आना होगा। तभी समाज का सर्वांगीण विकास संभव है। महिला शाखा की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती किरन श्रीवास्तव ने चित्रगुप्त जयंती की सभी को बधाई दी। कहा कि चित्रगुप्त के नाम पर ही हिन्दी नव वर्ष में प्रथम माह का नाम चैत्र पड़ा है।
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क्योंकि चित्रगुप्त का उदय इसी माह में ब्रह्म की काया से हुआ था। युवा जिलाध्यक्ष संजय अस्थाना ने कहा कि चित्रगुप्त यमराज के परस्पर सहयोगी व निकटतम हैं। उनके वंशजों को सर्वथा अभयदान मिलना चाहिए था। किन्तु आज इस धरा पर सर्वाधिक कुण्ठित व अनागत के भय से ग्रस्त हैं। निरपेक्ष एवं निष्पक्ष होकर कार्य संपादन करने वाली जाति आज हासिये पर खड़ी है।
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ऐसे में युवाओं की विशेष जिम्मेदारी है कि कायस्थ समाज की अस्मिता के लिए आगे आए। इस अवसर पर विजय अस्थाना, रवि श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, श्याम रतन श्रीवास्तव, जय आनन्द, अजय आनन्द, सरोज श्रीवास्तव, सुधीर अस्थाना, अमित निगम, विजय श्रीवास्तव, डा. रंजीत श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव, मिलन श्रीवास्तव, सीमा श्रीवास्तव, दयाशंकर निगम उपस्थित रहे। संचालन महासचिव सुरेश अस्थाना ने किया।