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शहर में पर्यटन विकास के कार्यों पर बजट का रोड़ा

Thu, 25 Aug 2022 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 12:21 AM IST
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Budget constraint on the works of tourism development in the city
हनुमान घाट पर ठप पड़ा सुंदरीकरण कार्य। संवाद - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। शहर में शाही पुल और सद्भावना पुल के पास पर्यटन विकास के विभिन्न कार्यों के लिए सात करोड़ से अधिक की धनराशि स्वीकृत हुई थी। सभी कार्यों के लिए अलग-अलग समय सीमा निर्धारित की गई। कुछ में तो दिसंबर 2022 में ही कार्य पूर्ण करना है, लेकिन शुरू होने के साढ़े सात माह बाद भी महज 25 फीसदी काम ही पूरा हो सका है। अब बजट उपलब्ध न होने और बारिश के कारण सुंदरीकरण कार्य थम सा गया है।
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विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहे शहर में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसी को देखते हुए नये पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन के साथ-साथ पर्यटन विभाग ने प्रयास शुरू किया। इसके लिए एक के बाद एक प्रस्ताव तैयार किए गए। उन प्रस्तावों केे शासन से भी मंजूरी मिल गई। काम भी शुरू करा दिया गया, लेकिन अब बजट की अड़चन आने लगी है। हालांकि अधिकारी बारिश की वजह से काम बंद होने का दावा करते हैं। उनका कहना है कि बारिश के बाद काम में तेजी लायी जाएगी और निर्धारिम समय में काम को भी पूर्ण कर लिया जाएगा। यहां पहली किस्त के रूप में करीब सवा करोड़ रुपये की धनराशि मिल चुकी है। उससे कार्य भी कराया जा चुका है।
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जो कार्य बजट कमी से जो कार्य प्रभावित हैं उनमें प्रमुख रूप से शाहीपुल के पास हनुमान मंदिर सहित अन्य स्थलों का सुंदरीकरण, शास्त्री पुल के पास शिव मंदिर का पर्यटन विकास आदि प्रभावित है। दोनों स्थानों पर करीब 25 फीसदी काम हुआ है।
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कला, संस्कृति और साहित्य को मिली पहचान
गोमती नदी के दोनों छोर पर बसे जौनपुर को शर्की शासकों ने राजधानी बनाई। उन्होंने यहां की कला, संस्कृति और साहित्य को पहचान दिलाई। शेरशाह सूरी ने यहां बचपन बिताया तो मुगल बादशाह अकबर ने भी लंबा समय यहां व्यतीत किया था। मुगल काल में भी यहां कई निर्माण हुए। यहां अनेक ऐतिहासिक इमारतें हैं। शाही किला, अटाला मस्जिद, लाल दरवाजा, बड़ी मस्जिद, झंझरी मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, इमामबाड़ा, मकबरा, शाही पुल आदि ऐसे स्थल हैं, जो ऐतिहासिक महत्व तो बताते ही हैं।

बारिश होने से गोमती नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। इस वजह से काम प्रभावित होता है। पहले चक्र में जितना पैसा मिला था उससे काम करा दिया गया है। आगे बजट की डिमांड की गई है।
- कीर्तिमान श्रीवास्तव, पर्यटन अधिकारी
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