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जनता नहीं, निजी हित साधने में जुटी बसपा
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 03 Apr 2016 12:58 AM IST
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साहू धर्मशाला में जन अधिकार मंच के कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा का स्वागत करते समर्थक।
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तीस से बत्तीस वर्ष पहले कांशीराम के साथ मैने बसपा की शुरूआत की, वह कहते थे कि यह पार्टी दलित, पिछड़ों की आवाज बुलंद कर उन्हें उनका हक दिलाएगी, लेकिन अब यह पार्टी अन्य की तरह उन्हीं शोषित वंचितों के साथ विश्वासघात कर महज अपना हित साधने में लगी है।
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उक्त बातें जन अधिकार मंच के संस्थापक व पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने जनसंपर्क यात्रा की जनसभा को बतौर मुख्य अतिथि नगर के साहू धर्मशाला में संबोधित करते हुए शनिवार को कहीं। उन्होंने कहा कि चार साल तक मुझे साजिश के तहत जेल में रखा गया।
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एनआरएचएम घोटाले में बेवजह मेरा नाम घसीटा गया। ना ही मैने किसी फाइल पर दस्तखत किए और ना ही किसी से कुछ कहा, इस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि दो सीएमओ की हत्या के बाद जब मैंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए तो मुझे चुप रहने को कहा गया।
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अन्तत: मुझे ही इसमें घसीट लिया गया। उन्होंने कहा कि चार साल मैं जेल में रहा। इस दौरान लोग मुझसे मिलते रहे और मेरा मनोबल बढ़ाते रहे। कोई सबूत नहंी मिला तो न्यायालय ने मुझे बरी कर दिया। उन्होंने कहा कि पूर्वी प्रदेश में लोगों का विशेष समर्थन मिल रहा है। जनता को वोट का महत्व समझना होगा। हर समस्या का समाधान सरकार के पास होती है। और वह जनता के वोटों से बनती है।
जहां सरकार विकास के बड़े-बड़े दांवे कर रही है वहीं आज भी दलित व पिछड़ा वर्ग शोषित तथा समाज से बहिष्कृत है। इसके पूर्व उन्होंने गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जनसभा की शुरुआत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाध्य मौर्य महासभा के अध्यक्ष रामलखन मौर्य ने किया। कार्यक्त्रस्म में राकेश मौर्य, रामसनेही, सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, धनिराम, सुरेंद्र पाल, प्रभाकर मौर्य, बालेन्द्र मौर्य, नीरज मौर्य, बिन्दु मौर्य, विमला देवी, गीता देवी समेत हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्त्रस्म का संचालन दूधनाथ मौर्य ने किया।