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जौनपुर: अति उत्साह ने डुबोई नाव, सबक न लिया तो मुश्किल होगा 2022 का चुनाव

Fri, 07 May 2021 05:59 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 07 May 2021 05:59 PM IST
सार

- वर्ष 2017 के बाद लगातार चौथे चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार
- 83 सीटों पर पूरा दमखम लगाने के बाद भी महज दस पर ही मिली जीत

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Boat drowned by over-enthusiasm, if lesson is not taken, election of 2022 will be difficult in jaunpur
demo pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जौनपुर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों ने सत्ताधारी दल भाजपा को जोरदार झटका दिया है। वर्ष 2017 के विस चुनावों के बाद यह चौथा चुनाव है, जिसमें भाजपा को करारी हार झेलनी पड़ी है। वर्ष 2022 के चुनाव से ठीक पहले आए पंचायत चुनाव के नतीजों ने जनता के मिजाज का अहसास करा दिया है। सिर्फ मोदी-योगी के भरोसे ही जीत का मंत्र मानकर बैठे अति उत्साह में डूबे पदाधिकारियों ने इससे सबक नहीं लिया तो आगामी दिनों की राह आसान नहीं होगी।

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वर्ष 2017 के विधानसभा चुुनाव ने चौंकाने वाले परिणाम दिए थे। मोदी-योगी की सुनामी ने सपा के मजबूत गढ़ में गहरी सेंध लगाई थी। जिले की नौ सीटों में से चार पर भाजपा को जीत मिली थी। एक पर अपना दल-एस, एक पर बसपा और सिर्फ उन तीन सीटों पर ही सपा ने जीत दर्ज की थी, जहां से तत्कालीन सरकार के मंत्री मैदान में थे। इस जीत ने भाजपाइयों के उत्साह को इस कदर आसमान पर पहुंचा दिया कि साढ़े चार साल बाद भी वह नीचे उतरने को तैयार नहीं।
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वह भी तब जबकि बाद के चुनाव में भाजपा एक-एक कर सभी में मात खाती जा रही है। वर्ष 2017 में ही नगर निकायों के चुनाव में सिर्फ मुंगरा और शाहगंज की सीट पर ही भाजपा को जीत मिली थी। जौनपुर नगर पालिका के अलावा मड़ियाहूं, केराकत, मछलीशहर, बदलापुर और खेतासराय नगर पंचायत में विपक्षी दलों के चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को सपा-बसपा ने मिलकर लड़ा तो पूरी ताकत झोंकने के बाद भी भाजपा जौनपुर सीट हार गई। वहीं मछलीशहर में भी अंतिम राउंड की गणना में बमुश्किल 184 वोटों से जीत हासिल हुई। 
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गत वर्ष मल्हनी उपचुनाव के नतीजे भी भाजपा के लिए बेहद निराशाजनक रहे। सत्ता में होने के बाद भी भाजपा प्रत्याशी यहां जमानत भी नहीं बचा सके, जबकि यहां के प्रचार में मुख्यमंत्री, कई मंत्री, सांसद दम-खम से उतरे थे। अब पंचायत चुनाव भी सत्ताधारी पार्टी के लिए अनुकूल नहीं रहा। जिला पंचायत सदस्य के कुल 83 पदों पर भाजपा ने प्रत्याशी उतारे थे। सभी विधायक, सांसद ने अपने इलाके में प्रत्याशी को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर भी लगाया। बावजूद महज 10 सीटों पर ही कामयाबी मिल सकी। इन नतीजों पर गौर करें तो सिर्फ केराकत विधानसभा में ही परिणाम भाजपा को राहत देने वाले हैं।

इस विधानसभा क्षेत्र की तीन सीटों (65, 79 और 83) पर भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई। अन्य विधायकों के क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों को मुंह की खानी पड़ी है। जफराबाद में दो सीट (63, 64) पर जीत मिली। सदर में एक जीत सिर्फ राज्यमंत्री के भाई को एक नंबर वार्ड से हासिल हुई है। अन्य सीटों में से शाहगंज में दो, मल्हनी और मुंगरा में एक-एक वार्ड से भाजपा प्रत्याशी जीते हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों में विपक्षी खेमे के विधायक हैं।

छोटे दलों को बड़ी सफलता
पंचायत चुनाव कई छोटे दलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। इसमें अपना दल-एस प्रमुख है। इस पार्टी के छह प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य बने हैं। यह सारी सीटें मड़ियाहूं तहसील क्षेत्र की हैं। पार्टी का ज्यादा प्रभाव भी इसी क्षेत्र में है और यहां की विधायक भी इसी पार्टी से हैं। इसके अलावा उलेमा कौंसिल और एआईएमआईएम ने एक-एक तो आप ने तीन सीटें जीतकर सबको चौंका दिया है। बसपा के खाते में भी भाजपा के बराबर दस सीटें (वार्ड संख्या 6, 9, 12, 13, 22, 25, 30, 51, 78 व 81) आई हैं, जबकि पार्टी ने सिर्फ 60 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे थे।

इन कारणों से मिली शिकस्त
* गुटबाजी: भाजपा की हार में यह सबसे बड़ा कारण रहा। दिन-रात सेवा के बाद भी टिकट न मिलने से मायूस कार्यकर्ता निर्दल ही मैदान में उतर गए। बाद में पार्टी ने उन्हें निष्कासित भी कर दिया। इससे कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए। खुद तो हारे ही पार्टी प्रत्याशी की जीत की राह कठिन कर दी।

* कमल निशान पर भरोसा: चुनाव में भाजपा ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन चुनाव निशान साथ नहीं था। हर प्रत्याशी को अलग-अलग निशान आवंटित हुए थे। मतदाताओं को इसे समझाने में भी देर हुई।

* जनप्रतिनिधियों की दूरी: वर्ष 2022 का सेमीफाइनल माने जाने के बाद भी पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने अपनी सक्रियता को शिथिल रखा। वह बंगाल में वोट मांगते रहे, लेकिन अपने इलाके में जनता से जुड़ने की जरुरत नहीं समझी। उनकी सक्रियता मतदान के बाद बढ़ी, तब तक मतगणना की घड़ी आ गई।

कुछ दिनों से लगातार बाहर हूं। बस फोन पर ही संपर्क हो पा रहा है। जल्द ही सबसे मिलकर परिणाम की समीक्षा की जाएगी, जो भी होगा उससे नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख पद के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। -पुष्पराज सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा।

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