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निगरानी में लगी आशा-एएनएम की ड्यूटी, बच्चों का टीकाकरण प्रभावित
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कोरोना से बचाव के लिए एक तरफ प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा तो दूसरी ओर टीकाकरण की चेन टूटने से नौनिहालों की सुरक्षा बाधित है। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण का जिम्मा संभालने वाली आशा-एएनएम की ड्यूटी कोरोना मरीजों की निगरानी व अन्य कार्यों में लगाए जाने से नौनिहालों का टीकाकरण प्रभावित हुआ है। हालांकि विभाग का दावा इससे इतर है। जिम्मेदारों की दलील है कि बच्चों का टीकाकरण लगातार चल रहा है।
टीकाकरण परिवार और समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। नवजात बच्चों में बीमारियों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र बहुत मजबूत नहीं होता है। लिहाजा उन्हें टीका लगाकर बाहरी वातावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुकूल माहौल देने का प्रयास रहता है। नीमोकॉक्कल कन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) और रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी) जैसे कई तरह के टीके बच्चों को दिए जाते हैं। मौजूदा सत्र में शून्य से एक वर्ष तक के 1.31 लाख बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। मार्च में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर तेज होने से कोरोना कर्फ्यू लग गया। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी लग चुकी है। स्वास्थ्य कर्मचारियों को अन्य कार्यों में लगा दिए जाने से सामान्य टीकाकरण अभियान को लेकर प्राथमिकता बदल गई है। उनका पूरा ध्यान गांव में बाहर से आने वालों की निगरानी, उन्हें क्वारंटीन करने और कोरोना से बचाव के निर्देशों का पालन कराने की हिदायतें देने में बीत रहा। पीएचसी-सीएचसी पर कर्मचारियों के अभाव में टीकाकरण बाधित है। ऐसे में वहां पहुंचने वाले अभिभावकों को मायूस लौटना पड़ रहा है। वहीं टीकाकरण के प्रति जागरूक न रहने वाले अभिभावकों के बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। विभाग के अनुसार जिले में शून्य से एक वर्ष तक के 1.31 लाख बच्चों के टीककरण का लक्ष्य है। इसकी तुलना में अब तक कुल 34598 बच्चों का टीकाकरण हो सका है। इसमें भी बीसीजी का 8204, पोलियो का 6888, पेंटा वैलेंट का 6820, एमआर का 6334 व जेई का 6352 बच्चों को टीका लगा है।
वर्जन--
नवजात शिशु बीमारी की चपेट में न आएं, इसे देखते हुए इस बार टीकाकरण का कार्य कोरोना संक्रमण के कारण बंद नहीं किया गया है। जिले में इस सत्र में 1.31 लाख शिशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल माह तक 34598 शिशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। -डॉ. एनके सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी जौनपुर।
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टीकाकरण परिवार और समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। नवजात बच्चों में बीमारियों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र बहुत मजबूत नहीं होता है। लिहाजा उन्हें टीका लगाकर बाहरी वातावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुकूल माहौल देने का प्रयास रहता है। नीमोकॉक्कल कन्ज्यूगेट वैक्सीन (पीसीवी) और रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी) जैसे कई तरह के टीके बच्चों को दिए जाते हैं। मौजूदा सत्र में शून्य से एक वर्ष तक के 1.31 लाख बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। मार्च में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर तेज होने से कोरोना कर्फ्यू लग गया। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी लग चुकी है। स्वास्थ्य कर्मचारियों को अन्य कार्यों में लगा दिए जाने से सामान्य टीकाकरण अभियान को लेकर प्राथमिकता बदल गई है। उनका पूरा ध्यान गांव में बाहर से आने वालों की निगरानी, उन्हें क्वारंटीन करने और कोरोना से बचाव के निर्देशों का पालन कराने की हिदायतें देने में बीत रहा। पीएचसी-सीएचसी पर कर्मचारियों के अभाव में टीकाकरण बाधित है। ऐसे में वहां पहुंचने वाले अभिभावकों को मायूस लौटना पड़ रहा है। वहीं टीकाकरण के प्रति जागरूक न रहने वाले अभिभावकों के बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। विभाग के अनुसार जिले में शून्य से एक वर्ष तक के 1.31 लाख बच्चों के टीककरण का लक्ष्य है। इसकी तुलना में अब तक कुल 34598 बच्चों का टीकाकरण हो सका है। इसमें भी बीसीजी का 8204, पोलियो का 6888, पेंटा वैलेंट का 6820, एमआर का 6334 व जेई का 6352 बच्चों को टीका लगा है।
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नवजात शिशु बीमारी की चपेट में न आएं, इसे देखते हुए इस बार टीकाकरण का कार्य कोरोना संक्रमण के कारण बंद नहीं किया गया है। जिले में इस सत्र में 1.31 लाख शिशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल माह तक 34598 शिशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। -डॉ. एनके सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी जौनपुर।
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