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Jaunpur News: पूविवि में ‘एआई’ वाला फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेज लेकर कॉपियां जांचने पहुंचा टीचर, पकड़ा गया

Tue, 26 May 2026 11:46 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 11:46 PM IST
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AI fraud at PU: Teacher arrives to check answer sheets with fake documents, arrested
मूल्यांकन भवन में पकड़ा गया फर्जी शिक्षक राम मिलन।- पूविवि प्रशासन
करंजाकला (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय मूल्यांकन भवन में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार फर्जी दस्तावेजों के सहारे कॉपियां जांचने पहुंचे एक संदिग्ध शिक्षक को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी धोखाधड़ी के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी से सिर्फ माफीनामा लिखवाकर उसे छोड़ दिया। विश्वविद्यालय के बाला साहेब देवरस भवन में भूगोल विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच चल रही थी। आजमगढ़ निवासी राममिलन नामक व्यक्ति बैंक स्टेटमेंट और फर्जी दस्तावेज लेकर मूल्यांकन कार्य में शामिल होने पहुंचा। पहली बार शक होने पर केंद्रीय मूल्यांकन समन्वयक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने उसे समझाकर वापस भेज दिया था। लेकिन मंगलवार को आरोपी दोबारा संशोधित फर्जी दस्तावेज लेकर पहुंच गया। अंतिम चरण की जांच में समन्वयक की नजर उस पर पड़ गई और कड़ाई से पूछताछ शुरू हुई। पूछताछ में हेराफेरी साबित होने पर आरोपी ने लिखित माफीनामा दिया। उसने कबूला कि उसने एआई (एआई) तकनीक की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। उसने लिखकर दिया कि उसे आगामी पांच वर्षों के लिए मूल्यांकन कार्य से निष्कासित कर दिया जाए, जिस पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। माफीनामे में आरोपी ने दावा किया है कि वह वर्ष 2016 से बाल्थर डिग्री कॉलेज में अनुमोदित शिक्षक के रूप में कार्यरत है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन इस बात की पुष्टि तक नहीं कर पाया कि संबंधित कॉलेज में वास्तव में उसका कोई अनुमोदन है भी या नहीं। इतने गंभीर मामले में बिना किसी पुलिसिया कार्रवाई के आरोपी को आसानी से छोड़ देने पर अब विश्वविद्यालय की सुरक्षा और गोपनीयता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में फर्जी परीक्षकों के जरिए मूल्यांकन कार्य में घुसपैठ का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2022 और 2024 में भी फर्जी परीक्षक पकड़े जा चुके हैं। इनके खिलाफ केस तक दर्ज कराया गया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक अनुमोदित शिक्षकों और परीक्षकों की सूची ऑनलाइन सार्वजनिक नहीं कर सका है। ऐसे में हर वर्ष मूल्यांकन प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की आशंका बनी रहती है। शिक्षकों का कहना है कि यदि अनुमोदित शिक्षकों की सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध करा दी जाए और सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी जाए तो मूल्यांकन कार्य में फर्जीवाड़े पर रोक लग जाएगी।
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