एक ताने ने बदल दी ड्राइवर की जिंदगी, बना शिक्षक, चला रहे मोहल्ला क्लास और यूट्यूब चैनल
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तकदीर भी उन्हीं का साथ देती है, जो खुद अपनी तकदीर संवारने का जज्बा रखते हैं। जौनपुर जिले के रामदयालगंज के दुर्गेश इसकी नजीर हैं। कुछ वर्षों पहले तक ऑटो रिक्शा में सवारी ढोने वाले इस युुवा ने अपने ऑटो में बैठे कुछ युवाओं के ताने को दिल पर ले लिया। बस फिर क्या था परिवार के आर्थिक संकट को संभालते हुए चुनौतियों से लड़कर अपनी तकदीर खुद लिखी। अब शिक्षक बनकर दूसरे बच्चों का भविष्य संवारने में जुट गए हैं।
शहर से सटे रामदयालगंज निवासी दुर्गेश के पिता अशोक जायसवाल छत्तीसगढ़ के भिलाई में सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का खर्च चलाते थे। वर्ष 2008 में उनकी तबीयत खराब हो गई। वह तीन-चार माह तक बेड पर रहे। इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए। परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हुआ तो बड़े पुत्र दुर्गेश ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाल ली। तब वह कक्षा-9 में थे।
लोन लेकर ऑटो रिक्शा निकाला और जौनपुर से मड़ियाहूं मार्ग पर संचालन शुरू किया। रिक्शा चलाते हुए वह पढ़ाई भी करते रहे। जैसे-तैसे इंटर की शिक्षा के बाद आर्थिक स्थिति ठीक न होने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। धुन के धनी दुर्गेश ने फिर भी हार नहीं मानी। उन्होंने नए सिरे से पढ़ाई शुरू की।
टीडी कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने वर्ष 2016-18 बैच में डायट जौनपुर में दाखिला लिया। बीटीसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद टेट उत्तीर्ण किया और बीते अक्तूबर में उनका चयन शिक्षक पद के लिए हुआ है। उन्हें करंजाकजा ब्लाक में तैनाती मिली है। लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद होने के चलते वह मोहल्ला क्लास चलाकर बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
एक ताने ने बदल दी जिंदगी
दुर्गेश बताते हैं कि एक बार वह ऑटो रिक्शा लेकर मड़ियाहूं जा रहे थे। उस दौरान उनके रिक्शे में यूपी पुलिस की परीक्षा देकर आए कुछ विद्यार्थी सवार हुए। चर्चा के दौरान उन्होंने पेपर देखना चाहा तो परीक्षार्थियों ने यह कहते हुए ताना दिया कि तुम्हारे वश की बात नहीं, तुम तो बस रिक्शा चलाओ।
जिद कर उन्होंने पेपर लिया और गणित के सवालों को सहजता से हल किया तो परीक्षा देकर लौटे अभ्यर्थी दंग रह गए। बस यहीं से दुुर्गेश ने प्रण किया कि आधा पेट खाएंगे, लेकिन पढ़ाई पूरी करेंगे। इसके बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की। टीडी कॉलेज से स्नातक के दौरान वह बच्चों की ट्यूशन भी करने लगे।
यू-ट्यूब पर भी ले रहे क्लास
शिक्षक की नौकरी में आने से पहले दुर्गेश टीडी कॉलेज के गेट पर बच्चों की कोचिंग भी चलाते थे। वह यूट्यूब पर ई-लर्निंग विथ दुर्गेश नाम से चैनल भी चला रहे हैं, जिसके 1.31 लाख लोगों ने सबस्क्राइब किया है। उनकी ऑनलाइन क्लास से पढ़कर कई बच्चे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल भी हो चुके हैं।
शुरू से ही मेधावी रहे दुर्गेश ने खुद पढ़ाई के दौरान रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा पास की, लेकिन फिजिकल के लिए नहीं गए। वर्ष 2014 में एसएससी का प्री एग्जाम पास किया, मगर टाइपिंग टेस्ट में फेल हो गए। सेंट्रल पुलिस, एमपी पीसीएस की प्री सहित कई अन्य परीक्षाओं में सफल हुए, लेकिन किन्हीं कारणों से आगे के चरण पूरे नहीं कर पाए।
बेटे पर परिवार को नाज
अशोक जायसवाल और मां उर्मिला देवी को बेटे पर नाज है। छोटे भाई मनीष ने भी दुर्गेश के नक्शे कदम पर चलते हुए एलएलबी और बीटीसी की पढ़ाई पूरी कर ली है। बहन अंजली ने भी बीटीसी किया है। पिता अशोक का कहना है कि बीमारी के बाद परिवार की खराब आर्थिक स्थिति से टूट गया था। उम्मीद नहीं थी कि जीवन में कुछ अच्छा होगा।
दुर्गेश की मेहनत से ही सब कुछ संभव हो पाया। दुर्गेश का कहना है कि माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के सहयोग से भी सब संभव हुआ है। कोशिश करेंगे कि दूसरे बच्चों को अच्छी तालिम देकर उनके जीवन में भी खुशियों की रोशनी भर सकूं।