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चंद रुपयों की खातिर पांच बार विधवा हुईं महिलाएं
Jaunpur
Updated Wed, 15 May 2013 05:30 AM IST
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मड़ियाहूं। सरकारी योजनाओं के नाम पर गोरखधंधा जारी है। खासकर समाज कल्याण विभाग में बड़े पैमाने पर हेराफेरी जारी है। कुछ ऐसा ही मामला मंगलवार को काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक मड़ियाहूं शाखा में पकड़ा गया। जांच हुई तो पता चला कि एक ही योजना की धनराशि एक ही व्यक्ति के खाते में चार से पांच बार स्थानांतरित की गई। इस तरह एक ही महिला पांच-पांच बार अपने पति को दिवंगत घोषित कर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का भुगतान प्राप्त कर रही है। काशी गोमती बैंक मड़ियाहूं में जांच के दौरान पता चला कि दो विधवा को पांच बार एक ही योजना के भुगतान किए गए। इसी तरह शादी अनुदान की दस हजार की रकम एक ही व्यक्ति को एक ही बैंक खाते में दो बार स्थानांतरित की गई। समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र यादव कह रहे हैं कि बगैर शिकायत के कोई कार्रवाई नहीं होगी।
मंगलवार को सरकारी योजनाओं के बड़े गोरखधंधे का मामला सामने आया। पैसा भुगतान के लिए आए व्यक्ति के खाते से जब भुगतान हो रहा था तो प्रभारी शाखा प्रबंधक की नजर गई। खाते में समाज कल्याण विभाग से एक ही योजना का पैसा कई बार भेजा जा रहा है। बैंक ने तुरंत भुगतान रोक दिया और समाज कल्याण विभाग को सूचना दी है। पकड़े गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि ग्राम प्रधान दलालों के जरिए यह रैकेट चला रहे हैं। एक ही महिला के पति को बार-बार मृतक दिखाकर भुगतान जारी करा रहे हैं। इसी तरह एक ही व्यक्ति की बेटी का विवाह भी बार-बार करा रहे हैं। यह धंधा ग्राम पंचायतों, ब्लाक से होते हुए समाज कल्याण विभाग तक पहुंचा। समाज कल्याण विभाग भी बगैर तहकीकात कराए ही महिला को भुगतान जारी करता रहा। लाभार्थी के खाते में पैसा आने के तुरंत बाद आधी रकम वसूल ली जाती है। जांच के दौरान पता चला कि जगपाल के काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक मड़ियाहूं के खाता संख्या 6294 में शादी अनुदान की धनराशि दस-दस हजार दो बार भुगतान की गई। एक बार की पूरी रकम निकाल ली गई। दोबारा मंगलवार को निकालने पहुंचा तो भुगतान रोक दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि पति की मृत्यु के बाद राष्ट्रीय पारिवारिक योजना की धनराशि इंद्रावती के खाता संख्या 44217 में छह तिथियों में 90 हजार रुपये भेजे गए। जबकि पति की मौत पर एक बार बीस हजार देने की व्यवस्था है। बैंक के दस्तावेज के मुताबिक इंद्रावती के खाते में 14 मार्च 2011 को 20 हजार, 29 अप्रैल 2011 को बीस हजार, 31 मई 2011 को बीस हजार, एक जुलाई 2011 को दस हजार, 28 मई 2012 को दस हजार तथा एक मई 2013 को दस हजार रुपये समाज कल्याण से ट्रांसफर किए गए। कुल 90 हजार रुपये बैंक खाते में एक ही योजना के भेजे गए। इसी तरह ऊषा देवी नाम की महिला के बैंक खाता संख्या 101214 में 27 नवंबर 2011 को 20 हजार, एक जुलाई 2011 को बीस हजार, 28 मई 2012 को दस हजार, 11 जून 2012 को दस हजार, एक मई 2013 को दस हजार रुपये जारी किए गए। ऊषा देवी को समाज कल्याण विभाग से कुल 70 हजार रुपये जारी हुए। तहकीकात में पता चला कि एक मई की तिथि में ऊषा देवी, प्रभावती देवी, शांति देवी, देवराज, शीला देवी, इंद्रावती, मटरू राम समेत सात लोगों के खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया। कुछ राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लाभार्थी है तो कुछ शादी अनुदान के। ऊषादेवी, इंद्रवती, देवराज, शीला देवी ने पैसा निकाल लिया है। मंगलवार को इन लाभार्थियों के साथ सरकारी योजनाओं के दलाल भी आए थे। हल्ला मचा तो दोनों भाग निकले। काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के प्रभारी शाखा प्रबंधक जिलेदार सिंह ने बताया कि संदिग्ध भुगतान रोक दिए गए हैं। भुगतान के लिए कई अन्य आए थे लेकिन जब जगपाल का भुगतान रोका गया तो वे भाग निकले। सूचना भेजी जा रही है।
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मंगलवार को सरकारी योजनाओं के बड़े गोरखधंधे का मामला सामने आया। पैसा भुगतान के लिए आए व्यक्ति के खाते से जब भुगतान हो रहा था तो प्रभारी शाखा प्रबंधक की नजर गई। खाते में समाज कल्याण विभाग से एक ही योजना का पैसा कई बार भेजा जा रहा है। बैंक ने तुरंत भुगतान रोक दिया और समाज कल्याण विभाग को सूचना दी है। पकड़े गए लोगों से पूछताछ में पता चला कि ग्राम प्रधान दलालों के जरिए यह रैकेट चला रहे हैं। एक ही महिला के पति को बार-बार मृतक दिखाकर भुगतान जारी करा रहे हैं। इसी तरह एक ही व्यक्ति की बेटी का विवाह भी बार-बार करा रहे हैं। यह धंधा ग्राम पंचायतों, ब्लाक से होते हुए समाज कल्याण विभाग तक पहुंचा। समाज कल्याण विभाग भी बगैर तहकीकात कराए ही महिला को भुगतान जारी करता रहा। लाभार्थी के खाते में पैसा आने के तुरंत बाद आधी रकम वसूल ली जाती है। जांच के दौरान पता चला कि जगपाल के काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक मड़ियाहूं के खाता संख्या 6294 में शादी अनुदान की धनराशि दस-दस हजार दो बार भुगतान की गई। एक बार की पूरी रकम निकाल ली गई। दोबारा मंगलवार को निकालने पहुंचा तो भुगतान रोक दिया गया। जांच के दौरान पता चला कि पति की मृत्यु के बाद राष्ट्रीय पारिवारिक योजना की धनराशि इंद्रावती के खाता संख्या 44217 में छह तिथियों में 90 हजार रुपये भेजे गए। जबकि पति की मौत पर एक बार बीस हजार देने की व्यवस्था है। बैंक के दस्तावेज के मुताबिक इंद्रावती के खाते में 14 मार्च 2011 को 20 हजार, 29 अप्रैल 2011 को बीस हजार, 31 मई 2011 को बीस हजार, एक जुलाई 2011 को दस हजार, 28 मई 2012 को दस हजार तथा एक मई 2013 को दस हजार रुपये समाज कल्याण से ट्रांसफर किए गए। कुल 90 हजार रुपये बैंक खाते में एक ही योजना के भेजे गए। इसी तरह ऊषा देवी नाम की महिला के बैंक खाता संख्या 101214 में 27 नवंबर 2011 को 20 हजार, एक जुलाई 2011 को बीस हजार, 28 मई 2012 को दस हजार, 11 जून 2012 को दस हजार, एक मई 2013 को दस हजार रुपये जारी किए गए। ऊषा देवी को समाज कल्याण विभाग से कुल 70 हजार रुपये जारी हुए। तहकीकात में पता चला कि एक मई की तिथि में ऊषा देवी, प्रभावती देवी, शांति देवी, देवराज, शीला देवी, इंद्रावती, मटरू राम समेत सात लोगों के खाते में पैसा ट्रांसफर किया गया। कुछ राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के लाभार्थी है तो कुछ शादी अनुदान के। ऊषादेवी, इंद्रवती, देवराज, शीला देवी ने पैसा निकाल लिया है। मंगलवार को इन लाभार्थियों के साथ सरकारी योजनाओं के दलाल भी आए थे। हल्ला मचा तो दोनों भाग निकले। काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के प्रभारी शाखा प्रबंधक जिलेदार सिंह ने बताया कि संदिग्ध भुगतान रोक दिए गए हैं। भुगतान के लिए कई अन्य आए थे लेकिन जब जगपाल का भुगतान रोका गया तो वे भाग निकले। सूचना भेजी जा रही है।
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