{"_id":"60-80659","slug":"Jaunpur-80659-60","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिनभर खरीदारी में व्यस्त रहे लोग ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिनभर खरीदारी में व्यस्त रहे लोग
Jaunpur
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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जौनपुर। छोटी दिवाली पर बाजारों में भारी रौनक रही। दिनभर लोग जरूरी सामग्रियों की खरीदारी में व्यस्त रहें। दोपहर तक ग्राहकों की संख्या कुछ ज्यादा हुई। जैसे ही शाम हुई बाजार ठसाठस भर गए। लाई, चूड़ा, गट्टा, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की दुकानों पर ग्राहकों का झुंड देखा गया। खास बात यह कि दुकानों पर ज्यादातर ग्राहक पाव से लेकर किलो तक की खरीददारी करने वाले थे। हर आदमी दाम पूछने के बाद अपने बजट को याद कर रहा था। यह सिलसिला रात तक चला। अभिभावकों के साथ बच्चे भी खरीददारी करने निकले थे। खाद्य सामग्री खरीदने के बाद बच्चे पटाखा की मांग कर रहे थे लेकिन ज्यादातर अभिभावक पटाखा से कन्नी काटते नजर आए।
बीआरपी में पटाखा की दुकान लगाए शाहिद का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष बाजार में सन्नाटा है। 20 फीसदी भी धंधा नहीं हुआ है। यही स्थिति रह गई तो काफी नुकसान होगा। जितेंद्र चौरसिया ने कहा कि पटाखा बाजार की ओर ग्राहक ही नहीं दिख रहे है। जबकि कई अच्छी वेरायटी के पटाखे इस बार स्टालों पर लगे हैं। चांदमारी निवासी विजय प्रकाश चौबे ने कहा कि जबरदस्त महंगाई के चलते जेब पहले से ही हल्की है। किसी तरह त्योहार मनाया जा रहा है। ऐसे पटाखा सहित अन्य खर्चों से बचने की कोशिश हो रही है। अहमद खा मंडी निवासी विमलेश सिंह ने कहा कि अब त्योहारों पर पहले वाली बात नहीं रही। पहले तो झोला भरकर लोग सामग्री खरीदते थे। अब तो त्योहारों पर परंपरा का किसी तरह से निर्वहन हो रहा है। करंजाकला के काफरपुर निवासी शीला विश्वकर्मा ने कहा कि महंगाई का झटका इस बार जबरदस्त लगा है। इसके चलते दशहरा, धनतेरस और दिवाली पर केवल परंपरा का निर्वहन हुआ है। यही हाल रहा तो आगे और दिक्कत होगी।
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बीआरपी में पटाखा की दुकान लगाए शाहिद का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष बाजार में सन्नाटा है। 20 फीसदी भी धंधा नहीं हुआ है। यही स्थिति रह गई तो काफी नुकसान होगा। जितेंद्र चौरसिया ने कहा कि पटाखा बाजार की ओर ग्राहक ही नहीं दिख रहे है। जबकि कई अच्छी वेरायटी के पटाखे इस बार स्टालों पर लगे हैं। चांदमारी निवासी विजय प्रकाश चौबे ने कहा कि जबरदस्त महंगाई के चलते जेब पहले से ही हल्की है। किसी तरह त्योहार मनाया जा रहा है। ऐसे पटाखा सहित अन्य खर्चों से बचने की कोशिश हो रही है। अहमद खा मंडी निवासी विमलेश सिंह ने कहा कि अब त्योहारों पर पहले वाली बात नहीं रही। पहले तो झोला भरकर लोग सामग्री खरीदते थे। अब तो त्योहारों पर परंपरा का किसी तरह से निर्वहन हो रहा है। करंजाकला के काफरपुर निवासी शीला विश्वकर्मा ने कहा कि महंगाई का झटका इस बार जबरदस्त लगा है। इसके चलते दशहरा, धनतेरस और दिवाली पर केवल परंपरा का निर्वहन हुआ है। यही हाल रहा तो आगे और दिक्कत होगी।
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