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सपा की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं निर्दल उमाकांत
Jaunpur
Updated Thu, 20 Mar 2014 05:31 AM IST
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जौनपुर। पूर्व सांसद उमाकांत यादव ने निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनीतिक खेमों में नई हलचल पैदा कर दी है। वह अपने निर्णय पर अडिग रहे तो सपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहे उमाकांत की अपनी बिरादरी के अलावा अन्य जातियों में भी खासी पैठ है। सदर लोकसभा सीट से उमाकांत तीसरे यादव प्रत्याशी के रूप में मैदान में होंगे।
समाजवादी पार्टी ने कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव को जौनपुर सदर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। सपा ने गो-सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन डा. केपी यादव का टिकट काट कर पारसनाथ को प्रत्याशी बनाया है। टिकट काटे जाने से नाराज डा. केपी यादव ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। आम आदमी पार्टी ने डा. केपी को टिकट देकर सपा के गढ़ में ही उसे पहले ही चुनौती दी है। अब पूर्व सांसद उमाकांत ने निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस ऐलान से राजनीतिक खेमों में हलचल मच गई है। 1989 से राजनैतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले उमाकांत तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं। 1989 में वह बसपा के टिकट पर खुटहन विधानसभा से चुनाव लड़े थे, लेकिन वह जनता दल के लालता प्रसाद यादव के सामने चुनाव हार गए थे। 1991 में बसपा के टिकट पर ही वह पहली बार विधायक चुने गए थे। 1993 में सपा बसपा गठबंधन में दोबारा विधायक चुने गए। 2005 में स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद उन्हें बसपा से निकाल दिया गया तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। 1996 में जेल में रहकर सपा के टिकट पर वह खुटहन से तीसरी बार विधायक चुने गए थे। 2001 में उन्हें सपा से निकाल दिया गया तो जनता दल यू में शामिल हो गए। 2002 में जदयू और भाजपा गठबंधन से चुनाव लड़े। इस बार वह बसपा प्रत्याशी शैलेंद्र यादव ललई के सामने चुनाव हार गए। 2004 के लोकसभा चुनाव के समय बसपा ने उन्हें फिर पार्टी में शामिल कर मछलीशहर से टिकट दे दिया। इस बार जेल में रहते हुए वह सांसद चुने गए। 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो पार्टी की मुखिया मायावती ने आजमगढ़ में एक मकान ढहवाने के आरोप में अपने आवास से ही उमाकांत को गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवा दिया था। लंबे समय बाद इसी साल जनवरी में वह जेल से रिहा हुए तो बसपा के ही झंडा बैनर के साथ जेल से अपने घर पहुंचे। फरवरी में बसपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दल से बाहर कर दिया। अब उन्होंने निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जौनपुर सदर लोकसभा क्षेत्र की तीन विधानसभाओं की सीट सपा के पास हैं और एक-एक सीट पर कांग्रेस और भाजपा का कब्जा है। इस सीट से कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता रवि किशन शुक्ल, बसपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री सुभाष पांडेय और भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. उमानाथ सिंह के बेटे केपी सिंह को प्रत्याशी बनाया है। कुल मिलाकर सपा, बसपा, कांग्रेस, भाजपा और निर्दल उमाकांत के बीच मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
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समाजवादी पार्टी ने कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव को जौनपुर सदर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। सपा ने गो-सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन डा. केपी यादव का टिकट काट कर पारसनाथ को प्रत्याशी बनाया है। टिकट काटे जाने से नाराज डा. केपी यादव ने आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। आम आदमी पार्टी ने डा. केपी को टिकट देकर सपा के गढ़ में ही उसे पहले ही चुनौती दी है। अब पूर्व सांसद उमाकांत ने निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके इस ऐलान से राजनीतिक खेमों में हलचल मच गई है। 1989 से राजनैतिक कैरियर की शुरुआत करने वाले उमाकांत तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं। 1989 में वह बसपा के टिकट पर खुटहन विधानसभा से चुनाव लड़े थे, लेकिन वह जनता दल के लालता प्रसाद यादव के सामने चुनाव हार गए थे। 1991 में बसपा के टिकट पर ही वह पहली बार विधायक चुने गए थे। 1993 में सपा बसपा गठबंधन में दोबारा विधायक चुने गए। 2005 में स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद उन्हें बसपा से निकाल दिया गया तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया। 1996 में जेल में रहकर सपा के टिकट पर वह खुटहन से तीसरी बार विधायक चुने गए थे। 2001 में उन्हें सपा से निकाल दिया गया तो जनता दल यू में शामिल हो गए। 2002 में जदयू और भाजपा गठबंधन से चुनाव लड़े। इस बार वह बसपा प्रत्याशी शैलेंद्र यादव ललई के सामने चुनाव हार गए। 2004 के लोकसभा चुनाव के समय बसपा ने उन्हें फिर पार्टी में शामिल कर मछलीशहर से टिकट दे दिया। इस बार जेल में रहते हुए वह सांसद चुने गए। 2007 में प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो पार्टी की मुखिया मायावती ने आजमगढ़ में एक मकान ढहवाने के आरोप में अपने आवास से ही उमाकांत को गिरफ्तार करवाकर जेल भिजवा दिया था। लंबे समय बाद इसी साल जनवरी में वह जेल से रिहा हुए तो बसपा के ही झंडा बैनर के साथ जेल से अपने घर पहुंचे। फरवरी में बसपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दल से बाहर कर दिया। अब उन्होंने निर्दल चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जौनपुर सदर लोकसभा क्षेत्र की तीन विधानसभाओं की सीट सपा के पास हैं और एक-एक सीट पर कांग्रेस और भाजपा का कब्जा है। इस सीट से कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता रवि किशन शुक्ल, बसपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री सुभाष पांडेय और भाजपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. उमानाथ सिंह के बेटे केपी सिंह को प्रत्याशी बनाया है। कुल मिलाकर सपा, बसपा, कांग्रेस, भाजपा और निर्दल उमाकांत के बीच मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
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