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भयावह हालात: यूपी के इस जिले में एक साल में बने थे 450 मृत्यु प्रमाण पत्र, इस बार डेढ़ माह में ही 145
Tue, 18 May 2021 10:51 PM IST
उत्पल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
Published by: उत्पल कांत
Updated Tue, 18 May 2021 10:51 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। इस बार डेढ़ माह में ही 145 मृत्यु प्रमाण पत्र बन चुका है जबकि बीते एक साल में मात्र 450 लोगों के प्रमाण पत्र बनाए गए थे।
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प्रतिकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इसे बीमारी से हुई मौतों का असर कहें या सिर्फ संयोग। मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। आलम यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष में पूरे साल जितने प्रमाण पत्र जारी हुए थे, उसका एक तिहाई सिर्फ पिछले डेढ़ महीने में ही बनवाया गया है। यह स्थिति केवल नगरीय क्षेत्र की है। ग्रामीण इलाकों में मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की संख्या इससे भी ज्यादा है।
शहरी क्षेत्र में किसी के भी जन्म या मृत्यु होने पर नगर पालिका के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी होता है। इसके लिए परिजनों को तय प्रारूप पर आवेदन करना होता है। सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। नगर पालिका जौनपुर के रिकार्ड पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में अप्रैल से मार्च तक कुल 450 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए थे।
हर महीने मौत का आंकड़ा 40 के आसपास था। इसकी तुलना में इस बार अप्रैल में 126 लोगों के प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। वहीं, मई में अब तक 19 प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन अभी लंबित भी हैं। नगर पालिका के अलावा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से अस्पतालों में भी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं।
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शहरी क्षेत्र में किसी के भी जन्म या मृत्यु होने पर नगर पालिका के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी होता है। इसके लिए परिजनों को तय प्रारूप पर आवेदन करना होता है। सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। नगर पालिका जौनपुर के रिकार्ड पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2020-21 में अप्रैल से मार्च तक कुल 450 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए थे।
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हर महीने मौत का आंकड़ा 40 के आसपास था। इसकी तुलना में इस बार अप्रैल में 126 लोगों के प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। वहीं, मई में अब तक 19 प्रमाण पत्र जारी हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन अभी लंबित भी हैं। नगर पालिका के अलावा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से अस्पतालों में भी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं।
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इस संख्या को जोड़ें तो इस वर्ष अप्रैल में मरने वालों की संख्या पिछले वर्ष की अपेक्षा तीन गुनी है। जिले के शाहगंज, मुंगराबादशाहपुर, मछलीशहर, मड़ियाहूं, केराकत, खेतासराय, बदलापुर सहित अन्य निकायों में भी प्रमाण पत्र के लिए अलग व्यवस्था है।
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु प्रमाण पत्र का जिम्मा संबंधित पंचायत सचिव का है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन आने पर उसका सत्यापन कराया जाता है। जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। पिछले एक माह से आवेदनों की संख्या में वृद्धि हुई है।
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु प्रमाण पत्र का जिम्मा संबंधित पंचायत सचिव का है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्र का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन आने पर उसका सत्यापन कराया जाता है। जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। पिछले एक माह से आवेदनों की संख्या में वृद्धि हुई है।