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सपा के 20 जिला पंचायत सदस्यों पर भी गिर सकती है गाज
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मिली हार को सपा पचा नहीं पा रही है। इसे लेकर लगातार मंथन जारी है। माना जा रहा है कि कुछ दिग्गजों के साथ-साथ पार्टी की हर गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले जिला पंचायत सदस्यों पर भी गाज गिर सकती है। इनमें 20 जिला पंचायत सदस्य तो ऐसे हैं, जो पार्टी के विभिन्न जिम्मेदार पदों पर हैं। जिनकी भी निष्ठा पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों की मानें तो ऐसे जिला पंचायत सदस्यों की भी सूची जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष को भेज दी जाएगी। वहीं, इस समय प्रदेश नेतृत्व भी ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान होने वाली हर गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को चुनाव हुआ है। राष्ट्रीय नेतृत्व इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहा था। हालांकि इसके पहले ही कुछ दिग्गजों के आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए सभी विधायकों और संगठन के लोगों को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बुलाया गया था। इस दौरान जिम्मेदारों ने जीत को लेकर आश्वस्त किया था । वहीं 24 जून को 6 जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण कराई। जिला इकाई और विधायकों के दावों को देखते हुए पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी भी जौनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हो थे, क्योंकि पार्टी के जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव ने 6 जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराने के पहले ही दावा कर चुके थे कि चुनाव में 42 ऐसे जिला पंचायत सदस्य उनके साथ हैं, जो उनकी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। ऐसे में 83 जिला पंचायत सदस्यों में से 48 के सपा से सीधा संपर्क होने का दावा किया जा रहा था, जबकि इसके अलावा जोड़-तोड़ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी निशी यादव के पक्ष में 55 जिला पंचायत सदस्यों से मतदान कराने की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को दी जा रही है। इतना ही नहीं, चुनाव के दिन 39 जिला पंचायत सदस्य केस सपा के कैंप कार्यालय आने के बाद मतदान करने की सूचना पर पार्टी इस सीट को पक्की मानकर चल रही थी। लेकिन, चुनाव में पार्टी भितरघात का शिकार हो गई, क्योंकि 55 सीट पाकर जीत की हैट्रिक लगाने का सपना संजोने वाली सपा की प्रत्याशी को महज 12 मत पाकर तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
हालांकि इसे गंभीरता से लेते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने 4 जुलाई को पत्र जारी कर जिलाध्यक्ष और जिला महासचिव से हार का कारण पूछा। इसकी स्पष्ट रिपोर्ट सात जुलाई तक अनिवार्य रूप से देने का फरमान जारी कर दिया। सूत्रों के मुताबिक चुनाव पहले और परिणाम घोषित होने के बाद हुई गतिविधियों की प्राथमिक स्तर पर कुछ रिपोर्ट भी प्रेषित कर दी गई। हालांकि विस्तृत रिपोर्ट भेजने की तैयारी चल ही रही थी कि ब्लाक प्रमुख चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई। इसके कारण कुछ मोहलत दे दी गई है। लेकिन, पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक कार्रवाई के दायरे में आ रहे कुछ दिग्गजों के अलावा ऐसे 20 जिला पंचायत सदस्य भी हैं, जो पार्टी और उससे जुड़े फ्रंटल दल में किसी न किसी पद पर हैं, जिनके खिलाफ ब्लाक प्रमुख चुनाव के बाद किसी भी दिन कार्रवाई हो सकती है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तीन जुलाई को चुनाव हुआ है। राष्ट्रीय नेतृत्व इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहा था। हालांकि इसके पहले ही कुछ दिग्गजों के आरोप-प्रत्यारोप को देखते हुए सभी विधायकों और संगठन के लोगों को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बुलाया गया था। इस दौरान जिम्मेदारों ने जीत को लेकर आश्वस्त किया था । वहीं 24 जून को 6 जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण कराई। जिला इकाई और विधायकों के दावों को देखते हुए पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी भी जौनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट पर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हो थे, क्योंकि पार्टी के जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव ने 6 जिला पंचायत सदस्यों को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराने के पहले ही दावा कर चुके थे कि चुनाव में 42 ऐसे जिला पंचायत सदस्य उनके साथ हैं, जो उनकी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। ऐसे में 83 जिला पंचायत सदस्यों में से 48 के सपा से सीधा संपर्क होने का दावा किया जा रहा था, जबकि इसके अलावा जोड़-तोड़ करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी निशी यादव के पक्ष में 55 जिला पंचायत सदस्यों से मतदान कराने की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को दी जा रही है। इतना ही नहीं, चुनाव के दिन 39 जिला पंचायत सदस्य केस सपा के कैंप कार्यालय आने के बाद मतदान करने की सूचना पर पार्टी इस सीट को पक्की मानकर चल रही थी। लेकिन, चुनाव में पार्टी भितरघात का शिकार हो गई, क्योंकि 55 सीट पाकर जीत की हैट्रिक लगाने का सपना संजोने वाली सपा की प्रत्याशी को महज 12 मत पाकर तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
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हालांकि इसे गंभीरता से लेते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने 4 जुलाई को पत्र जारी कर जिलाध्यक्ष और जिला महासचिव से हार का कारण पूछा। इसकी स्पष्ट रिपोर्ट सात जुलाई तक अनिवार्य रूप से देने का फरमान जारी कर दिया। सूत्रों के मुताबिक चुनाव पहले और परिणाम घोषित होने के बाद हुई गतिविधियों की प्राथमिक स्तर पर कुछ रिपोर्ट भी प्रेषित कर दी गई। हालांकि विस्तृत रिपोर्ट भेजने की तैयारी चल ही रही थी कि ब्लाक प्रमुख चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई। इसके कारण कुछ मोहलत दे दी गई है। लेकिन, पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक कार्रवाई के दायरे में आ रहे कुछ दिग्गजों के अलावा ऐसे 20 जिला पंचायत सदस्य भी हैं, जो पार्टी और उससे जुड़े फ्रंटल दल में किसी न किसी पद पर हैं, जिनके खिलाफ ब्लाक प्रमुख चुनाव के बाद किसी भी दिन कार्रवाई हो सकती है।
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