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नहर सूखी होने से किसान नहीं डाल पा रहे धान की नर्सरी
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सिकरारा। क्षेत्र की नहरें इस समय सूख गई है। जिससे किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। सिंचाई विभागकी मानें तो नहरों में पानी छोड़ने का रोस्टर प्रणाली लागू है। रोस्टर के अनुसार निश्चित समय तक ही पानी की आपूर्ति हो रही है।
सिंचाई प्रखंड दो की शारदा सहायक नहर की मड़ियाहूं शाखा के किनारे के किसानों की मुख्य फसल धान है। यहां की मिट्टी भी धान की खेती के लिए काफी मुफीद है। लेकिन नहर में जरूरत के समय पानी की आपूर्ति नहीं होने से किसानों को धान की खेती करने में समस्या आ रही है। इस दौरान लखापुर, इसमैला, चाँदपुर, दुदौली, डमरुआ, बभनौली, सैदपुर,शेरवां, सुरतासा पुर, सिकरारा, अलीशाहपुर, लाजीपार,टेकारी, बथुआवर आदि गाँवो के किसान पूरी तैयारी के बावजूद भी पानी के आभाव में धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। दुदौली गाँव के किसान राज नारायण यादव कहते हैं कि कृषि विभाग द्वारा धान की नर्सरी डालने का उपयुक्त समय 30 मई से 7 जून तक बताया गया है। लेकिन इस समय नहर में पानी नहीं है। जिससे धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। धान की नर्सरी समय से नहीं डाले जाने से उत्पादन भी प्रभावित होता है। किसान चाह कर भी उन्नतिशील खेती के लिए सही समय पर नर्सरी डालने में असमर्थ है। इसके लिए विभाग द्वारा लागू रोस्टर प्रणाली घातक साबित हो रही है। जब किसानों को पानी की ज्यादा जरूरत होगी तो पानी ही नहीं रहेगा। 20 दिन इस नहर में पानी खूब था। जब किसान धान की नर्सरी डालने को खेत आदि तैयार करना शुरु किए तो नहर में पानी ही नहीं है। बघौरा निवासी सरोज उपाध्याय बताते हैं कि यदि समय पर नहर में पानी नहीं आया तो खरीफ की मुख्य फसल धान की उपज पर ज्यादा विपरीत असर पड़ेगा । कारण कि समय से नर्सरी ही नहीं पड़ेगी तो रोपाई भी पिछड़ जाएगी। जिसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा। अलीशाहपुर के घनश्याम उपाध्याय बताते हैं कि यदि जल्द ही नहर में पानी की आपूर्ति शीघ्र नहीं की गई तो किसान धरना प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
सिंचाई प्रखंड दो की शारदा सहायक नहर की मड़ियाहूं शाखा के किनारे के किसानों की मुख्य फसल धान है। यहां की मिट्टी भी धान की खेती के लिए काफी मुफीद है। लेकिन नहर में जरूरत के समय पानी की आपूर्ति नहीं होने से किसानों को धान की खेती करने में समस्या आ रही है। इस दौरान लखापुर, इसमैला, चाँदपुर, दुदौली, डमरुआ, बभनौली, सैदपुर,शेरवां, सुरतासा पुर, सिकरारा, अलीशाहपुर, लाजीपार,टेकारी, बथुआवर आदि गाँवो के किसान पूरी तैयारी के बावजूद भी पानी के आभाव में धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं। दुदौली गाँव के किसान राज नारायण यादव कहते हैं कि कृषि विभाग द्वारा धान की नर्सरी डालने का उपयुक्त समय 30 मई से 7 जून तक बताया गया है। लेकिन इस समय नहर में पानी नहीं है। जिससे धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। धान की नर्सरी समय से नहीं डाले जाने से उत्पादन भी प्रभावित होता है। किसान चाह कर भी उन्नतिशील खेती के लिए सही समय पर नर्सरी डालने में असमर्थ है। इसके लिए विभाग द्वारा लागू रोस्टर प्रणाली घातक साबित हो रही है। जब किसानों को पानी की ज्यादा जरूरत होगी तो पानी ही नहीं रहेगा। 20 दिन इस नहर में पानी खूब था। जब किसान धान की नर्सरी डालने को खेत आदि तैयार करना शुरु किए तो नहर में पानी ही नहीं है। बघौरा निवासी सरोज उपाध्याय बताते हैं कि यदि समय पर नहर में पानी नहीं आया तो खरीफ की मुख्य फसल धान की उपज पर ज्यादा विपरीत असर पड़ेगा । कारण कि समय से नर्सरी ही नहीं पड़ेगी तो रोपाई भी पिछड़ जाएगी। जिसका सीधा असर धान की पैदावार पर पड़ेगा। अलीशाहपुर के घनश्याम उपाध्याय बताते हैं कि यदि जल्द ही नहर में पानी की आपूर्ति शीघ्र नहीं की गई तो किसान धरना प्रदर्शन को मजबूर होंगे।
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