{"_id":"5cec2d72bdec22073073ebd7","slug":"15589820514-jaunpur-news191","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिटी मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारी के खिलाफ अवमानना का वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिटी मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारी के खिलाफ अवमानना का वाद
विज्ञापन
जौनपुर। कोर्ट के आदेश के बावजूद अल्ट्रासाउंड मशीन रिलीज न करने और ट्रैकर डिवाइस का डाटा कलेक्शन नहीं करने पर नगर मजिस्ट्रेट और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम के नोडल अधिकारी सदर आईएल तिवारी को सीजेएम ने कड़ी चेतावनी दी है। उनसे तीन दिन के भीतर अल्ट्रासाउंड मशीन व कक्ष में लगे ट्रैकर डिवाइस का डाटा कलेक्शन करने को कहा है। अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का वाद दर्ज किया जा चुका है। अगली सुनवाई की 29 मई तिथि नियत की गई।
तत्कालीन एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी ने विवेक श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव और डा विकास अग्रवाल ने तीन जुलाई 2018 को कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मरदानपुर में अल्ट्रासाउंड केंद्र का निरीक्षण करने खामियां पाई गईं। इस पर अल्ट्रासाउंड केंद्र सील कर दिया। विवेक कुमार श्रीवास्तव के आवेदन पर कोर्ट ने 10 अक्तूबर 2018 को मशीन मुक्त करने का आदेश दिया था। साथ ही मशीन के सॉफ्टवेयर तथा ट्रैकर डिवाइस का डाटा संकलन करने को कहा था। चार अप्रैल 2019 को जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी की रिपोर्ट भेजी कि अल्ट्रासाउंड मशीन के कक्ष के मुख्य दरवाजे पर लगी सील संदिग्ध स्थिति में पाई गई और डाटा संकलन नहीं किया गया। कोर्ट के 30 अप्रैल और 18 मई को आदेश के बावजूद डाटा संकलित नहीं किया गया।
इस बीच आवेदक विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट में को दो अप्रैल 2019 को बताया कि नोडल अधिकारी अल्ट्रासाउंड कक्ष कती सील खोलकर भीतर गए थे लेकिन ट्रैकर डिवाइस को खोलने या रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बजाय दोबारा सील लगा दी। उनका कहना था कि सील से छेड़छाड़ की गई है। अगर ऐसा था तो उन्हें शुरू में कहना चाहिए था। उन्होंने न्यायालय की अवमानना का आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए आदेश दिया कि यदि तीन दिन में डाटा कलेक्शन नहीं कियया जाता तो आवेदक अल्ट्रासाउंड कक्ष की सील तोड़ कर मशीन का प्रयोग कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तत्कालीन एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी ने विवेक श्रीवास्तव, अश्वनी श्रीवास्तव और डा विकास अग्रवाल ने तीन जुलाई 2018 को कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित मरदानपुर में अल्ट्रासाउंड केंद्र का निरीक्षण करने खामियां पाई गईं। इस पर अल्ट्रासाउंड केंद्र सील कर दिया। विवेक कुमार श्रीवास्तव के आवेदन पर कोर्ट ने 10 अक्तूबर 2018 को मशीन मुक्त करने का आदेश दिया था। साथ ही मशीन के सॉफ्टवेयर तथा ट्रैकर डिवाइस का डाटा संकलन करने को कहा था। चार अप्रैल 2019 को जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी की रिपोर्ट भेजी कि अल्ट्रासाउंड मशीन के कक्ष के मुख्य दरवाजे पर लगी सील संदिग्ध स्थिति में पाई गई और डाटा संकलन नहीं किया गया। कोर्ट के 30 अप्रैल और 18 मई को आदेश के बावजूद डाटा संकलित नहीं किया गया।
विज्ञापन
इस बीच आवेदक विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट में को दो अप्रैल 2019 को बताया कि नोडल अधिकारी अल्ट्रासाउंड कक्ष कती सील खोलकर भीतर गए थे लेकिन ट्रैकर डिवाइस को खोलने या रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के बजाय दोबारा सील लगा दी। उनका कहना था कि सील से छेड़छाड़ की गई है। अगर ऐसा था तो उन्हें शुरू में कहना चाहिए था। उन्होंने न्यायालय की अवमानना का आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए आदेश दिया कि यदि तीन दिन में डाटा कलेक्शन नहीं कियया जाता तो आवेदक अल्ट्रासाउंड कक्ष की सील तोड़ कर मशीन का प्रयोग कर सकता है।
विज्ञापन