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भारत बंद के दौरान जेल में बंद लोगों को रिहा करने की मांग
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:57 PM IST
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जौनपुर।भारत बंद प्रदर्शन के द।ौरान 2 अप्रैल को जेल में बंद अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को रिहा कराने व न्याय दिलाने की मांग को लेकर भीम आर्मी भारत एकता मिशन द्वारा बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट को पत्रक सौपा। जिसमें मांगों को पूरा करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों को विशेष कानूनी संरक्षण हेतु संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 उसी का एक हिस्सा है। किंतु अधिनियम को निष्प्रभावी बनाए जाने एवं कमजोर वर्गों पर बढ़ते अत्याचार के विरोध में दलित शोषित समाज के बुद्धिजीवी सामाजिक संगठनों कर्मचारी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त तत्वाधान में दलित समाज के लोग 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति कराने हेतु शांतिपूर्वक देने जा रहे थे। किंतु पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कहर बरपाया गया। उनपर पर कई झूठे मुकदमे संगीन धाराओं में दर्ज कर जेल में बंद कर दिया गया । इस झूठे एवं फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लेकर लोगों को रिहा करने, 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान प्रशासनिक हिंसा में मरने वाले लोगों के परिवारों को एक व्यक्तियों को सरकारी नौकरी देने, हिंसा के दौरान मरने वालों के मृतक आश्रितों को एक करोड़ का मुआवजा देने, दलित वर्ग के लोगों को शस्त्र लाइसेंस देने आदि की मांग की। ज्ञापन देने वालों ने डा. गौतम एडवोकेट, अमरजीत गौतम, योगेंद्र प्रसाद, जितेंद्र कुमार, रोशन, अमृतलाल भारती, विनय कुमार विश्वकर्मा, वंशी गौतम आदि उपस्थित रहे
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उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों को विशेष कानूनी संरक्षण हेतु संविधान में विशेष प्रावधान किए गए हैं। अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 उसी का एक हिस्सा है। किंतु अधिनियम को निष्प्रभावी बनाए जाने एवं कमजोर वर्गों पर बढ़ते अत्याचार के विरोध में दलित शोषित समाज के बुद्धिजीवी सामाजिक संगठनों कर्मचारी संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त तत्वाधान में दलित समाज के लोग 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति कराने हेतु शांतिपूर्वक देने जा रहे थे। किंतु पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कहर बरपाया गया। उनपर पर कई झूठे मुकदमे संगीन धाराओं में दर्ज कर जेल में बंद कर दिया गया । इस झूठे एवं फर्जी मुकदमों को तत्काल वापस लेकर लोगों को रिहा करने, 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान प्रशासनिक हिंसा में मरने वाले लोगों के परिवारों को एक व्यक्तियों को सरकारी नौकरी देने, हिंसा के दौरान मरने वालों के मृतक आश्रितों को एक करोड़ का मुआवजा देने, दलित वर्ग के लोगों को शस्त्र लाइसेंस देने आदि की मांग की। ज्ञापन देने वालों ने डा. गौतम एडवोकेट, अमरजीत गौतम, योगेंद्र प्रसाद, जितेंद्र कुमार, रोशन, अमृतलाल भारती, विनय कुमार विश्वकर्मा, वंशी गौतम आदि उपस्थित रहे
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