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धनुष टूटते ही श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा पंडाल
Updated Wed, 21 Nov 2018 11:48 PM IST
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सिरकोनी। क्षेत्र के हुंसेपुर गांव में राज राजेश्वरी महिला महाविद्यालय पर चल रहे रामलीला मंचन में मंगलवार की रात जब श्रीराम ने भगवान शिव को धनुष को तोड़ा तो राम के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा। रामचरितमानस में तुलसीदास ने लिखा है कि एक दिन माता सीता खेल-खेल में बाएं हाथ से धनुष उठा कर दाएं हाथ से चौका लगा दिया। जिस धनुष को बड़े-बड़े राजा महाराजा बाहुबली हिला नहीं पा रहे थे। सीता माता ने उसे एक हाथ से उठा लिया। यह देख कर के राजा जनक ने यह प्रण किया कि जो भी वीर इस धनुष को तोड़ेगा मैं उसी से सीता का विवाह करूंगा। राजा जनक ने यह प्रण करके स्वयंवर की घोषणा की। देश-देश के बलशाली राजा स्वयंवर में उपस्थित थे। लेकिन किसी ने धनुष तोड़ने की बात तो दूर उसको हिला तक नहीं सके। फिर विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम ने धनुष को तोड़ दिया और सीता जी से विवाह करके राजा जनक के प्रण को पूरा किया। धनुष तोड़ते समय लक्ष्मण ने अपने अंगूठे से दबाकर पृथ्वी को संभाले रखा। मथुरा से पधारे आचार्य कृष्ण जी महाराज के नेतृत्व में कलाकारों ने अपनी कला का जादू बिखेर कर दर्शकों का मन मोह लिया। इस मौके पर पूर्व आईएएस सदाकांत शुक्ला, रमाकांत शुक्ल, शिवाकांत शुक्ला एडवोकेट, बेचन यादव, संजय यादव, आशुतोष शुक्ला, मुन्ना गुरु, अनुराग शुक्ला, डा. बद्री प्रसाद यादव, लोकनाथ यादव, विकास यादव, पिंटू पाल आदि उपस्थित रहे।
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