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मेरे माथे की सिलवटों पर हिंदुस्तान लिख देना
Updated Sat, 10 Nov 2018 11:53 PM IST
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थानागद्दी। ‘मौला मेरे माथे की सिलवटों पर हिंदुस्तान लिख देना’ नज्म सुनाकर डा. बहादुर अली खान मिनाई ने देश भक्ति का जज्बा पैदा किया।
वे चंदवक क्षेत्र के भैंसा स्थित पूर्व प्रधानाचार्य मदन मोहन शुक्ल के आवास पर अक्षर आरसी साहित्य एवं जन सेवा समिति की ओर से आयोजित एक शाम सैनिकों के नाम कवि सम्मेलन में अपना कलाम सुना रहे थे।
मुख्य अतिथि पूर्व कनिष्ठ प्रमुख उमाशंकर सिंह ने दीप जलाया एवं पवन पांडेय की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। पवन जौनपुरी ने मौजूदा राजनीति पर तंज कसा तो रामधनी राय ने सुनाया ‘राजनीति में धर्म मुखौटा आड़ में अपराध पला’ सुनाया। संचालक डा. बहादुर ने नेताओ पर व्यंग करते हुए सुनाया अभी कल तक एक पतलों न थी छप्पर छाने के लिए आज उनकी हवेली आसमान छू रही है। सूबेदार पांडेय ने सीमा पर शहीद होने वीर जवानों को समर्पित कविता सुनाई। साहब लाल सहज ने आधुनिकता में बदलते समाज और अपसंस्कृति पर कटाक्ष किया। भोजपुरी गजल में बृजेश लहरी ने पारिवारिक समस्यओं को उकेरा बंजर जौनपुरी ने राजनेताओं पर कुछ यूं व्यंग कसा पगड़ी उतर गई सोनिया सुधर गई। राहुल हो गए फरार राजेश फौजी की कविता भारत का वासी हूं, माटी का कर्ज चुकाऊंगा तिरंगा कफ़न ओढ़कर मैं शहीद बन जाऊंगा खूब सराही गयी। मुन्ना घायल ने सरदार बल्लभ भाई पटेल की याद में कविता पढा गरीबों के वकील थे दुश्मनों के कील थे, खण्ड खण्ड भारत को अखण्ड बनाया आपने। उमाशंकर ने दंगा कर्फ्यू के बाद के सामाजिक परिदृश्य का अवलोकन कराया। अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल और संचालन डा. बहादुर अली खान मिनाई ने किया। कार्यक्रम में जगदीश पाठक, नरेंद्र पांडेय, राजेश शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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वे चंदवक क्षेत्र के भैंसा स्थित पूर्व प्रधानाचार्य मदन मोहन शुक्ल के आवास पर अक्षर आरसी साहित्य एवं जन सेवा समिति की ओर से आयोजित एक शाम सैनिकों के नाम कवि सम्मेलन में अपना कलाम सुना रहे थे।
मुख्य अतिथि पूर्व कनिष्ठ प्रमुख उमाशंकर सिंह ने दीप जलाया एवं पवन पांडेय की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। पवन जौनपुरी ने मौजूदा राजनीति पर तंज कसा तो रामधनी राय ने सुनाया ‘राजनीति में धर्म मुखौटा आड़ में अपराध पला’ सुनाया। संचालक डा. बहादुर ने नेताओ पर व्यंग करते हुए सुनाया अभी कल तक एक पतलों न थी छप्पर छाने के लिए आज उनकी हवेली आसमान छू रही है। सूबेदार पांडेय ने सीमा पर शहीद होने वीर जवानों को समर्पित कविता सुनाई। साहब लाल सहज ने आधुनिकता में बदलते समाज और अपसंस्कृति पर कटाक्ष किया। भोजपुरी गजल में बृजेश लहरी ने पारिवारिक समस्यओं को उकेरा बंजर जौनपुरी ने राजनेताओं पर कुछ यूं व्यंग कसा पगड़ी उतर गई सोनिया सुधर गई। राहुल हो गए फरार राजेश फौजी की कविता भारत का वासी हूं, माटी का कर्ज चुकाऊंगा तिरंगा कफ़न ओढ़कर मैं शहीद बन जाऊंगा खूब सराही गयी। मुन्ना घायल ने सरदार बल्लभ भाई पटेल की याद में कविता पढा गरीबों के वकील थे दुश्मनों के कील थे, खण्ड खण्ड भारत को अखण्ड बनाया आपने। उमाशंकर ने दंगा कर्फ्यू के बाद के सामाजिक परिदृश्य का अवलोकन कराया। अध्यक्षता मदन मोहन शुक्ल और संचालन डा. बहादुर अली खान मिनाई ने किया। कार्यक्रम में जगदीश पाठक, नरेंद्र पांडेय, राजेश शुक्ल आदि उपस्थित रहे।
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