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मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश की प्रतिमाएं जकारे के साथ विसर्जित
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:45 AM IST
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जौनपुर। लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाओं का गोमती नदी के किनारे बने कुंड में विसर्जन किया गया। शाम को सभी प्रतिमाएं अहियापुर में पहुंची। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी एवं पुलिस दिनेश पाल सिंह पूजन करके शोभायात्रा को रवाना किया।
शोभायात्रा सुतहट्टी बाजार, सब्जी मंडी, कोतवाली चौराहा, चहारसू चौराहा, शाही पुल, ओलंदगंज, कजगांव पड़ाव होते हुए नखास पहुंची। शोभायात्रा में प्रतिमाओं के अलावा आकर्षक झांकियां भी शामिल थीं। कोतवाली चौराहे पर नियंत्रण कक्ष में निर्णायक मंडल के सदस्य हरिद्वारी विश्वकर्मा एडवोकेट, जूही वर्मा, आकांक्षा द्विवेदी, सरदार मनमोहन सिंह, सत्य प्रकाश जायसवाल व अंजू पाठक ने झांकियों का मूल्यांकन किया। संरक्षक डा. राम नारायण सिंह, विजय सिंह, दीपक चिटकारिया, संयोजक जगदीश मौर्य गप्पू, शिक्षाविद् डा. ब्रजेश यदुवंशी, डा. संदीप पांडेय, रामजी जायसवाल, अध्यक्ष चंद्रशेखर निषाद बबलू, महासचिव लाल बहादुर यादव, डा. प्रशांत द्विवेदी, चन्द्रशेखर जायसवाल, गौरव सेठ ने व्यवस्था संभाली। वहीं विसर्जन घाट पर प्रभारी शिवचरन निषाद, बलराम निषाद, रोहित निषाद, दुर्गेश पाडेय व जनार्दन निषाद मुस्तैद रहे। वहीं दर्जन भर से अधिक स्वयंसेवी संगठनों द्वारा पूरे शोभायात्रा मार्ग पर स्टाल लगाकर मेलार्थियों की सेवा की गई।
शोभायात्रा सुतहट्टी बाजार, सब्जी मंडी, कोतवाली चौराहा, चहारसू चौराहा, शाही पुल, ओलंदगंज, कजगांव पड़ाव होते हुए नखास पहुंची। शोभायात्रा में प्रतिमाओं के अलावा आकर्षक झांकियां भी शामिल थीं। कोतवाली चौराहे पर नियंत्रण कक्ष में निर्णायक मंडल के सदस्य हरिद्वारी विश्वकर्मा एडवोकेट, जूही वर्मा, आकांक्षा द्विवेदी, सरदार मनमोहन सिंह, सत्य प्रकाश जायसवाल व अंजू पाठक ने झांकियों का मूल्यांकन किया। संरक्षक डा. राम नारायण सिंह, विजय सिंह, दीपक चिटकारिया, संयोजक जगदीश मौर्य गप्पू, शिक्षाविद् डा. ब्रजेश यदुवंशी, डा. संदीप पांडेय, रामजी जायसवाल, अध्यक्ष चंद्रशेखर निषाद बबलू, महासचिव लाल बहादुर यादव, डा. प्रशांत द्विवेदी, चन्द्रशेखर जायसवाल, गौरव सेठ ने व्यवस्था संभाली। वहीं विसर्जन घाट पर प्रभारी शिवचरन निषाद, बलराम निषाद, रोहित निषाद, दुर्गेश पाडेय व जनार्दन निषाद मुस्तैद रहे। वहीं दर्जन भर से अधिक स्वयंसेवी संगठनों द्वारा पूरे शोभायात्रा मार्ग पर स्टाल लगाकर मेलार्थियों की सेवा की गई।
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