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मनुष्य के लिए ही बना है सनातन धर्म
Updated Mon, 05 Nov 2018 01:00 AM IST
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जौनपुर। स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि अपने धर्म पर मर जाना श्रेष्ठ है। दूसरे के धर्म पर चलना हानिकारक होता है। पशु-पक्षियों के शरीर एवं से वस्तुएं जब मनुष्य के शरीर में जाएंगी तो उस पर पशुत्व का प्रभाव पड़ेगा। यह बात उन्होंने बरसठी विकास खंड के असवां रामपुर गांव के सिद्धनाथ बाबा सिद्धार्थाश्रम परिसर में प्रवचन से दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि धर्म खुद पर नियंत्रण की शिक्षा देता है। जहां धर्म के द्वारा नियंत्रण नहीं होगा, वहां उच्छृंखलता पैदा हो जाएगी। आतंकवाद का जन्म होगा। समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। जो संकुचित विचारधारा से घिरे हुए हैं,उनके लिए सनातन धर्म मात्र एक संप्रदाय है। किंतु सनातन धर्म संप्रदाय नहीं यह भगवान के संतानों के लिए, भगवान द्वारा चलाया धर्म है। वैदिक धर्म के संरक्षक भगवान ही हैं। प्रत्येक व्यक्ति को दूषित खानपान, दूषित विचारों से दूर रहना चाहिए तभी वह राष्ट्र, परिवार की सही सेवा कर पाएगा। हर व्यक्ति को चाहिए कि अपने प्राण और धन को खोकर भी आत्मा की रक्षा करे मगर इसकी कला सीखने के लिए सत्संग में आना पड़ेगा। आचार्य, गुरु और शास्त्र के अनुशासन का पालन नहीं करेंगे तो यह रहस्य समझ में आने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्म खुद पर नियंत्रण की शिक्षा देता है। जहां धर्म के द्वारा नियंत्रण नहीं होगा, वहां उच्छृंखलता पैदा हो जाएगी। आतंकवाद का जन्म होगा। समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। जो संकुचित विचारधारा से घिरे हुए हैं,उनके लिए सनातन धर्म मात्र एक संप्रदाय है। किंतु सनातन धर्म संप्रदाय नहीं यह भगवान के संतानों के लिए, भगवान द्वारा चलाया धर्म है। वैदिक धर्म के संरक्षक भगवान ही हैं। प्रत्येक व्यक्ति को दूषित खानपान, दूषित विचारों से दूर रहना चाहिए तभी वह राष्ट्र, परिवार की सही सेवा कर पाएगा। हर व्यक्ति को चाहिए कि अपने प्राण और धन को खोकर भी आत्मा की रक्षा करे मगर इसकी कला सीखने के लिए सत्संग में आना पड़ेगा। आचार्य, गुरु और शास्त्र के अनुशासन का पालन नहीं करेंगे तो यह रहस्य समझ में आने वाला नहीं है।
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