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परशुराम का क्रोध देख जनक दरबार में छाया सन्नाटा
Updated Fri, 02 Nov 2018 12:04 AM IST
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सिकरारा। क्षेत्र के जमालपुर गांव में चल रहे रामलीला मंचन के तीसरे दिन बुधवार की रात सीता स्वयंबर, परशुराम -लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। प्रभू राम द्वारा शिव का धनुष तोड़ते ही पूरा पंडाल राम के जयकारे से गूंज उठा। इसकी जानकारी जब परशुराम को हुई तब वे क्रोधित हो उठे। राजा जनक के दरबार में पहुंच कर शिव के धनुष को तोड़ने वाले को पुछने लगे। भगवान परशुराम का क्रोध देख जनक दरबार में छाया सन्नाट छा गया। गुस्से में आंखे लाल करते हुए परशुराम ने कहा की शिव धनुष तोड़ने की हिम्मत किसने की । इस पर वहां मौजूद राजा जनक ने भगवान परशुराम को बताया कि उन्होंने अपने पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रखा है। इसमें अयोध्या नरेश महाराज दशरथ के पुत्र राम ने यह धनुष तोड़ा है। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच शानदार संवाद की प्रस्तुति हुई, जो रामलीला परिसर में मौजूद दर्शकों को खूब पसंद आया । लीला की शुरुआत में विश्वामित्र भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को लेकर सीता स्वयंवर में जनकपुरी पहुंचते हैं । इसमें देश विदेश के कई राजाओं ने भाग लिया था, लेकिन उनमें से कोई भी भगवान शिव के धनुष को हिला तक नहीं पाए थे । यह देखकर राजा जनक को चिंता सताने लगी थी की उनकी बेटी सीता के लिए योग्य वर मिल पाएगा या नहीं । इसी बीच वहां मौजूद भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ने के लिए विश्वामित्र से आज्ञा मांगी। आज्ञा मिलने के बाद उन्होंने धनुष के नजदीक पहुंचकर पहले हाथ जोड़कर प्रणाम किया और धनुष को तोड़ दिया। परिसर भगवान राम के जयकारों से गूंज उठा ।इसके पहले सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व मुख्य अतिथि रतनसेन सिंह,विशिष्ट अतिथि पप्पू माली व डॉ भूपेश यादव द्वारा रामदरबार के समक्ष आरती पूजन कर रामलीला मंचन का शुभारभ कराया गया ।कार्यक्रम का संचालन रामकृष्ण यादव ने किया
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