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मोहन तेरी मुरली की कसम हम तो दीवाने बन बैठे: रामभद्राचार्य
Updated Sun, 28 Oct 2018 12:33 AM IST
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बरईपार/सुजंगजन। जगत गुरु स्वामी राम भद्राचार्य महाराज ने कपिलावतार एवं ध्रुव चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्त के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। भक्त स्मरण करता है तो भगवान नंगे पांव उसके पास पहुंच जाते हैं। मोहन तेरी मुरली की कसम हम तो दीवाने बन बैठे भजन सुनाया तो पूरा पंडाला तालियों से गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि मैं सबसे पहले इस धरती साडी खुर्द को प्रणाम करता हूं कि मैंने इस माटी में जन्म लिया। धन्य हैं मेरी माता जी गोलोकवासी शची देवी जिन्होंने मुझे जन्म दिया। मुझे भारत सरकार ने 2015 में पद्म विभूषण से संमानित किया था। आज आपके सामने वहीं पद्म विभूषण लगाया हुआ आप सभी को कितना हर्ष होगा। विद्या का नियम है कि पांडित्य को छोडकर विद्या के साथ में खेलो सभी भ्रम छोड दो की भगवान नहीं है। भगवान हमेशा विराजमान है। भगवान ही सब कुछ है। तीनों तापों का नाश करते हैं। भगवान को स्मरण और विस्मरण में कया अंतर है। जो भगवान को स्मरण करते हैं उन्हें कभी कष्ट नहीं देते हैं। हमेशा सतकर्म करो श्रीमद्भागवत कथा सुनना और श्रवण करना यही सतकर्म हैं। जगद्गगुरु ने अपने प्रसिद्ध लोकप्रिय भजनों को सुनाया। जैसे. मोहन तेरी मुरली की कसम, हम तो दीवाने बन बैठे। मानो या न मानो मन का मरम , हम तो जग के बेगाने बन बैठे। सुनाया तो श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कुछ संसमरण जगद्गगुरु ने अपने पूर्वाश्रम का भी बताया। मुख्य अतिथि के रूप में रमेश चंद मिश्र विधायक बदलापुर रहे। जगद्गगुरु के निजी सचिव जय मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया। अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भैया के साथ यूथ ब्रिगेड ने स्वामी जगतगुरु रामभद्राचार्य का स्वागत किया। कथा के आयोजक रमापति मिश्र ,चंदकांत मणि मिश्र , ओमप्रकाश मिश्र , विनय सिंह, शेषधर शुकला , विनोद उमर , आचार्य दिनेश जयोतिषी , अजय शंकर दुबे , डा. जय प्रकाश त्रिपाठी, गौरी शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि मैं सबसे पहले इस धरती साडी खुर्द को प्रणाम करता हूं कि मैंने इस माटी में जन्म लिया। धन्य हैं मेरी माता जी गोलोकवासी शची देवी जिन्होंने मुझे जन्म दिया। मुझे भारत सरकार ने 2015 में पद्म विभूषण से संमानित किया था। आज आपके सामने वहीं पद्म विभूषण लगाया हुआ आप सभी को कितना हर्ष होगा। विद्या का नियम है कि पांडित्य को छोडकर विद्या के साथ में खेलो सभी भ्रम छोड दो की भगवान नहीं है। भगवान हमेशा विराजमान है। भगवान ही सब कुछ है। तीनों तापों का नाश करते हैं। भगवान को स्मरण और विस्मरण में कया अंतर है। जो भगवान को स्मरण करते हैं उन्हें कभी कष्ट नहीं देते हैं। हमेशा सतकर्म करो श्रीमद्भागवत कथा सुनना और श्रवण करना यही सतकर्म हैं। जगद्गगुरु ने अपने प्रसिद्ध लोकप्रिय भजनों को सुनाया। जैसे. मोहन तेरी मुरली की कसम, हम तो दीवाने बन बैठे। मानो या न मानो मन का मरम , हम तो जग के बेगाने बन बैठे। सुनाया तो श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। कुछ संसमरण जगद्गगुरु ने अपने पूर्वाश्रम का भी बताया। मुख्य अतिथि के रूप में रमेश चंद मिश्र विधायक बदलापुर रहे। जगद्गगुरु के निजी सचिव जय मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया। अजय शंकर दुबे उर्फ अज्जू भैया के साथ यूथ ब्रिगेड ने स्वामी जगतगुरु रामभद्राचार्य का स्वागत किया। कथा के आयोजक रमापति मिश्र ,चंदकांत मणि मिश्र , ओमप्रकाश मिश्र , विनय सिंह, शेषधर शुकला , विनोद उमर , आचार्य दिनेश जयोतिषी , अजय शंकर दुबे , डा. जय प्रकाश त्रिपाठी, गौरी शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।
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