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दो लोगों में डेंगू के पाजीटिल लक्षण मिलने से हडकंप
Updated Thu, 25 Oct 2018 11:52 PM IST
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सिंगरामऊ। क्षेत्र के मेढ़ा गांव में बुखार से पीडित दो लोगों में डेंगू के पाजीटिव लक्षण मिलने से गांव में हड़कंप मच गया है। बुखार से पीड़ित अन्य लोग भी इस बात को लेकर सहमे हुए हैं कि कहीं वह भी डेंगू की चपेट में तो नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेखबर हैं। गांव में न तो दवा का छिड़काव कराया गया और न ही बुखार से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। एक का जिला मुख्यालय और दूसरे का लखनऊ में इलाज चल रहा है।
मेंढ़ा गांव में एक पखवारे से बाजार निवासी ओमप्रकाश जयसवाल (58) बुखार की चपेट में हैं। शाहगंज के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। वहीं संदीप उर्फ टिंटू बरनवाल (28) का इलाज जौनपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में हो रहा है। जबकि अतुल सिंह (25) को इलाज के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में कराया गया है। संदीप और अतुल सिंह के परिजनों ने बताया कि ब्लड की जांच के बाद डेंगू पाजीटिक आया है। सूरज सोनी (20) का जौनपुर के एक निजी अस्पताल से इलाज चल रहा है। गांव के आजाद निषाद (23) कई दिनों से बुखार से पीड़ित हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अभी तक गांव में नहीं पहुंचे। ब्लाक से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव में हडकंप मचा हुआ है। गांव वालों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य टीम गांव में पहुँचकर दवा का छिड़काव कर देती तो और लोग डेंगू के प्रकोप से बच जाते। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम दशकों से गांव में नहीं आई है। न ही ग्राम सभा की तरफ से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया है। जबकि प्रतिवर्ष दस हजार रुपये गांव सभा में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता कार्यों के लिए आता है।
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मेंढ़ा गांव में एक पखवारे से बाजार निवासी ओमप्रकाश जयसवाल (58) बुखार की चपेट में हैं। शाहगंज के एक प्राइवेट अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। वहीं संदीप उर्फ टिंटू बरनवाल (28) का इलाज जौनपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में हो रहा है। जबकि अतुल सिंह (25) को इलाज के लिए लखनऊ के एक अस्पताल में कराया गया है। संदीप और अतुल सिंह के परिजनों ने बताया कि ब्लड की जांच के बाद डेंगू पाजीटिक आया है। सूरज सोनी (20) का जौनपुर के एक निजी अस्पताल से इलाज चल रहा है। गांव के आजाद निषाद (23) कई दिनों से बुखार से पीड़ित हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अभी तक गांव में नहीं पहुंचे। ब्लाक से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव में हडकंप मचा हुआ है। गांव वालों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य टीम गांव में पहुँचकर दवा का छिड़काव कर देती तो और लोग डेंगू के प्रकोप से बच जाते। आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम दशकों से गांव में नहीं आई है। न ही ग्राम सभा की तरफ से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया है। जबकि प्रतिवर्ष दस हजार रुपये गांव सभा में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता कार्यों के लिए आता है।
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