{"_id":"5bc77c39bdec22696720d3ed","slug":"15398000904-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक भी विसर्जन कुंड में नहीं लगा है सिंथेटिक लेयर...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक भी विसर्जन कुंड में नहीं लगा है सिंथेटिक लेयर...
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। न्यायालय व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों को ताख पर रखकर जिले में मांग दुर्गा की मूर्ति विसर्जित करने के लिए विर्सजन कुंड बनाए गए है। जिले में एक भी विसर्जन कुंड में सिंथेटिक लेयर का प्रयोग नहीं किया गया है। शहर क्षेत्र की मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए गोमती नदी के किनारे विसर्जन घाट पर कुंड बनाया गया है। जिसमें न तो लेयर का प्रयोग किया गया है और न ही केमीकल युक्त पानी के निस्तारण की व्यवस्था की गई है। जिले में कुल 1465 मांग दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इनको विसर्जित करने के लिए कुल नौ कुंड बनाए गए हैं।
मूर्तियों के केमीकल पानी में अवशोषित न हो और नदियों का पानी गंदा न हो। इसके मद्दे नजर न्यायालय व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नदियों में मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का फरमान जारी किया गया है। इसके लिए नदियों के किनारे कुंड बनाकर उसमें सिंथेटिक लेयर लगाने और चूने का छिड़काव करने सहित 48 घंटे बाद लेयर को हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके क्रम में शारदीय नवरात्र में स्थापित मां दूर्गा की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए नदीयों व नहरों के किनारे कुंड बनाया गया है। बतादें कि जिले में मां दुुर्गा की 1465 प्रतिमाएं स्थापित हैं। जिसमें श्री मां दुर्गा पूजा महा समिति द्वारा 563 और अन्य समितियों द्वारा 902 मां दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए कुल नौ विसर्जन कुंड बनाए गए है। लेकिन इन कुंड में मानकों की अनदेखी की गई है। एक भी विर्सजन कुंड में सिंथेटिक लेयर नहीं लगाया गया है। केमिकल युक्त पानी के निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हलांकि चूना डालने और सफाई करने का कार्य किया गया है। लेकिन अभी तक वैरिकेटिंग भी नहीं की गई है।
जौनपुर। शहर क्षेत्र में गोमती नदी के गोपीघाट पर मूर्तियां विसर्जित होंगी। इसी क्रम में सई नदी पर रामदयालगंज ्िथत रामजानकी मंदिर के पास,गोमती नदी पर जफराबाद स्थित बजरंगबली मंदिर केङ पासज, गोमतीस्त्रत्त् नदी पर कोहड़े सुल्तानपुर में, गोमती नदी के अखड़ो घाट पर, गोमती नदी पर थाना गद्दी रोड पर व गोमती नदी पर पिलकिछा घाट पर विसर्जन कुंड बनाया गया है। इसके अलावा तालाब व पोखरे में भी मूर्तियां विसर्जित की जाएंगी।
विज्ञापन
जौनपुर। जिले में एक भी इको फ्रेंडली की मूर्तियां स्थापित नहीं हैं। सभी मूर्तियां केमिकल युक्त ही लगी है। मूर्तियों को जिस पेंट से रंगा जाता है। उसमें खतरनाक केमिकल निहित होता है। जिससे पानी दूषित होता है। साथ ही बीमारियां भी फैलती है। इको फ्रेंडली स्थापित करने की कोई पहल अभी तक नहीं हुई है।
कुंड में सिंथेटिक लेयर लगाने के लिए जिला प्रशासन से कहा गया तो उन्होंने कहा कि पालीथिन पर प्रतिबंध होने के कारण सिर्जन कुंडो में सिंथेटिक लेयर नहीं लगाया गया है। जिसके कारण जिले के एक भी कुंड में सिंथेटिक लेयर नहीं लगा है। एक भी मूर्तियां इको फ्रेंडली नहीं स्थापित हैं। अगले बार से इको फ्रेंडली मूर्तियां स्थापित करने का विचार बनाया गया है।
मोती लाल यादव
अध्यक्ष, श्री दुर्गा पूजा महा समिति
विज्ञापन
मूर्तियों के केमीकल पानी में अवशोषित न हो और नदियों का पानी गंदा न हो। इसके मद्दे नजर न्यायालय व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नदियों में मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का फरमान जारी किया गया है। इसके लिए नदियों के किनारे कुंड बनाकर उसमें सिंथेटिक लेयर लगाने और चूने का छिड़काव करने सहित 48 घंटे बाद लेयर को हटाने का निर्देश दिया गया है। इसके क्रम में शारदीय नवरात्र में स्थापित मां दूर्गा की प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए नदीयों व नहरों के किनारे कुंड बनाया गया है। बतादें कि जिले में मां दुुर्गा की 1465 प्रतिमाएं स्थापित हैं। जिसमें श्री मां दुर्गा पूजा महा समिति द्वारा 563 और अन्य समितियों द्वारा 902 मां दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए कुल नौ विसर्जन कुंड बनाए गए है। लेकिन इन कुंड में मानकों की अनदेखी की गई है। एक भी विर्सजन कुंड में सिंथेटिक लेयर नहीं लगाया गया है। केमिकल युक्त पानी के निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हलांकि चूना डालने और सफाई करने का कार्य किया गया है। लेकिन अभी तक वैरिकेटिंग भी नहीं की गई है।
विज्ञापन
जौनपुर। शहर क्षेत्र में गोमती नदी के गोपीघाट पर मूर्तियां विसर्जित होंगी। इसी क्रम में सई नदी पर रामदयालगंज ्िथत रामजानकी मंदिर के पास,गोमती नदी पर जफराबाद स्थित बजरंगबली मंदिर केङ पासज, गोमतीस्त्रत्त् नदी पर कोहड़े सुल्तानपुर में, गोमती नदी के अखड़ो घाट पर, गोमती नदी पर थाना गद्दी रोड पर व गोमती नदी पर पिलकिछा घाट पर विसर्जन कुंड बनाया गया है। इसके अलावा तालाब व पोखरे में भी मूर्तियां विसर्जित की जाएंगी।
विज्ञापन
जौनपुर। जिले में एक भी इको फ्रेंडली की मूर्तियां स्थापित नहीं हैं। सभी मूर्तियां केमिकल युक्त ही लगी है। मूर्तियों को जिस पेंट से रंगा जाता है। उसमें खतरनाक केमिकल निहित होता है। जिससे पानी दूषित होता है। साथ ही बीमारियां भी फैलती है। इको फ्रेंडली स्थापित करने की कोई पहल अभी तक नहीं हुई है।
कुंड में सिंथेटिक लेयर लगाने के लिए जिला प्रशासन से कहा गया तो उन्होंने कहा कि पालीथिन पर प्रतिबंध होने के कारण सिर्जन कुंडो में सिंथेटिक लेयर नहीं लगाया गया है। जिसके कारण जिले के एक भी कुंड में सिंथेटिक लेयर नहीं लगा है। एक भी मूर्तियां इको फ्रेंडली नहीं स्थापित हैं। अगले बार से इको फ्रेंडली मूर्तियां स्थापित करने का विचार बनाया गया है।
मोती लाल यादव
अध्यक्ष, श्री दुर्गा पूजा महा समिति