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2.17 लाख जाबकार्ड बनवाए,लेकिन नहीं मांगते काम
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:29 AM IST
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जौनपुर। जिले में मात्र 78 हजार मनरेगा के जॉब कार्ड धारक काम करते हैं। शेष दो लाख 17 हजार जॉब कार्ड धारकों द्वारा काम नहीं मांगा जाता है। इसका कारण मजदूरी कम मिलना है। रोजमर्रा के काम में इस समय 250 से 300 रुपये तक मजदूरी मिल रही है जबकि मनरेगा में 175 रुपये रोजाना दिहाड़ी है। इसके चलते मजदूरों ने जॉब कार्ड तो बनवा लिए हैं लेकिन अधिकांश दूसरे स्थानों पर जाकर काम कर रहे हैं।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने के इच्छुक लोगों को काम देने का कार्य किया जाता है। इसके लिए ऐसे लोगों का पहले जाबकार्ड बनाया जाता है। इसके बाद गांव व उसके आस-पास होने वाले सरकारी कामों में उनसे काम कराया जाता है। जिसके क्रम में जिले में कुल दो लाख 95 हजार जाबकार्ड धारक हैं। जिन्होंने काम करने के लिए जाबर्काड बनावाया है। जिसमें से विभाग द्वारा एक लाख 60 हजार जाबकार्ड धारकों को सक्रिय कार्ड धारक के रुप में चिंहित किया है। लेकिन मात्र 78 हजार कार्ड धारक ही काम मांगते हैं। जबकि दो लाख 17 हजार जॉब कार्ड धारक न तो काम की मांग करते हैं और न ही उनको काम दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो जाबकार्ड धारक जाबकार्ड बनवाकर दूसरे प्रदेशों सहित अन्य स्थानों पर काम कर रहे हैं। जिसके कारण जाबकार्ड धारक काम नहीं मांगते हैं।
मनरेगा काम की मांग आधारित योजना है, जो जाबकार्ड धारक काम मांगते हैं। उनको काम दिया जाता है। मजदूरी कम होने के कारण जांबकार्ड धारक काम नहीं मांगने आ रहे हैं। मात्र 78 हजार जाबकार्ड धारक काम मांगने आते हैं। जिनको काम दिया जाता है।
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कमलेश कुमार सोनी
उपायुक्त मनरेगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने के इच्छुक लोगों को काम देने का कार्य किया जाता है। इसके लिए ऐसे लोगों का पहले जाबकार्ड बनाया जाता है। इसके बाद गांव व उसके आस-पास होने वाले सरकारी कामों में उनसे काम कराया जाता है। जिसके क्रम में जिले में कुल दो लाख 95 हजार जाबकार्ड धारक हैं। जिन्होंने काम करने के लिए जाबर्काड बनावाया है। जिसमें से विभाग द्वारा एक लाख 60 हजार जाबकार्ड धारकों को सक्रिय कार्ड धारक के रुप में चिंहित किया है। लेकिन मात्र 78 हजार कार्ड धारक ही काम मांगते हैं। जबकि दो लाख 17 हजार जॉब कार्ड धारक न तो काम की मांग करते हैं और न ही उनको काम दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो जाबकार्ड धारक जाबकार्ड बनवाकर दूसरे प्रदेशों सहित अन्य स्थानों पर काम कर रहे हैं। जिसके कारण जाबकार्ड धारक काम नहीं मांगते हैं।
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मनरेगा काम की मांग आधारित योजना है, जो जाबकार्ड धारक काम मांगते हैं। उनको काम दिया जाता है। मजदूरी कम होने के कारण जांबकार्ड धारक काम नहीं मांगने आ रहे हैं। मात्र 78 हजार जाबकार्ड धारक काम मांगने आते हैं। जिनको काम दिया जाता है।
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कमलेश कुमार सोनी
उपायुक्त मनरेगा