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भगवान राम का जन्म होते ही अयोध्याम में गूंजा मंगल गीत
Updated Tue, 09 Oct 2018 12:12 AM IST
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सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के गुड़ाही रामलीला मंच पर तीसरे दिन राम जन्म व जानकी जन्म लीला का कलाकारों ने मंचन किया। प्रस्तुत प्रसंग में रघुवंशी राजा दशरथ के यहां रामलला, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न का जन्म होते ही पूरी अयोध्या मंगल गीतों से गुंजयमान हो उठा। चारों भाइयों का जन्म दृश्य देखकर दर्शकों ने पुष्प वर्षा की। उनके द्वारा लगाएं गए प्रभु के जयकारों से लीला परिसर गूंज उठा।
प्रभु श्रीराम चतुर्भुज रूप में पैदा होने पर मां कौशल्या घबरा गई थी। मां ने प्रभु से प्रार्थना किया कि वे बाल्यावस्था रूप दिखाएं। उधर, जनकपुरी में अकाल पड़ने पर प्रजा त्राहिमाम- त्राहिमाम कर रही थी। प्रजा व धर्मनिष्ठ राजा जनक प्रजा के इस दु:ख को देखकर चिंतित होने लगे। ऋषियों तथा ज्योतिषियों ने बताया कि जब राजा अपने हाथों से हल चलाएंगे, तभी बारिश होगी। राजा जनक ने हर चलाने लगे। तभी उनका हल खेत में एक घड़े से टकरा गया। उसी घड़े से एक कन्या का जन्म हुआ। जो आगे चलकर मां सीता कहलाई। भगवान शिवजी प्रभु श्रीराम को देखने साधु वेश में आएं थे। यह दृश्य देखकर रामभक्त भोलेनाथ की भक्ति में लीन हो गए। विष्णु के रूप में दीपक गुप्त, कौशल्या के रूप में शिवम श्रीवास्तव, कैकेई के रूप में चंदन कसेरा, सुमित्रा के रूप विष्णु, दशरथ का किरदार दिनेश कुमार गुप्त और शंकर के रूप देवी प्रसाद गुप्त ने भूमिका निभाई। निदेशक लाल बहादुर सिंह के संरक्षण में कलाकारों द्वारा बेहतर प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। संचालन राजीव गुप्त ने किया। समिति के अध्यक्ष पशुपति नाथ मुन्ना ने व्यवस्था में सहयोग किया।
प्रभु श्रीराम चतुर्भुज रूप में पैदा होने पर मां कौशल्या घबरा गई थी। मां ने प्रभु से प्रार्थना किया कि वे बाल्यावस्था रूप दिखाएं। उधर, जनकपुरी में अकाल पड़ने पर प्रजा त्राहिमाम- त्राहिमाम कर रही थी। प्रजा व धर्मनिष्ठ राजा जनक प्रजा के इस दु:ख को देखकर चिंतित होने लगे। ऋषियों तथा ज्योतिषियों ने बताया कि जब राजा अपने हाथों से हल चलाएंगे, तभी बारिश होगी। राजा जनक ने हर चलाने लगे। तभी उनका हल खेत में एक घड़े से टकरा गया। उसी घड़े से एक कन्या का जन्म हुआ। जो आगे चलकर मां सीता कहलाई। भगवान शिवजी प्रभु श्रीराम को देखने साधु वेश में आएं थे। यह दृश्य देखकर रामभक्त भोलेनाथ की भक्ति में लीन हो गए। विष्णु के रूप में दीपक गुप्त, कौशल्या के रूप में शिवम श्रीवास्तव, कैकेई के रूप में चंदन कसेरा, सुमित्रा के रूप विष्णु, दशरथ का किरदार दिनेश कुमार गुप्त और शंकर के रूप देवी प्रसाद गुप्त ने भूमिका निभाई। निदेशक लाल बहादुर सिंह के संरक्षण में कलाकारों द्वारा बेहतर प्रदर्शन दिखाया जा रहा है। संचालन राजीव गुप्त ने किया। समिति के अध्यक्ष पशुपति नाथ मुन्ना ने व्यवस्था में सहयोग किया।
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