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डीएम के निर्देश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण
Updated Wed, 03 Oct 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। शाही पुल पर बने ऐतिहासिक शेर की प्रतिमा के पास तीन माह बाद भी अतिक्रमण नहीं हट सका है। जबकि डीएम ने अतिक्रमण हटाए जाने का आदेश दिया था। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी वाराणसी ने भी डीएम को पत्र लिखकर अतिक्रमण के संबंध में अवगत करा चुका है।
25 जुलाई को स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने डीएम को मौके पर ले जाकर शाही पुल स्थित शेर की प्रतिमा के आसपास अतिक्रमण को दिखलाया था। जहां डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन को अतिक्रमण हटाए जाने का निर्देश दिया था। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष चंद्र यादव ने भी 14 अगस्त को डीएम को पत्र भेजा। जिसमें लिखा कि पत्थर का शेर और शाही पुल 3 मई 1967 और 31 जनवरी 1978 के पुरातत्व विभाग द्वारा राज्य संरक्षित घोषित है। इसके रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई थी। वर्ष 2000 में पुल पर बनी गुमटियों में अवैध रूप से काबिज दुकानदारों के विरूद्घ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा गया था। पुल के छोर पर निर्मित हाथी व शेर का रखरखाव राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाता है। इसके आसपास के दुकानों के आवंटन व मालिकाना हक पुरातत्व सर्वेक्षण का ही है। कालांतर में किंही कारणों से दुुकानदारों ने बिना शुल्क अदा किए अतिक्रमण कर लिए हैं। ऐसे में राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। जिससे इस महत्वपूर्ण स्मारक शाही पुल, पत्थर का शेर एवं हाथी प्रतिमा की सुरक्षा एवं सौंदर्यीकरण सुगमता से किया जा सके।
गोमती आरती स्थल पर जाने का है रास्ता
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान गोपी घाट पर गोमती आरती आयोजित कर रहा है। यहां आने जाने का रास्ता भी शेर की तरफ से ही है। लेकिन अतिक्रमण के चलते रास्ता सिकुड़ गया है। इसे जिले की प्रभारी मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी, नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव, डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी भी मौके पर जाकर देख चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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बैठक कर जताई नाराजगी
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के कार्यकर्ताओं ने रासमंडल कार्यालय पर बैठक कर नाराजगी जताई है। अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने कहा कि कालांतर में किसी समय शाही के शेर प्रतिमा के बगल में बनी दुकानों को किराए पर दिया गया था। लेकिन लंबे समय बाद भी किसी दुुकानदार ने नवीनीकरण नहीं कराया और रास्ते पर कब्जा कर लिया है। जिसे शीघ्र हटाया जाना आवश्यक है। इस मौके पर बृजेश मौर्य, राजेंद्र विश्वकर्मा, मनोज तिवारी, अंकित गुप्ता, चंदन निषाद, बलराम निषाद, डा. कमलेश, अंकित सिंह, अंजू पाठक, उदय यादव मौजूद रहे।
25 जुलाई को स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने डीएम को मौके पर ले जाकर शाही पुल स्थित शेर की प्रतिमा के आसपास अतिक्रमण को दिखलाया था। जहां डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन को अतिक्रमण हटाए जाने का निर्देश दिया था। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष चंद्र यादव ने भी 14 अगस्त को डीएम को पत्र भेजा। जिसमें लिखा कि पत्थर का शेर और शाही पुल 3 मई 1967 और 31 जनवरी 1978 के पुरातत्व विभाग द्वारा राज्य संरक्षित घोषित है। इसके रखरखाव और सुरक्षा की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई थी। वर्ष 2000 में पुल पर बनी गुमटियों में अवैध रूप से काबिज दुकानदारों के विरूद्घ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखा गया था। पुल के छोर पर निर्मित हाथी व शेर का रखरखाव राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाता है। इसके आसपास के दुकानों के आवंटन व मालिकाना हक पुरातत्व सर्वेक्षण का ही है। कालांतर में किंही कारणों से दुुकानदारों ने बिना शुल्क अदा किए अतिक्रमण कर लिए हैं। ऐसे में राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। जिससे इस महत्वपूर्ण स्मारक शाही पुल, पत्थर का शेर एवं हाथी प्रतिमा की सुरक्षा एवं सौंदर्यीकरण सुगमता से किया जा सके।
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गोमती आरती स्थल पर जाने का है रास्ता
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान गोपी घाट पर गोमती आरती आयोजित कर रहा है। यहां आने जाने का रास्ता भी शेर की तरफ से ही है। लेकिन अतिक्रमण के चलते रास्ता सिकुड़ गया है। इसे जिले की प्रभारी मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी, नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव, डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी भी मौके पर जाकर देख चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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बैठक कर जताई नाराजगी
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के कार्यकर्ताओं ने रासमंडल कार्यालय पर बैठक कर नाराजगी जताई है। अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने कहा कि कालांतर में किसी समय शाही के शेर प्रतिमा के बगल में बनी दुकानों को किराए पर दिया गया था। लेकिन लंबे समय बाद भी किसी दुुकानदार ने नवीनीकरण नहीं कराया और रास्ते पर कब्जा कर लिया है। जिसे शीघ्र हटाया जाना आवश्यक है। इस मौके पर बृजेश मौर्य, राजेंद्र विश्वकर्मा, मनोज तिवारी, अंकित गुप्ता, चंदन निषाद, बलराम निषाद, डा. कमलेश, अंकित सिंह, अंजू पाठक, उदय यादव मौजूद रहे।