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जुल्म करने वाला खुद को मुसलमान नहीं कहला सकता
Updated Mon, 17 Sep 2018 12:04 AM IST
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जौनपुर। नगर के बलुआघाट स्थित जीशान हैदर के यहां इमामबाड़ा में पांचवीं मोहर्रम पर आयोजित मजलिस में इमाम एसएम मासूम ने कहा कि किसी पर जुल्म करने वाला खुद को मुसलमान नहीं कहला सकता।
इमाम हुसैन ने कर्बला में शहादत देकर बता दिया कि जुल्म इस्लाम का हिस्सा नहीं है। इमाम हुसैन का किरदार यह था कि जब मक्का से कूफ़े के सफर के वक़्त दुश्मन ने उन्हें घेरा तो उन्होंने देखा कि दुश्मन के फौजी इतने प्यासे हैं कि जंग करने के क़ाबिल भी नहीं हैं। ऐसे में हुसैन चाहते तो हमला कर देते, लेकिन कमजोर पर हमला करना इस्लाम नहीं है। इसलिए हुसैन ने दुश्मन के फौजियों को पानी पिलाया और यहां तक कि उनके प्यासे घोड़ों को भी पानी पिलाया। उसी हुसैन को कर्बला में तीन दिन का प्यासा शहीद किया गया यहां तक की इमाम हुसैन के 6 महीने के बच्चे अली असगर को भी पानी ना दिया और प्यासा तीरों से शहीद कर दिया। अली असगर की शहादत को जब बयान किया तो सारे लोग आंसूओं और आवाज के साथ रो पड़े और नौहा मातम करने लगे। मजलिस के बाद इसे बड़े इमाम के इमामबाड़े से ऐतिहासिक जुलूस ए अजादारी निकला जिसमें अलम हजरत अब्बास, तुर्बत के साथ साथ अंजुमनें नौहा मातम करती रही।
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इमाम हुसैन ने कर्बला में शहादत देकर बता दिया कि जुल्म इस्लाम का हिस्सा नहीं है। इमाम हुसैन का किरदार यह था कि जब मक्का से कूफ़े के सफर के वक़्त दुश्मन ने उन्हें घेरा तो उन्होंने देखा कि दुश्मन के फौजी इतने प्यासे हैं कि जंग करने के क़ाबिल भी नहीं हैं। ऐसे में हुसैन चाहते तो हमला कर देते, लेकिन कमजोर पर हमला करना इस्लाम नहीं है। इसलिए हुसैन ने दुश्मन के फौजियों को पानी पिलाया और यहां तक कि उनके प्यासे घोड़ों को भी पानी पिलाया। उसी हुसैन को कर्बला में तीन दिन का प्यासा शहीद किया गया यहां तक की इमाम हुसैन के 6 महीने के बच्चे अली असगर को भी पानी ना दिया और प्यासा तीरों से शहीद कर दिया। अली असगर की शहादत को जब बयान किया तो सारे लोग आंसूओं और आवाज के साथ रो पड़े और नौहा मातम करने लगे। मजलिस के बाद इसे बड़े इमाम के इमामबाड़े से ऐतिहासिक जुलूस ए अजादारी निकला जिसमें अलम हजरत अब्बास, तुर्बत के साथ साथ अंजुमनें नौहा मातम करती रही।
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