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जनपद की पहचान बनती जा रही है गोमती आरती- गौतम
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान द्वारा संस्था के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर विजयनाथ मिश्र के मार्गदर्शन व नेतृत्व में शहर के बीच ऐतिहासिक शाही पुल के समीप स्थित गोपी घाट पर काशी के गंगा आरती की तजऱ् पर प्रतिदिन शाम को सात बजे से होने वाली गोमती आरती अब धीरे- धीरे जौनपुर जनपद के पर्यटन व आध्यात्मक का केंद्र बनती जा रही है। उक्त बातें अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने शनिवार को कही।
उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में दिनों दिन आमजनमानस की सहभागिता व उपस्थिति बढ़ती जा रही है। शाम 6 बजे से ही घाट पर भक्तों का आना शुरू हो जाता है। समाज के सभी वर्गों ने इस कार्यक्रम में अपनी खास रुचि दिखाई है। शाम होते ही घण्टा, घडिय़ाल, शंख व डमरू की ध्वनि बरबस ही आम व्यक्ति को इस कार्यक्रम तक खींच लाती है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जौनपुर के आम जनमानस को माँ गोमती के पवित्र तट पर आमंत्रित कर गोमती नदी के बढ़ते प्रदूषण, गन्दे नाले, नदी के किनारे खुले में शौच व गोमती नदी के संरक्षण के प्रति जागरूक करना व जौनपुर के पर्यटन व सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम को सम्पादित कराए जाने में स्थानीय घाट समिति के समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। ताकि राष्ट्रीय पटल पर जौनपुर अपनी प्राणात्मा माँ गोमती के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बना सके।
उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में दिनों दिन आमजनमानस की सहभागिता व उपस्थिति बढ़ती जा रही है। शाम 6 बजे से ही घाट पर भक्तों का आना शुरू हो जाता है। समाज के सभी वर्गों ने इस कार्यक्रम में अपनी खास रुचि दिखाई है। शाम होते ही घण्टा, घडिय़ाल, शंख व डमरू की ध्वनि बरबस ही आम व्यक्ति को इस कार्यक्रम तक खींच लाती है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जौनपुर के आम जनमानस को माँ गोमती के पवित्र तट पर आमंत्रित कर गोमती नदी के बढ़ते प्रदूषण, गन्दे नाले, नदी के किनारे खुले में शौच व गोमती नदी के संरक्षण के प्रति जागरूक करना व जौनपुर के पर्यटन व सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम को सम्पादित कराए जाने में स्थानीय घाट समिति के समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। ताकि राष्ट्रीय पटल पर जौनपुर अपनी प्राणात्मा माँ गोमती के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बना सके।
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