{"_id":"5b5cb7474f1c1bb15c8b503a","slug":"15328028824-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनएमसी बिल पारित नहीं होने की आवाज बुलंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनएमसी बिल पारित नहीं होने की आवाज बुलंद
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:16 AM IST
विज्ञापन
ज्ञापन देते डाक्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। नेशनल मेडिकल कौंसिल बिल 2018 के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बैनर तले शनिवार को सभी चिकित्सकों ने कार्य बहिष्कार किया। कहा गया कि यदि सरकार विधेयक वापस नहीं लेती तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। आईएमए भवन लाइन बाजार में हुई बैठक में सदस्यों ने एनएमसी बिल पर अपने विचार प्रकट किए। आईएमए के सदस्यों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। चिकित्सकों द्वारा ओपीडी ऑपरेशन एवं इमरजेंसी कार्यों को नहीं किए जाने से मरीजों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ा। उनको बिना इलज कराए ही वापस लौटना पड़ा।
कार्यकारी अध्यक्ष डा. विनोद कुमार सिंह ने इस बिल का विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यदि बिल पारित हुआ तो देशभर में चिकित्सक आईएमए के बैनर तले आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। सचिव आईएमए डा.एए जाफ़री ने कहा की आईएमए के विरोध के बावजूद इन एनएमसी बिल में जो बदलाव किए गए हैं। वह अभी भी गरीब व संघीय विरोधी और अमीरों को रास आने वाले है। जिसके कारण आने वाले समय में चिकित्सा की गुणवत्ता खराब होने वाली एवं चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई महंगी होने वाली है। इसका विरोध आईएमए शुरू से कर रहा है। इस बिल के पास होने के बाद प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा अधिक महंगी हो जाएगी। इसके कारण गरीब चिकित्सा सुविधा से महरूम रह जाएंगे। पिछड़े व ग़रीब वर्ग के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन पिछली नीट परीक्षा में अच्छा नहीं रहा था। इस बिल के पारित होने के बाद एग्जिट एग्जाम की व्यवस्था लागू हो जाएगी। जिसके कारण पिछड़े व गरीब वर्ग के छात्रों को और असुविधा होगी।वे अपने राज्यों के चिकित्सा काउंसिल में पंजीकृत होने से रह जाएंगे और एमबीबीएस करने के बाद भी चिकित्सा सेवा नहीं दे पाएंगे। जिससे देश में चिकित्सकों की और कमी हो जाएगी। बैठक में डा. अजीत कपूर, डा. तेज सिंह,डा. बीपी सिंह, मेजर एके मौर्या, डा.बीके यादव,डा. उत्तम गुप्ता, डा. एसएन वर्मा,डा. संजय सिंह, डा. विनय तिवारी, डा. इम्तियाज, डा. रहमान, डा.विकास सिंह, डा. मनमोहन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कार्यकारी अध्यक्ष डा. विनोद कुमार सिंह ने इस बिल का विरोध करते हुए चेतावनी दी कि यदि बिल पारित हुआ तो देशभर में चिकित्सक आईएमए के बैनर तले आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। सचिव आईएमए डा.एए जाफ़री ने कहा की आईएमए के विरोध के बावजूद इन एनएमसी बिल में जो बदलाव किए गए हैं। वह अभी भी गरीब व संघीय विरोधी और अमीरों को रास आने वाले है। जिसके कारण आने वाले समय में चिकित्सा की गुणवत्ता खराब होने वाली एवं चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई महंगी होने वाली है। इसका विरोध आईएमए शुरू से कर रहा है। इस बिल के पास होने के बाद प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा अधिक महंगी हो जाएगी। इसके कारण गरीब चिकित्सा सुविधा से महरूम रह जाएंगे। पिछड़े व ग़रीब वर्ग के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन पिछली नीट परीक्षा में अच्छा नहीं रहा था। इस बिल के पारित होने के बाद एग्जिट एग्जाम की व्यवस्था लागू हो जाएगी। जिसके कारण पिछड़े व गरीब वर्ग के छात्रों को और असुविधा होगी।वे अपने राज्यों के चिकित्सा काउंसिल में पंजीकृत होने से रह जाएंगे और एमबीबीएस करने के बाद भी चिकित्सा सेवा नहीं दे पाएंगे। जिससे देश में चिकित्सकों की और कमी हो जाएगी। बैठक में डा. अजीत कपूर, डा. तेज सिंह,डा. बीपी सिंह, मेजर एके मौर्या, डा.बीके यादव,डा. उत्तम गुप्ता, डा. एसएन वर्मा,डा. संजय सिंह, डा. विनय तिवारी, डा. इम्तियाज, डा. रहमान, डा.विकास सिंह, डा. मनमोहन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन