{"_id":"5b479a8c4f1c1bbd248b600f","slug":"15314192731311-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे 11 जूनियर हाई स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे 11 जूनियर हाई स्कूल
Updated Fri, 13 Jul 2018 12:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। ग्यारह जूनियर हाईस्कूल और उसमें पढ़ाई कर रहे 623 छात्रों की तालीम की जिम्मेदारी सिर्फ दो शिक्षकों पर है। बात हैरान करने वाली है पर जिले में शिक्षा व्यवस्था की यही हकीकत है। करीब तीन लाख की आबादी वाले जौनपुर शहर क्षेत्र में 11 जूनियर हाईस्कूल और 35 प्राथमिक विद्यवालय हैं। 11 जूनियर हाईस्कूलों में कुल 623 छात्रों का पंजीकरण हुआ है, लेकिन इन बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ दो शिक्षक तैनात हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित इन विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और यहां पढ़ाई करने वाले नौनिहालों का भविष्य कैसा होगा। यही हाल शहरी इलाके के प्राथमिक विद्यालयों का भी है। 35 प्राथमिक विद्यालयों में 37 शिक्षक तैनात हैं ।
जिले में कुल 2416 प्राथमिक और 878 जूनियर विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में 3.81 लाख 222 छात्र पंजीकृत हैं। इन बच्चों की तालीम की जिम्मेदारी 9 हजार शिक्षकों पर है। प्रति माह करीब 40 करोड़ से अधिक का बजट शिक्षकों की तनख्वाह पर ही खर्च होता है। इसके अलावा एमडीएम, ड्रेस, बैग आदि पर भी हर साल करोड़ों का बजट खर्च किया जाता है। बावजूद इसके नगर क्षेत्र में स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों की दशा बदतर हो चुकी है। पूरे जिले में जूनियर और प्राथमिक के कुल 2994 विद्यालयों में 9000 शिक्षक तैनात हैं। शिक्षकों का औसत देखा जाय तो सभी विद्यालयों पर दो से अधिक शिक्षकों की तैनाती हो सकती है। लेकिन परिषदीय विद्यालयों में ग्रामीण और शहरी विद्यालयों का अलग अलग संवर्ग होने के नाते अफसर भी बेबस हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह कहते हैं कि शहर के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के बारे में शासन को हर साल अवगत कराया जाता है। लेकिन नए शिक्षकों की तैनाती न होने के चलते जैसे जैसे शिक्षक रिटायर्ड हो रहे हैं वेैसे वैसे शिक्षकों की कमी बढ़ती जा रही है।
एक भवन में संचालति हो रहे दो विद्यालय
जौनपुर। भवन और शिक्षकों की कमी को देखते हुए इस साल से कुछ विद्यालयों को एक दूसरे के साथ मर्ज करते हुए एक ही भवन में कर दिया गया है। प्राथमिक विद्यालय ओलंदगंज को यहां से करीब दो किलोमीटर दूर मियांपुर प्राथमिक विद्यालय में शामिल कर दिया गया। ओलंदगंज जूनियर विद्यालय को भी मियांपुर जूनियर हाईस्कूल में शमिल कर दिया गया। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रुहट्टा प्रथम को प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन और प्राथमिक विद्यालय रुहट्टा द्वितीय को प्राथमिक विद्यालय मतापुर में शामिल कर दिया गया है।
विज्ञापन
इस बावत बीएसए के डा. राजेंद्र सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद का ग्रामीण और शहरी अलग अलग संवर्ग होने के नाते ग्रामीण संवर्ग के शिक्षकों को शहर के विद्यालयों में तैनाती बिना शासन के निर्देश पर नहीं हो सकती। पुराने शिक्षकों के रिटार होने पर यह स्थिति उत्पन्न हुई है। फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में कुल 2416 प्राथमिक और 878 जूनियर विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में 3.81 लाख 222 छात्र पंजीकृत हैं। इन बच्चों की तालीम की जिम्मेदारी 9 हजार शिक्षकों पर है। प्रति माह करीब 40 करोड़ से अधिक का बजट शिक्षकों की तनख्वाह पर ही खर्च होता है। इसके अलावा एमडीएम, ड्रेस, बैग आदि पर भी हर साल करोड़ों का बजट खर्च किया जाता है। बावजूद इसके नगर क्षेत्र में स्थित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों की दशा बदतर हो चुकी है। पूरे जिले में जूनियर और प्राथमिक के कुल 2994 विद्यालयों में 9000 शिक्षक तैनात हैं। शिक्षकों का औसत देखा जाय तो सभी विद्यालयों पर दो से अधिक शिक्षकों की तैनाती हो सकती है। लेकिन परिषदीय विद्यालयों में ग्रामीण और शहरी विद्यालयों का अलग अलग संवर्ग होने के नाते अफसर भी बेबस हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह कहते हैं कि शहर के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के बारे में शासन को हर साल अवगत कराया जाता है। लेकिन नए शिक्षकों की तैनाती न होने के चलते जैसे जैसे शिक्षक रिटायर्ड हो रहे हैं वेैसे वैसे शिक्षकों की कमी बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
एक भवन में संचालति हो रहे दो विद्यालय
जौनपुर। भवन और शिक्षकों की कमी को देखते हुए इस साल से कुछ विद्यालयों को एक दूसरे के साथ मर्ज करते हुए एक ही भवन में कर दिया गया है। प्राथमिक विद्यालय ओलंदगंज को यहां से करीब दो किलोमीटर दूर मियांपुर प्राथमिक विद्यालय में शामिल कर दिया गया। ओलंदगंज जूनियर विद्यालय को भी मियांपुर जूनियर हाईस्कूल में शमिल कर दिया गया। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रुहट्टा प्रथम को प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन और प्राथमिक विद्यालय रुहट्टा द्वितीय को प्राथमिक विद्यालय मतापुर में शामिल कर दिया गया है।
विज्ञापन
इस बावत बीएसए के डा. राजेंद्र सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद का ग्रामीण और शहरी अलग अलग संवर्ग होने के नाते ग्रामीण संवर्ग के शिक्षकों को शहर के विद्यालयों में तैनाती बिना शासन के निर्देश पर नहीं हो सकती। पुराने शिक्षकों के रिटार होने पर यह स्थिति उत्पन्न हुई है। फिर भी वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।