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कंपनी के डायरेक्टर समेत 15 पर दर्ज होगी प्राथमिकी
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:24 PM IST
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जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित कंपनी लोगों का करोड़ों रुपए लेकर भाग गई। रुपए जमा कराने वाले अभिकर्ता के प्रार्थना पत्र पर सीजेएम ने थानाध्यक्ष लाइन बाजार को आदेश दिया कि कंपनी के डायरेक्टर समेत 15 आरोपियों पर धोखाधड़ी व जालसाजी की प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करें।
शिवशंकर जायसवाल निवासी रीठी, सिकरारा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि वह स्काईलार्क लैंड डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड का अभिकर्ता है। ग्वालियर में पंजीकृत कंपनी कई नामों से चल रही है। अनी मोटर्स, पालीटेक्निक चौराहा पर इसकी शाखा खोली गई। वादी को यह कहते हुए कंपनी ने अभिकर्ता नियुक्त किया कि साढ़े पांच वर्ष में धन दोगुना हो जाएगा और उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर जमीन आवास हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार द्वारा संचालित तमाम बैंक भी इस कंपनी से कर्ज लेती हैं। इसका स्कोप बहुत अच्छा है। वादी व अन्य गवाहों ने कंपनी के डायरेक्टर, शाखा प्रबंधक व अन्य कर्मियों की बातों पर विश्वास करके हजारों ग्राहकों के करोड़ों रुपए कंपनियों में जमा कराया। पैसा परिपक्व होने पर जब ग्राहक अपना बांड जमा कराने गए तब पता चला कि कंपनी की शाखा का कोई अता-पता नहीं है। उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी व जालसाजी करके करोड़ों रुपए लेकर कंपनी भाग गई। ग्राहकों को न रुपए मिले न प्लाट। प्रार्थना पत्र में आरोपी बनाए गए कंपनी के डायरेक्टर दुर्गाप्रसाद, शाखा प्रबंधक साहब लाल समेत 15 आरोपियों के खिलाफ गंभीर मामला पाते हुए कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष को दिया।
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शिवशंकर जायसवाल निवासी रीठी, सिकरारा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया कि वह स्काईलार्क लैंड डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड का अभिकर्ता है। ग्वालियर में पंजीकृत कंपनी कई नामों से चल रही है। अनी मोटर्स, पालीटेक्निक चौराहा पर इसकी शाखा खोली गई। वादी को यह कहते हुए कंपनी ने अभिकर्ता नियुक्त किया कि साढ़े पांच वर्ष में धन दोगुना हो जाएगा और उपभोक्ताओं को कम मूल्य पर जमीन आवास हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार द्वारा संचालित तमाम बैंक भी इस कंपनी से कर्ज लेती हैं। इसका स्कोप बहुत अच्छा है। वादी व अन्य गवाहों ने कंपनी के डायरेक्टर, शाखा प्रबंधक व अन्य कर्मियों की बातों पर विश्वास करके हजारों ग्राहकों के करोड़ों रुपए कंपनियों में जमा कराया। पैसा परिपक्व होने पर जब ग्राहक अपना बांड जमा कराने गए तब पता चला कि कंपनी की शाखा का कोई अता-पता नहीं है। उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी व जालसाजी करके करोड़ों रुपए लेकर कंपनी भाग गई। ग्राहकों को न रुपए मिले न प्लाट। प्रार्थना पत्र में आरोपी बनाए गए कंपनी के डायरेक्टर दुर्गाप्रसाद, शाखा प्रबंधक साहब लाल समेत 15 आरोपियों के खिलाफ गंभीर मामला पाते हुए कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करके विवेचना का आदेश थानाध्यक्ष को दिया।
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