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बिना मुआवजा दिए ही प्रशासन ने ढहवा दिया मकान
Updated Tue, 05 Jun 2018 12:22 AM IST
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जौनपुर। फोरलेन निर्माण के लिए सोमवार को बक्शा थाना क्षेत्र के सवंशा गांव में बिना मुआवजा दिए ही प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मकान ढहवा दिया। गांव के लोगों ने विरोध किया तो उनसे बदसलूकी की गई। पीड़ित काश्तकारों ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। गांव के लोगों का आरोप है कि जिस भू खंड का गजट नहीं हुआ है उसे भी प्रशासन कब्जा कर रहा है और बिना सीमांकन कराए उनकी जमीन पर मनमानी तरीके से कब्जा किया जा रहा है।
वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। सवंशा गांव के 10 से अधिक किसानों का आरोप है कि उनकी जितनी जमीन का हिस्सा सड़क के लिए अधिग्रहण की गई है उससे अधिक भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसके अलावा बिना मुआवजा दिए ही जबरन जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। सड़क किनारे बने उनके मकान भी बिना मुआवजा के ही ढहा दिए गए। कई फलदार पेड़ भी काट दिए गए। सोमवार को दोपहर एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी जेसीबी, पोकलैंड मशीन और भारी पुलिस बल के साथ सवंशा गांव पहुंची। किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा शुरू कर दिया गया। महेंद्र उपाध्याय का मकान जबरन जेसीबी से ढहवा दिया गया जिसका किसानों ने विरोध किया। गांव के सतीश उपाध्याय ने सीमांकन के बाद जमीन पर कब्जा करने की बात कही तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। सवंशा गांव निवासी रमाकांत उपाध्याय का आरोप है कि 23 मई को प्रशासन ने इसी तरह बगीचे में जबरन पेड़ कटवा दिया। जिसके सदमें में बहू बीना उपाध्याय की 29 मई को मौत हो गई। गांव के काश्तकार सवंशा गांव के मंजीत उपाध्याय, संतोष उपाध्याय, महेंद्र उपाध्याय, अरविंद उपाध्याय, संत प्रसाद उपाध्याय, सतीश उपाध्याय, हरीश उपाध्याय, अंब्रीस उपाध्याय, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, डब्बू उपाध्याय, हरीश उपाध्याय आदि ने पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्य मंत्री आदित्यनाथ को संयुक्त रूप से प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
मुकदमा नायब तहसीलदार की कोर्ट में चल रहा है। जब मुकदमे का फैसला आएगा तो संबंधित को मुआवजा दिया जाएगा। नियम है कि एनएचआई जब किसानों को नोटिस दे देती है तभी से उसका कब्जा मान लिया जाता है।
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प्रियंका प्रियदर्शिनी
एसडीएम सदर
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वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। सवंशा गांव के 10 से अधिक किसानों का आरोप है कि उनकी जितनी जमीन का हिस्सा सड़क के लिए अधिग्रहण की गई है उससे अधिक भूमि पर कब्जा किया जा रहा है। इसके अलावा बिना मुआवजा दिए ही जबरन जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। सड़क किनारे बने उनके मकान भी बिना मुआवजा के ही ढहा दिए गए। कई फलदार पेड़ भी काट दिए गए। सोमवार को दोपहर एसडीएम सदर प्रियंका प्रियदर्शिनी जेसीबी, पोकलैंड मशीन और भारी पुलिस बल के साथ सवंशा गांव पहुंची। किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा शुरू कर दिया गया। महेंद्र उपाध्याय का मकान जबरन जेसीबी से ढहवा दिया गया जिसका किसानों ने विरोध किया। गांव के सतीश उपाध्याय ने सीमांकन के बाद जमीन पर कब्जा करने की बात कही तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। सवंशा गांव निवासी रमाकांत उपाध्याय का आरोप है कि 23 मई को प्रशासन ने इसी तरह बगीचे में जबरन पेड़ कटवा दिया। जिसके सदमें में बहू बीना उपाध्याय की 29 मई को मौत हो गई। गांव के काश्तकार सवंशा गांव के मंजीत उपाध्याय, संतोष उपाध्याय, महेंद्र उपाध्याय, अरविंद उपाध्याय, संत प्रसाद उपाध्याय, सतीश उपाध्याय, हरीश उपाध्याय, अंब्रीस उपाध्याय, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, डब्बू उपाध्याय, हरीश उपाध्याय आदि ने पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्य मंत्री आदित्यनाथ को संयुक्त रूप से प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
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मुकदमा नायब तहसीलदार की कोर्ट में चल रहा है। जब मुकदमे का फैसला आएगा तो संबंधित को मुआवजा दिया जाएगा। नियम है कि एनएचआई जब किसानों को नोटिस दे देती है तभी से उसका कब्जा मान लिया जाता है।
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प्रियंका प्रियदर्शिनी
एसडीएम सदर