{"_id":"5aff1c9f4f1c1b5b798b4fb5","slug":"152666844320-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनुष्य के भीतर अपरिमित ज्ञान एवं संवेदनास: स्वामी रामदेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनुष्य के भीतर अपरिमित ज्ञान एवं संवेदनास: स्वामी रामदेव
Updated Sat, 19 May 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। स्वामी रामदेव कहा कि लोगों में योग ने हर किसी में राष्ट्र भक्ति, प्रेम और नैतिकता का संचार किया। योग वृक्ष में बीज की तरह काम करता है। हमारा मस्तिष्क भी योग से ही एक्टिवेट होता है। है। जो मनुष्य अपने पिंडियों को जगा लेगा। वह नर से नारायण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं सभी समान हैं और सभी महान हैं। समाज में सभी के प्रति एक भाव रखना चाहिए। वह शुक्रवार को बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन में आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक भी योग की महत्ता को समझ गए हैं। योग हमारे पुरखों का ज्ञान है। मेडिकल साइंस सत्य है योग उससे भी परासत्य है। योग से शरीर के पूरे सिस्टम को व्यवस्थित किया जाता है। आज हमें साइंस के साथ वैदिक साइंस और गणित के साथ वैदिक गणित पढ़ने की जरूरत है तभी देश का भला हो सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में मति, भक्ति और कृति तीन चीजों का सामंजस्य हो जाए तो उसे महान बनने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जिन जड़ी बूटियों को घास फूस समझ कर फेंक दिया जाता था आज उनसे हजारों करोड़ का साम्राज्य इस देश के लिए तैयार हुआ है। यह जड़ी बूटियां सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनी है। मंच से ही योग कराया एवं भजन के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना पैदा की। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्वामी रामदेव का आगमन बहुत गौरव की बात है। वैज्ञानिक युग में भी मनुष्य संत-महंत और हृषियों के आशीर्वाद से अपने जीवन ही नहीं मरने के बाद भी सब कुछ प्राप्त कर सकता है। विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए स्वामी रामदेव से कुलपति ने सहयोग की अपेक्षा की।
कुलपति ने स्वामी रामदेव को अीभिनंदन पत्र, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने पतंजलि योग समिति के प्रभारी शशि भूषण को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रो. मानस पांडेय द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुल गीत एवं राष्ट्र गीत प्रस्तुत किया। संचालन डॉ मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर डा. आर बी त्रिपाठी, डा.राकेश, संतोष दास, सुरेंद्र, वित्त अधिकारी एम के सिंह, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. बीबी तिवारी, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. रामनारायण, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. अजय प्रताप सिंह, डा. राघवेंद्र पांडेय, डा.संतोष कुमार, डा. राजकुमार सोनी, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. आशुतोष सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि चिकित्सक भी योग की महत्ता को समझ गए हैं। योग हमारे पुरखों का ज्ञान है। मेडिकल साइंस सत्य है योग उससे भी परासत्य है। योग से शरीर के पूरे सिस्टम को व्यवस्थित किया जाता है। आज हमें साइंस के साथ वैदिक साइंस और गणित के साथ वैदिक गणित पढ़ने की जरूरत है तभी देश का भला हो सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में मति, भक्ति और कृति तीन चीजों का सामंजस्य हो जाए तो उसे महान बनने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जिन जड़ी बूटियों को घास फूस समझ कर फेंक दिया जाता था आज उनसे हजारों करोड़ का साम्राज्य इस देश के लिए तैयार हुआ है। यह जड़ी बूटियां सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनी है। मंच से ही योग कराया एवं भजन के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना पैदा की। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में स्वामी रामदेव का आगमन बहुत गौरव की बात है। वैज्ञानिक युग में भी मनुष्य संत-महंत और हृषियों के आशीर्वाद से अपने जीवन ही नहीं मरने के बाद भी सब कुछ प्राप्त कर सकता है। विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए स्वामी रामदेव से कुलपति ने सहयोग की अपेक्षा की।
विज्ञापन
कुलपति ने स्वामी रामदेव को अीभिनंदन पत्र, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया। कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने पतंजलि योग समिति के प्रभारी शशि भूषण को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक प्रो. मानस पांडेय द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुल गीत एवं राष्ट्र गीत प्रस्तुत किया। संचालन डॉ मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर डा. आर बी त्रिपाठी, डा.राकेश, संतोष दास, सुरेंद्र, वित्त अधिकारी एम के सिंह, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. बीबी तिवारी, प्रो अजय द्विवेदी, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. रामनारायण, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. अजय प्रताप सिंह, डा. राघवेंद्र पांडेय, डा.संतोष कुमार, डा. राजकुमार सोनी, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. आशुतोष सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. अवध बिहारी सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन