{"_id":"5af5e50c4f1c1bd0408b48aa","slug":"15260643932-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोष्ठी में कवियों ने किया काव्य पाठ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोष्ठी में कवियों ने किया काव्य पाठ
Updated Sat, 12 May 2018 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जौनपुर। नगर के हिंदी भवन में हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपने रचनाओं से व्यवस्था पर तंज भी किया और गुदगुदाया भी।
प्रो. आशुतोष उपाध्याय की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में अमृत प्रकाश ने ‘आसमान को छूती इमारतें’ कविता का पाठ किया। अनिल उपाध्याय ने ‘पुस्तक और पत्नी’, रामजीत मिश्र ने ‘कुछ तुम जोड़ो कुछ मैं जोड़ूं’, राजेश पांडेय ने ‘मैं ही तो कारण सत्ता हूं’, सत्य प्रकाश ने ‘पानी की खोज में गए, हिरनों के पांव चल गए‘ कविताएं सुनाईं। सुनील विक्रम सिंह ने ‘मृतक आश्रित’ कविता से व्यवस्था पर तंज कसा। जनार्दन अस्थाना ने ‘तुम्हारी याद के बड़ा आदमी’, डा. आशुतोष उपाध्याय ने ‘आंख का पानी मैं लिखता हूं’, शायर अब्बास ने ‘कैसी बहार आई चमन में कि हर तरफ, सूनी पड़ी है शाखे शजर’ सुनाया। धीरेंद्र पटेल ने बेटियां, गीता श्रीवास्तव ने मैं नदी की भटकती लहर बन गई या किसी की गजल की बहर बन गई, सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने व्यंग्य रचनाएं, ओम प्रकाश मिश्र ने लड्डू पीती लड्डू से हाथ धोती है, ये पूंजी बेहया बेदर्द होती है व डा. पीसी विश्वकर्मा ने अमीरी उसको अदब से सरल करती है, पहुंच के लौटा है जो मुफलिसी की सरहद तक काव्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर रामराज गौतम, सतीश कुमार, डा. चंद्रभूषण त्रिपाठी, विक्रम सिंह आदि उपस्थित रहे।
प्रो. आशुतोष उपाध्याय की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में अमृत प्रकाश ने ‘आसमान को छूती इमारतें’ कविता का पाठ किया। अनिल उपाध्याय ने ‘पुस्तक और पत्नी’, रामजीत मिश्र ने ‘कुछ तुम जोड़ो कुछ मैं जोड़ूं’, राजेश पांडेय ने ‘मैं ही तो कारण सत्ता हूं’, सत्य प्रकाश ने ‘पानी की खोज में गए, हिरनों के पांव चल गए‘ कविताएं सुनाईं। सुनील विक्रम सिंह ने ‘मृतक आश्रित’ कविता से व्यवस्था पर तंज कसा। जनार्दन अस्थाना ने ‘तुम्हारी याद के बड़ा आदमी’, डा. आशुतोष उपाध्याय ने ‘आंख का पानी मैं लिखता हूं’, शायर अब्बास ने ‘कैसी बहार आई चमन में कि हर तरफ, सूनी पड़ी है शाखे शजर’ सुनाया। धीरेंद्र पटेल ने बेटियां, गीता श्रीवास्तव ने मैं नदी की भटकती लहर बन गई या किसी की गजल की बहर बन गई, सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने व्यंग्य रचनाएं, ओम प्रकाश मिश्र ने लड्डू पीती लड्डू से हाथ धोती है, ये पूंजी बेहया बेदर्द होती है व डा. पीसी विश्वकर्मा ने अमीरी उसको अदब से सरल करती है, पहुंच के लौटा है जो मुफलिसी की सरहद तक काव्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर रामराज गौतम, सतीश कुमार, डा. चंद्रभूषण त्रिपाठी, विक्रम सिंह आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन