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घर को इस्लाम को बचाने के लिए लुटा दिया
Updated Tue, 08 May 2018 11:52 PM IST
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जौनपुर । कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन की विलादत की याद में सोमवार की देर रात में शिया कालेज में महफिल आयोजित हुई। इसमें देश के जाने माने शायरों ने अपना कलाम पढ़कर नजराने अकीदत पेश की।
विश्व प्रसिद्ध शायर शबरोज कानपुरी ने कि ‘सबसे अच्छा सब से प्यारा मेरा हिंदुस्तान है’ सुनाया। । महफिल को खिताब करते हुए बस्ती से आए मौलाना हैदर मेहंदी ने कहा कि इमाम हुसैन उस अजीम शख्सियत का नाम है जिन्होंने अपने घर को इस्लाम के लिए लुटा दिया। उर्दू माह शाबान में उनकी वेलादत हुई। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन उस अजीम शख्सियत का नाम है जिसने हमेशा दूसरों को दिया लेकिन कभी अपने लिए कुछ नही मांगा। जब इस्लाम बचाने की बात आई तो 10 मोहर्रम की तारीख को अपने कुनबे के 72 लोगों की शहादत दे दी। जिसमें उनके दोस्त भी थे और उनके घर वाले भी। बाद महफ़िल सभी ने एक दूसरे को गले मिलकर इमाम की विलादत की बधाई दी । शिया कालेज के प्रबंधक नजमुल हसन नजमी, मीना रिजवी कालेज के प्रबंधक मिर्जा जावेद सुल्तान , प्रधानाचार्य डॉ अलमदार नजर, मुजम्मिल हुसैन, आजम खां, जुहैब हसन, असग़र मेहदी,वसी अहमद, रजा खान, हाजी असगर हुसैन जैदी , तहसीन अब्बास सोनी , हसन मेहदी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । फखरी मेरठी , जफ़र आजमी ,मारूफ सिरसवी , आजम सुल्तानपुरी ,वारिस जलालपुरी , मुदस्सिर खनवाई आदि प्रमुख शायरों ने कलाम पेश किया । जाहिद काजमी बलरामपुरी ने संचालन किया ।
विश्व प्रसिद्ध शायर शबरोज कानपुरी ने कि ‘सबसे अच्छा सब से प्यारा मेरा हिंदुस्तान है’ सुनाया। । महफिल को खिताब करते हुए बस्ती से आए मौलाना हैदर मेहंदी ने कहा कि इमाम हुसैन उस अजीम शख्सियत का नाम है जिन्होंने अपने घर को इस्लाम के लिए लुटा दिया। उर्दू माह शाबान में उनकी वेलादत हुई। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन उस अजीम शख्सियत का नाम है जिसने हमेशा दूसरों को दिया लेकिन कभी अपने लिए कुछ नही मांगा। जब इस्लाम बचाने की बात आई तो 10 मोहर्रम की तारीख को अपने कुनबे के 72 लोगों की शहादत दे दी। जिसमें उनके दोस्त भी थे और उनके घर वाले भी। बाद महफ़िल सभी ने एक दूसरे को गले मिलकर इमाम की विलादत की बधाई दी । शिया कालेज के प्रबंधक नजमुल हसन नजमी, मीना रिजवी कालेज के प्रबंधक मिर्जा जावेद सुल्तान , प्रधानाचार्य डॉ अलमदार नजर, मुजम्मिल हुसैन, आजम खां, जुहैब हसन, असग़र मेहदी,वसी अहमद, रजा खान, हाजी असगर हुसैन जैदी , तहसीन अब्बास सोनी , हसन मेहदी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे । फखरी मेरठी , जफ़र आजमी ,मारूफ सिरसवी , आजम सुल्तानपुरी ,वारिस जलालपुरी , मुदस्सिर खनवाई आदि प्रमुख शायरों ने कलाम पेश किया । जाहिद काजमी बलरामपुरी ने संचालन किया ।
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