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भक्त प्रहलाद को भगवान विष्णु ने दिया अभय का वरदान
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:52 AM IST
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बरईपार। प्रह्लाद को भगवान विष्णु ने अभय का वरदान दिया था। यह बात नारायण स्वामी महाराज ने कटका गांव में श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन शुक्रवार को भक्त प्रह्लाद की कथा में कही।
उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी के वर से तीनों लोकों को वश में कर लिया। वायु, अग्नि, जल, चंद्र पर राज करने लगा था। खुद ही धन का स्वामी बन गया और यम का पद छीन लिया था। देवता स्वर्ग त्याग कर धरती पर आने को मजबूर हो गए। एक दिन प्रह्लाद से उसने पूछा कि अब तक तूने जो कुछ भी पढा है, उसे सार रूप में बता। प्रह्लाद ने कहा कि जो मेरे मन में समाया है उसका न आदि है और न अंत, वह नश्वर है। यह सुनते ही वह क्रोधित हो गया और गुरु से बोला कि हे दुर्मति ब्रह्मण तुमने से इसे क्या सिखाया है। इस पर गुरु बोले आपका पुत्र मेरा सिखाया हुई नहीं बोल रहा है। हिरण्यकश्यप से प्रह्लाद से पूछा कि तुम्हें यह सब किसने सिखाया। तो प्रह्लाद ने निडर होकर कहा कि विष्णु सबके भीतर हैं और वही सब सिखाते हैं। वही आपके भी विधाता हैं। पूर्व आयोजक श्रीप्रकाश मिश्र ने आभर व्यक्त किया। मार्कंडेय पांडेय, जय प्रकाश मिश्र, देवेंद्र पांडेय, जमुना मिश्र, कामता प्रसाद पांडेय, घनश्याम मिश्र आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी के वर से तीनों लोकों को वश में कर लिया। वायु, अग्नि, जल, चंद्र पर राज करने लगा था। खुद ही धन का स्वामी बन गया और यम का पद छीन लिया था। देवता स्वर्ग त्याग कर धरती पर आने को मजबूर हो गए। एक दिन प्रह्लाद से उसने पूछा कि अब तक तूने जो कुछ भी पढा है, उसे सार रूप में बता। प्रह्लाद ने कहा कि जो मेरे मन में समाया है उसका न आदि है और न अंत, वह नश्वर है। यह सुनते ही वह क्रोधित हो गया और गुरु से बोला कि हे दुर्मति ब्रह्मण तुमने से इसे क्या सिखाया है। इस पर गुरु बोले आपका पुत्र मेरा सिखाया हुई नहीं बोल रहा है। हिरण्यकश्यप से प्रह्लाद से पूछा कि तुम्हें यह सब किसने सिखाया। तो प्रह्लाद ने निडर होकर कहा कि विष्णु सबके भीतर हैं और वही सब सिखाते हैं। वही आपके भी विधाता हैं। पूर्व आयोजक श्रीप्रकाश मिश्र ने आभर व्यक्त किया। मार्कंडेय पांडेय, जय प्रकाश मिश्र, देवेंद्र पांडेय, जमुना मिश्र, कामता प्रसाद पांडेय, घनश्याम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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